भारत के AMCA इंजन के लिए हाई-स्टेक लड़ाई: Safran बनाम Rolls-Royce
Safran बनाम Rolls-Royce: AMCA इंजन की वह दौड़ जो भारत की एयरोस्पेस आत्मनिर्भरता को नई दिशा दे सकती है
जैसे-जैसे भारत अपने नेक्स्ट-जेनरेशन फाइटर जेट के लिए जुलाई 2025 तक फैसला लेने की ओर बढ़ रहा है, AMCA के प्रोपल्शन सिस्टम के लिए दो वैश्विक एयरोस्पेस दिग्गजों के बीच औद्योगिक खींचतान तेज हो गई है।
एक फाइटर जेट की दहाड़ सिर्फ उसकी ताकत नहीं, बल्कि रणनीतिक परिपक्वता का संकेत होती है। वर्षों से, भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान एक कड़वी सच्चाई से जूझ रहा है: भले ही भारत एक ही मिशन में सौ से अधिक उपग्रह लॉन्च कर सकता है, लेकिन विश्व स्तरीय, हाई-थ्रस्ट जेट इंजन बनाने की क्षमता अभी भी एयरोस्पेस आत्मनिर्भरता की अंतिम चुनौती बनी हुई है। जैसे-जैसे एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम हकीकत के करीब पहुंच रहा है, इसके 120-kN इंजन का चयन एक बड़े भू-राजनीतिक और औद्योगिक मुकाबले में बदल गया है।
दावेदार और उनका प्रस्ताव
एक तरफ फ्रांस की Safran है, जो एक लंबे समय से भारत की पार्टनर रही है और जिसके M88 इंजन भारतीय वायु सेना के राफेल बेड़े को ताकत देते हैं। Safran का प्रस्ताव संस्थागत विश्वास और पुराने संबंधों पर टिका है। बढ़ते प्रतिस्पर्धी दबाव को देखते हुए, इस फ्रांसीसी दिग्गज ने 2025 के अंत में अपने प्रस्ताव को और बेहतर बनाया है, जिसमें पहले से कहीं अधिक अनुकूल शर्तें शामिल की गई हैं। उनकी रणनीति निरंतरता पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य भारत में वर्षों की ऑपरेशनल सर्विस से बनी साख का लाभ उठाना है।
दूसरी ओर, Rolls-Royce एक आक्रामक और नई पहल कर रही है। यह ब्रिटिश निर्माता एक व्यापक प्रस्ताव पेश कर रही है, जिसमें भारत के लिए पूर्ण बौद्धिक संपदा (IP) अधिकार और 120-kN से 140-kN तक की क्षमता वाला स्केलेबल इंजन आर्किटेक्चर देने का वादा किया गया है। F-35B लिफ्टसिस्टम और Dassault Falcon 10X पर अपने काम का हवाला देते हुए, Rolls-Royce खुद को एक ऐसे पार्टनर के रूप में पेश कर रही है जो न केवल AMCA, बल्कि भविष्य के नौसैनिक और नागरिक प्लेटफॉर्म्स को भी शक्ति देने में सक्षम है।
आत्मनिर्भरता की कीमत
इसके लिए वित्तीय प्रतिबद्धता बहुत बड़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Safran और Rolls-Royce दोनों ने जो लागत अनुमान जमा किए हैं, वे कुल मिलाकर 5 बिलियन डॉलर से अधिक हो सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत सरकार एक ऐसे सौदे पर जोर दे रही है जो पूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्थानीय विनिर्माण सुनिश्चित करे। अगर 2026 तक समझौता हो जाता है, तो Rolls-Royce का दावा है कि वह 2030 तक कोर टेस्टिंग शुरू कर सकती है। वहीं, Safran अपने M88 इंजनों के लिए 40-60% लोकलाइजेशन का लक्ष्य रख रही है, ताकि व्यापक 114-जेट MRFA प्रोग्राम के लिए स्वदेशी सामग्री के कड़े नियमों को पूरा किया जा सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: रणनीतिक गणना
यह केवल खरीद का मामला नहीं है; यह भारतीय एयरोस्पेस के लिए एक टर्निंग पॉइंट है। जुलाई 2025 तक अपेक्षित यह फैसला भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की गति तय करेगा। पूर्ण IP और सह-विकास की मांग करके, सरकार यह संकेत दे रही है कि 'खरीदार-विक्रेता' संबंधों का दौर खत्म हो चुका है। इस दौड़ का विजेता वही कंपनी होगी जो भारत को हाई-एंड प्रोपल्शन तकनीक के आयातक से निर्माता बनाने में सबसे बेहतर मदद करेगी। चाहे वह दोनों द्वारा प्रस्तावित वेरिएबल साइकिल तकनीक हो या डीप-टेक एकीकरण का वादा, AMCA इंजन भारत की वायु श्रेष्ठता के अगले तीन दशकों को परिभाषित करेगा।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।