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Sensex Today: मिडिल ईस्ट में तनाव से निफ्टी 24,000 के नीचे, ऑटो शेयरों में भारी गिरावट

Sensex Today | Nifty 50 | Stock Market Live Updates: सेंसेक्स 350 अंक से अधिक टूटा; निफ्टी 24,000 के नीचे; ऑटो सेक्टर में सुस्ती...

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 29 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
Sensex Today: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण निफ्टी 24,000 के नीचे और ऑटो शेयरों में गिरावट
Sensex Today: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण निफ्टी 24,000 के नीचे और ऑटो शेयरों में गिरावट

दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों को उतार-चढ़ाव भरे सत्र का सामना करना पड़ा, क्योंकि क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार में चौतरफा बिकवाली को जन्म दिया, जिससे पिछले दो दिनों की रिकवरी पर पानी फिर गया।

भारतीय निवेशकों के लिए सप्ताह की शुरुआत काफी निराशाजनक रही। BSE Sensex 350 अंक से अधिक लुढ़क गया, जिससे Nifty मनोवैज्ञानिक स्तर 24,000 के नीचे आ गया। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने की खबरों ने stock market में हलचल मचा दी है। हालांकि, शांति समझौते की उम्मीदों ने कुछ समय के लिए बाजार का मूड सुधारा था, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव के दबाव में सूचकांक अपनी दो दिनों की बढ़त को बरकरार नहीं रख सके।

सूचकांकों में लाल निशान का बोलबाला

कमजोरी केवल प्रमुख सूचकांकों तक ही सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी यही रुझान दिखा, जहां Nifty Midcap 100 और Smallcap 100 इंडेक्स में लगभग 0.6% की गिरावट आई। सेक्टर के प्रदर्शन पर नजर डालें तो Nifty Auto इंडेक्स में सबसे ज्यादा दबाव दिखा, जो 2% से अधिक टूट गया। इसके विपरीत, Nifty Pharma ने मजबूती दिखाई और 1% से अधिक की बढ़त के साथ बाजार के रुझान के उलट प्रदर्शन किया।

बाजार की घबराहट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि NSE पर 2,000 से अधिक शेयरों में गिरावट रही, जबकि लगभग 1,330 शेयर ही बढ़त बना सके। वैश्विक संकेत भी कमजोर रहे; जापान का Topix और हांगकांग का Hang Seng भी दबाव में दिखे, जो मिडिल ईस्ट की चिंताओं के कारण क्षेत्रीय स्तर पर आई गिरावट को दर्शाता है।

यह क्यों मायने रखता है

यह अस्थिरता दर्शाती है कि बाहरी कारणों से बाजार का मूड कितनी जल्दी बदल सकता है, भले ही घरेलू मैक्रो इंडिकेटर, जैसे कि महंगाई में कमी की उम्मीदें, सकारात्मक हों। हालांकि Goldman Sachs जैसे विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष का दीर्घकालिक प्रभाव उतना गंभीर नहीं हो सकता जितना पहले डर था, लेकिन बाजार अभी भी 'तीखी बयानबाजी' को लेकर बेहद संवेदनशील है। जब भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ते हैं, तो ऑटो जैसे ब्याज दर के प्रति संवेदनशील सेक्टर सबसे पहले प्रभावित होते हैं। खुदरा निवेशकों के लिए, मौजूदा बाजार संकेत देता है कि हालांकि आर्थिक दृष्टिकोण स्थिर है, लेकिन आगे की राह शांति वार्ता और तेल की कीमतों में संभावित उछाल के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी।

आगे की राह

इस निराशा के बीच, डेट मार्केट में एक उम्मीद की किरण है। महंगाई कम होने की उम्मीदों के साथ, विश्लेषक भारत के 30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड में वैल्यू देख रहे हैं, जिसे वे ऊर्जा की ऊंची कीमतों से जुड़े वित्तीय जोखिमों के खिलाफ एक बचाव (हेज) के रूप में देख रहे हैं। बाजार इस गिरावट से जूझ रहा है, ऐसे में निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर एक महत्वपूर्ण पायदान बना हुआ है। सूचकांक इस स्तर को दोबारा हासिल कर पाएंगे या नहीं, यह इस पर निर्भर करेगा कि शांति वार्ताएं कितनी प्रभावी रहती हैं और बाजार क्षेत्रीय संघर्ष के जोखिम को किस तरह से देखता है।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।