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जयपुर में सड़क चौड़ीकरण के लिए नूरानी मस्जिद को गिराया गया

जयपुर अतिक्रमण विरोधी अभियान: नूरानी मस्जिद पूरी तरह ध्वस्त, मलबा हटाया जा रहा; कमेटी ने नोटिस मिलने में देरी का आरोप लगाया

द्वारा राजनीति डेस्कप्रकाशित 8 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
जयपुर में सड़क चौड़ीकरण के लिए नूरानी मस्जिद को गिराया गया
जयपुर में सड़क चौड़ीकरण के लिए नूरानी मस्जिद को गिराया गया

एक बड़े सुरक्षा अभियान के तहत शहर के नंदपुरी इलाके में नूरानी मस्जिद को गिरा दिया गया। मस्जिद कमेटी ने नोटिस की अवधि बहुत कम होने पर नाराजगी जताई है।

सोमवार सुबह मालवीय नगर की शांति भारी मशीनों की गड़गड़ाहट से भंग हो गई, जब जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने लंबे समय से प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना को अंजाम दिया। दोपहर तक, जगतपुरा और जवाहर सर्कल के बीच प्रस्तावित 80 फुट के कॉरिडोर के रास्ते में आने वाली नूरानी मस्जिद को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। जैसे ही जेसीबी मलबे को हटाने का काम कर रही थीं, पूरा इलाका एक किले में तब्दील हो गया, जिसे 3,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की इकाइयों ने घेर रखा था।

यह जयपुर अतिक्रमण विरोधी अभियान केवल एक स्थल तक सीमित नहीं था; JDA ने पांच धार्मिक ढांचों—एक मस्जिद, एक मजार, एक सत्संग भवन और दो मंदिरों—को सड़क परियोजना में बाधा के रूप में चिह्नित किया था। जहां दो हिंदू ढांचों के प्रबंधन ने बुलडोजर आने से पहले स्वेच्छा से जगह खाली करने का निर्णय लिया, वहीं मस्जिद का नजारा बिल्कुल अलग था। स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने जगह खाली करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की।

विवादित नोटिस अवधि

पूरा विवाद आधिकारिक सूचना मिलने के समय को लेकर है। कमेटी का कहना है कि नोटिस उन्हें शुक्रवार रात को मिला, जो उनके अनुसार कानूनी चुनौती देने के लिए बहुत देर हो चुकी थी। मस्जिद का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों का तर्क है कि दो दिन के समय ने उन्हें कानूनी रास्ता अपनाने या वैकल्पिक व्यवस्था करने का मौका नहीं दिया। हालांकि, JDA का कहना है कि आवश्यक चेतावनी पहले ही दी जा चुकी थी और शहर के बढ़ते ट्रैफिक को कम करने के लिए यह परियोजना जरूरी है।

प्रशासन की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरे ऑपरेशन के दौरान जयपुर उत्तर और जयपुर पूर्व पुलिस स्टेशनों के अंतर्गत इंटरनेट सेवाएं 9 जून की आधी रात तक बंद कर दी गई थीं। धारा 163 लागू होने के कारण—जिसमें पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है—शहर में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और प्रशासन बुनियादी ढांचे के विकास के लिए रास्ता साफ करने में जुटा है।

बड़ी तस्वीर

यह विध्वंस तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और पुराने धार्मिक स्थलों के संरक्षण के बीच अक्सर देखने को मिलने वाले टकराव का एक उदाहरण है। भारत के कई शहरों में, राज्य सरकारें शहरी बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए 'राइट-ऑफ-वे' परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रही हैं। जब ये कॉरिडोर धार्मिक या सामुदायिक स्थलों से होकर गुजरते हैं, तो यह विवाद केवल टाउन प्लानिंग का न रहकर सामुदायिक पहचान और निष्पक्ष प्रक्रिया का मुद्दा बन जाता है। संवेदनशील मामलों को सुलझाने के लिए भारी पुलिस तैनाती और इंटरनेट शटडाउन पर निर्भरता यह दर्शाती है कि प्रशासन बातचीत के बजाय बुलडोजर की कार्रवाई को प्राथमिकता दे रहा है।

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