जयपुर में अतिक्रमण विरोधी अभियान LIVE: नूरी मस्जिद जमींदोज, नोटिस विवाद के बीच मलबा हटाया जा रहा
जयपुर में अतिक्रमण विरोधी अभियान LIVE: नूरी मस्जिद जमींदोज, नोटिस विवाद के बीच मलबा हटाया जा रहा

मालवीय नगर में एक बड़े बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) प्रोजेक्ट ने उस समय तूल पकड़ लिया जब जेडीए (JDA) ने शहर के मुख्य सड़क मार्गों को साफ करने के लिए धार्मिक ढांचों को गिरा दिया।
सोमवार को जयपुर की सुबह बुलडोजरों की गड़गड़ाहट और डिजिटल ब्लैकआउट की खामोशी के साथ हुई। सूर्योदय तक नंदपुरी इलाका एक किले में तब्दील हो चुका था, जहां 3,000 से अधिक पुलिसकर्मी और राजस्थान सशस्त्र कांस्टेबुलरी (RAC) की टुकड़ियां विध्वंस स्थल के चारों ओर तैनात थीं। इस जयपुर अतिक्रमण विरोधी अभियान लाइव ऑपरेशन के केंद्र में नूरी मस्जिद थी, जिसे अधिकारियों ने जगतपुरा को जवाहर सर्कल से जोड़ने वाली सड़क को 80 फीट चौड़ा करने की लंबे समय से लंबित योजना में मुख्य बाधा माना था।
जैसे ही जेडीए की भारी मशीनरी ने काम शुरू किया और नूरी मस्जिद को गिराकर मलबा हटाया जाने लगा, स्थानीय अधिकारियों ने काम जल्दी पूरा करने की कोशिश की, जिससे एक तीखा नोटिस विवाद खड़ा हो गया। जहां उसी रास्ते पर स्थित दो हिंदू धार्मिक ढांचों को उनके प्रबंधन द्वारा स्वेच्छा से खाली कर दिया गया था, वहीं मस्जिद समिति अपनी बात पर अड़ी रही। समिति के अधिकारियों का दावा है कि उन्हें विध्वंस का नोटिस शुक्रवार रात को ही दिया गया था, जिससे उन्हें कानूनी रास्ता अपनाने या बातचीत करने का कोई समय नहीं मिला। इसके विपरीत, जेडीए का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए पहले ही उचित चेतावनी दी जा चुकी थी।
डिजिटल लॉकडाउन की चपेट में शहर
एक सामान्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए इतनी बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती अभूतपूर्व है। भड़काऊ सामग्री के प्रसार या नागरिक अशांति फैलाने वाले वीडियो को रोकने के लिए, जिला प्रशासन ने जयपुर उत्तर और जयपुर पूर्व में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से निलंबित करने का आदेश दिया। 2G से लेकर 5G तक, बल्क SMS और प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आधी रात तक बंद कर दिया गया। BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है, जिसमें अगले दो सप्ताह तक अनधिकृत सार्वजनिक सभाओं पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया गया है।
सड़क चौड़ीकरण की यह परियोजना वर्षों से पाइपलाइन में थी, जिसे नंदपुरी अंडरपास से होने वाले भारी ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए डिजाइन किया गया है। जेडीए के अनुसार, इस 80-फुट कॉरिडोर की सीमा में 134 अवैध स्थायी ढांचे आते हैं। मस्जिद, एक मजार, एक सत्संग भवन और दो मंदिरों के हटाए जाने के बाद, प्रशासन का तर्क है कि मालवीय नगर और जगतपुरा क्षेत्रों की लगभग 50 कॉलोनियों के लिए कनेक्टिविटी सुधारने हेतु यह एक आवश्यक कदम है।
यह महत्वपूर्ण क्यों है: शहरी-कानूनी संतुलन
यह घटना तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और लंबे समय से चले आ रहे धार्मिक स्थलों के संरक्षण के बीच के टकराव को उजागर करती है। जयपुर जैसे शहर के लिए, जहां ऐतिहासिक विकास अक्सर आधुनिक बुनियादी ढांचे की जरूरतों के साथ टकराता है, वहां सड़क चौड़ीकरण के प्रयास अक्सर भूमि-उपयोग विवादों में फंस जाते हैं। प्रशासन का इंटरनेट बंद करने जैसे 'एहतियाती' सुरक्षा घेरे का इस्तेमाल करना यह दर्शाता है कि स्थानीय सरकारें अब शहरी विकास परियोजनाओं को केवल सिविल इंजीनियरिंग कार्यों के बजाय कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौतियों के रूप में देख रही हैं।
बड़ी तस्वीर यह है कि जेडीए स्पष्ट संकेत दे रहा है कि 'अतिक्रमण' के लेबल अब अधिक सख्ती से लागू किए जा रहे हैं। हालांकि यह परियोजना दैनिक ट्रैफिक दबाव को कम करने का वादा करती है, लेकिन विध्वंस की गति और मस्जिद समिति द्वारा जताई गई नाराजगी यह बताती है कि बातचीत और कानूनी प्रक्रियाएं दक्षता की दौड़ में पीछे छूट रही हैं। जैसे-जैसे पुलिस अपनी स्थिति बनाए हुए है, अब ध्यान इस बात पर है कि मलबे की धूल बैठने के बाद प्रशासन सामुदायिक तनाव को कैसे नियंत्रित करेगा।
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