अयोध्या से बहराइच तक: दरगाह प्रबंधन पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप
राम मंदिर के बाद अब बहराइच की दरगाह में करोड़ों रुपये के गबन का आरोप, कमेटी पदाधिकारियों ने दी सफाई
राम मंदिर में चढ़ावे के गायब होने की खबरों के बाद, अब सैयद सालार मसूद गाजी दरगाह का प्रबंधन भी फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर जांच के घेरे में है।
बहराइच स्थित सैयद सालार मसूद गाजी दरगाह का शांत माहौल इस समय एक बड़े विवाद की चपेट में है। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर चल रही सार्वजनिक चर्चाओं के बीच, अब यह दरगाह करोड़ों रुपये के नकद और कीमती चढ़ावे के कथित गबन के आरोपों का केंद्र बन गई है।
ये आरोप बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल बासित ने लगाए हैं, जिन्होंने वर्तमान प्रबंधन समिति की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। चूंकि हजारों की संख्या में जायरीन यहां आते हैं और बड़ी मात्रा में नकद, सोना और चांदी के आभूषण चढ़ाते हैं, ऐसे में इन दान की सुरक्षा और जवाबदेही एक गंभीर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का विषय बन गई है।
प्रबंधन ने बचाव में दी सफाई
इन आरोपों के जवाब में, दरगाह कमेटी के अध्यक्ष बकाउल्लाह खान ने दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे संस्थान की छवि खराब करने की कोशिश बताया है। खान का दावा है कि चढ़ावे की गिनती एक कठोर प्रक्रिया है, जो परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में की जाती है।
प्रबंधन के अनुसार, एकत्र किए गए हर रुपये का सावधानीपूर्वक रिकॉर्ड रखा जाता है, निगरानी में गिनती की जाती है और फिर आधिकारिक बैंक खातों में जमा किया जाता है। इसके अलावा, कमेटी का कहना है कि सभी वित्तीय विवरण नियमित रूप से वक्फ बोर्ड को भेजे जाते हैं, जो एक तरह की निगरानी सुनिश्चित करता है और उन्हें किसी भी गलत काम से मुक्त साबित करता है।
आधिकारिक जांच और मीडिया रिपोर्ट
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई है। जिले के प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने दावों की सत्यता का पता लगाने के लिए जिलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। स्थानीय मीडिया इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है; 'दैनिक जागरण' की एक मूल रिपोर्ट ने इन मुख्य बिंदुओं के लिए प्राथमिक स्रोत के रूप में काम किया है, जिससे यह मुद्दा व्यापक जनमानस के सामने आया है। हालांकि दैनिक जागरण की रिपोर्ट में विशिष्ट आरोपों और कमेटी के बयानों को दर्ज किया गया है, लेकिन जांच अभी शुरुआती चरण में है और अधिकारी जिला प्रशासन की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
बहराइच का यह विवाद एक बढ़ते राष्ट्रीय रुझान को दर्शाता है, जहां बड़े धार्मिक संस्थानों का वित्तीय प्रबंधन—चाहे वह किसी भी धर्म का हो—अभूतपूर्व सार्वजनिक जांच का सामना कर रहा है। ऐसे दौर में जब डिजिटल फुटप्रिंट और राजनीतिक जागरूकता बढ़ रही है, भक्तों और धार्मिक संस्थानों की प्रबंधन समितियों के बीच 'विश्वास की कमी' चौड़ी होती जा रही है। यह घटना इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक निकायों को अब कैसे काम करना चाहिए; दान प्रबंधन की पुरानी प्रणालियां अब पर्याप्त नहीं हैं। चाहे ये आरोप सही हों या केवल राजनीतिक बयानबाजी, धार्मिक स्थलों के प्रबंधन के लिए फोरेंसिक पारदर्शिता की मांग अब एक नया मानक बनती जा रही है।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।