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बहराइच दरगाह में वित्तीय अनियमितता: BJP नेता ने दो दशक के कथित भ्रष्टाचार की SIT जांच की मांग की

बहराइच दरगाह में 20 साल से करोड़ों का गबन! कुंवर बासित अली का बड़ा आरोप, CM योगी आदित्यनाथ से की ये मांग

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 22 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
बहराइच दरगाह में वित्तीय अनियमितता: BJP नेता ने दो दशक के कथित भ्रष्टाचार की SIT जांच की मांग की
बहराइच दरगाह में वित्तीय अनियमितता: BJP नेता ने दो दशक के कथित भ्रष्टाचार की SIT जांच की मांग की

बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के कुंवर बासित अली ने दरगाह हजरत सैयद सालार मसूद गाजी के प्रबंधन की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और 20 वर्षों से करोड़ों रुपये के गबन का आरोप लगाया है।

उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित ऐतिहासिक दरगाह हजरत सैयद सालार मसूद गाजी एक नए विवाद के केंद्र में आ गई है। बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को औपचारिक पत्र लिखकर दो दशकों से चल रही व्यवस्थित वित्तीय धांधली का आरोप लगाया है। इन आरोपों के घेरे में न केवल मौजूदा प्रबंधन, बल्कि दरगाह की देखरेख से जुड़े पूर्व प्रशासक और कई राजनीतिक हस्तियां भी आ गई हैं।

औपचारिक अनुरोध में विस्तार से बताए गए ये आरोप केवल कुप्रबंधन तक सीमित नहीं हैं। अली ने दावा किया है कि चढ़ावे, दुकानों से मिलने वाले किराए और विभिन्न अनुबंधों से प्राप्त धन को व्यवस्थित तरीके से हड़पा गया है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व अध्यक्ष शमशाद अहमद, वर्तमान अध्यक्ष बकाउल्लाह, प्रबंधक अलीमुल हक और समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक यासिर शाह के कार्यकाल की जांच की मांग की है। याचिका में भूमि सौदों, संभावित बेनामी संपत्तियों और 2005 के एक संदिग्ध डकैती मामले के साथ-साथ 2024-25 के अनुबंध आवंटन में 1.02 करोड़ रुपये की कमी के हालिया आरोपों की गहन जांच का आह्वान किया गया है।

जवाबदेही की मांग

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की मांग वक्फ-प्रबंधित संपत्तियों में प्रशासनिक पारदर्शिता की व्यापक मुहिम को दर्शाती है। अली के पत्र में राज्य सरकार से सोने और चांदी के चढ़ावे का भौतिक सत्यापन करने का आग्रह किया गया है—यह कदम वास्तविक दान और दर्ज खातों के मिलान के लिए उठाया गया है। इसके अलावा, उन्होंने मांग की है कि वक्फ की सभी जमीनें और दुकानें, जो कथित तौर पर निजी नामों पर दर्ज हैं, उन्हें वापस लेकर आधिकारिक वक्फ लेजर में दर्ज किया जाए ताकि उनकी दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

यह घटनाक्रम news18 और अन्य प्लेटफॉर्मों की रिपोर्ट के बाद विभिन्न क्षेत्रीय मीडिया आउटलेट्स में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। हालांकि, जिस मूल लेख ने सबसे पहले इन दावों को रिपोर्ट किया था, वह आरोपों की गंभीरता को रेखांकित करता है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यह समय, जो देश में धार्मिक चढ़ावों के प्रबंधन पर चल रही व्यापक बहसों के साथ मेल खाता है, यह संकेत देता है कि दरगाहों के वित्त का प्रबंधन उत्तर प्रदेश की राजनीतिक चर्चा में एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बनता जा रहा है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: शासन का एक पैटर्न

इस प्रकरण का महत्व इस बात में निहित है कि धार्मिक ट्रस्ट और वक्फ बोर्ड विशाल वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन कैसे करते हैं, इस पर बढ़ती निगरानी। जब आंतरिक प्रबंधन प्रणालियों पर सवाल उठाए जाते हैं, तो यह अक्सर बाहरी निगरानी और डिजिटल ऑडिट की आवश्यकता के बारे में एक व्यापक बहस छेड़ देता है। SIT जांच की मांग करके, बीजेपी नेतृत्व धार्मिक संपत्तियों के अधिक कड़े, राज्य-नेतृत्व वाले सत्यापन की ओर बदलाव का संकेत दे रहा है। जनता के लिए, यह संस्थागत विश्वास का मामला है; प्रशासन के लिए, यह एक परीक्षा है कि क्या वह सांप्रदायिक तनाव बढ़ाए बिना जवाबदेही लागू कर सकता है। क्या यह औपचारिक जांच का मार्ग प्रशस्त करेगा, यह देखा जाना बाकी है, लेकिन इस मांग ने निश्चित रूप से लंबे समय से चली आ रही धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शी ऑडिट ट्रेल की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।