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जब उपासना सिंह ने सिर्फ श्रीदेवी को काम करते देखने के लिए 'जुदाई' के लिए हां कह दिया था

श्रीदेवी को देखने के लिए जुदाई फिल्म को इस एक्ट्रेस ने कर दी थी हां. लेकिन सुपरस्टार नहीं करती थीं बात, कहा- मैं सिर्फ दो लोगों की फैन रही हूं

द्वारा बिज़नेस डेस्कप्रकाशित 8 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें

दिग्गज अभिनेत्री ने सेट पर लीजेंडरी सुपरस्टार के शांत और गंभीर व्यक्तित्व को याद करते हुए बताया कि क्यों वे उन चुनिंदा अभिनेताओं में से एक हैं, जिन्हें देखकर वे आज भी दंग रह जाती हैं।

कई अभिनेताओं के लिए, कोई फिल्म प्रोजेक्ट उसकी स्क्रिप्ट, निर्देशक या फीस के बारे में होता है। लेकिन उपासना सिंह के लिए, 1997 की हिट फिल्म जुदाई साइन करने का फैसला एक फैन वाली चाहत से प्रेरित था: लीजेंडरी श्रीदेवी को काम करते देखने का मौका। एनडीटीवी के साथ हाल ही में एक इंटरव्यू में, अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और कॉमेडी नाइट्स विद कपिल जैसे शो के लिए मशहूर इस अनुभवी कलाकार ने याद किया कि उस समय उनके लिए करियर की किसी रणनीति से कहीं ज्यादा श्रीदेवी का आकर्षण मायने रखता था।

सुपरस्टार की खामोशी

भले ही जुदाई में मुख्य कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री पर्दे पर साफ दिखती थी, लेकिन पर्दे के पीछे की सच्चाई काफी अलग थी। उपासना सिंह बताती हैं कि श्रीदेवी शूटिंग के दौरान काफी रिजर्व रहती थीं। सुपरस्टार शायद ही कभी फालतू बातें करती थीं, अक्सर सेट के एक कोने में खुद में ही खोई रहती थीं। बाहर से देखने वालों को यह दूरी लग सकती थी, लेकिन जो लोग उन्हें करीब से देख रहे थे, वे जानते थे कि यह एक ऐसे प्रोफेशनल का फोकस है जो कैमरा ऑन होते ही किरदार में ढल जाता था।

"वह किसी से बात नहीं करती थीं, लेकिन जैसे ही कैमरा ऑन होता, वह जादू बिखेर देती थीं," सिंह ने साझा किया। ऑफ-स्क्रीन शांत और सरल रहने और ऑन-स्क्रीन पावरहाउस परफॉर्मेंस देने का यह विरोधाभास श्रीदेवी की विरासत की पहचान है, जिस पर आज भी फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म पर चर्चा होती रहती है।

पर्दे के परे एक विरासत

यह खुलासा श्रीदेवी से जुड़े उन किस्सों के संग्रह को और बढ़ाता है, जो मनोरंजन पत्रकारिता का मुख्य हिस्सा बने हुए हैं। जबकि आजतक और मायापुरी जैसे आउटलेट अक्सर बॉलीवुड इतिहास के "क्या होता अगर" वाले पहलुओं को खंगालते रहते हैं—जैसे कि क्यों चमकीला जैसे प्रतिष्ठित कलाकारों ने कथित तौर पर उनके साथ काम करने के प्रस्ताव ठुकरा दिए थे—लेकिन उनके साथ काम करने वाले कलाकारों के अनुभव उनके काम के प्रति समर्पण का एक अधिक सटीक नजरिया पेश करते हैं।

सिंह, जिन्होंने पंजाबी और राजस्थानी से लेकर भोजपुरी और गुजराती सिनेमा तक का सफर तय किया है, के लिए यह अनुभव काफी प्रभावशाली रहा। वे स्वीकार करती हैं कि उन्होंने अपने जीवन में सिर्फ दो लोगों को ही अपना आदर्श माना है, जो यह साबित करता है कि श्रीदेवी का अपने समकालीनों पर कितना गहरा प्रभाव था।

यह क्यों मायने रखता है: मौजूदगी की कला

इंडस्ट्री अक्सर किसी अभिनेता के "स्टार पावर" के बारे में बात करती है, लेकिन सिंह द्वारा साझा किया गया नजरिया उस आंतरिक अनुशासन पर प्रकाश डालता है जो उस पावर को बनाए रखने के लिए जरूरी है। ऐसे दौर में जब सोशल मीडिया पर मौजूदगी किसी स्टार की प्रासंगिकता तय करती है, श्रीदेवी का तरीका याद दिलाता है कि स्क्रीन प्रेजेंस टेक के बीच के शांत पलों में तैयार होती है। ऊर्जा और फोकस को बचाकर रखने की क्षमता ही सितारों को आइकन से अलग करती है। सिंह के लिए, उस प्रक्रिया को करीब से देखने का मौका स्क्रीन टाइम से कहीं ज्यादा कीमती था, जो आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों पर दिवंगत अभिनेत्री के स्थायी प्रभाव को रेखांकित करता है।

द्वारा बिज़नेस डेस्क
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