Politicalpedia
राज्य

वायनाड भूस्खलन: टनल रोड प्रोजेक्ट साइट बनी मौत का मंजर

ट्रक बहा, जान बचाने को भागे लोग: वीडियो में कैद हुआ वायनाड भूस्खलन का खौफनाक मंजर

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 7 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
वायनाड भूस्खलन: टनल रोड प्रोजेक्ट साइट बनी मौत का मंजर
वायनाड भूस्खलन: टनल रोड प्रोजेक्ट साइट बनी मौत का मंजर

दिल दहला देने वाले वीडियो फुटेज में उस पल को कैद किया गया है जब केरल के वायनाड जिले में मिट्टी का एक विशाल ढेर वाहनों को बहा ले गया और श्रमिकों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा।

कल्लाडी में भूस्खलन की गड़गड़ाहट इतनी अचानक थी कि निर्माण स्थल का शोर उसमें दब गया। मंगलवार को वायनाड में हुई इस त्रासदी में लगातार बारिश के कारण अस्थिर हुई मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा मीनाक्षी ब्रिज के पास ढह गया। यह स्थान, जो कोझिकोड और वायनाड को जोड़ने वाली एक टनल रोड के प्रोजेक्ट साइट के रूप में इस्तेमाल हो रहा था, कुछ ही सेकंड में मौत का जाल बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस भयावह वीडियो में एक ट्रक और एक बस को मलबे के तेज बहाव में खिलौनों की तरह बहते देखा जा सकता है, जबकि वहां मौजूद लोग और श्रमिक अपनी जान बचाने के लिए भागते नजर आ रहे हैं।

संकट का मंजर

फिलहाल राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF), स्थानीय पुलिस और केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) मिलकर मलबे को हटाने का काम कर रहे हैं। अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और कम से कम सात लोग घायल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कम से कम सात लोग अभी भी लापता हैं, जिसके चलते बचाव दल मलबे और गहरी कीचड़ में जीवित बचे लोगों की तलाश में समय के साथ दौड़ लगा रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने पुष्टि की है कि घायल श्रमिकों, जिनमें से कई राज्य के बाहर के हैं, का वायनाड के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती आकलन से पता चलता है कि पीड़ित मुख्य रूप से निर्माण स्थल पर काम करने वाले मजदूर थे, न कि स्थानीय निवासी। हालांकि, मलबे की विशाल मात्रा ने खोज अभियान को मुश्किल बना दिया है, और बचाव कार्य पूरा करने के लिए भारी मशीनों की मदद ली जा रही है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: बड़ी तस्वीर

यह त्रासदी पश्चिमी घाट के नाजुक इलाकों में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की पर्यावरणीय लागत पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि क्षेत्र के विकास के लिए कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है, लेकिन एक ऐसी प्रोजेक्ट साइट का ढह जाना, जिसे सड़क संपर्क सुधारने के लिए बनाया जा रहा था, पहाड़ी इलाकों के साथ छेड़छाड़ के जोखिमों की एक कठोर याद दिलाता है। केरल के मंत्रियों ने इस घटना की प्रकृति पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है, कुछ ने इसे 'मानव निर्मित' आपदा करार दिया है। उन्होंने मानसून के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसी परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन की गहन जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है।

जीवन के नुकसान के अलावा, यह घटना आर्थिक महत्वाकांक्षा और जलवायु लचीलेपन के बीच के नाजुक संतुलन को रेखांकित करती है। जैसे-जैसे बचाव दल मीनाक्षी ब्रिज के पास मलबे में तलाश जारी रखे हुए हैं, यह घटना योजनाकारों के लिए एक गंभीर चेतावनी है: वायनाड जैसे क्षेत्रों की पारिस्थितिक संवेदनशीलता केवल इंजीनियरिंग समाधानों से कहीं अधिक की मांग करती है। इसके लिए ऐसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आवश्यकता है जो इस क्षेत्र की अस्थिर प्रकृति का सम्मान करें।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।