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एक युग का अंत: Opendoor के भारत से पूरी तरह बाहर निकलने की इनसाइड स्टोरी

अमेरिका की इस कंपनी ने भारत के सारे कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता, आखिर क्या है वजह

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 11 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
एक युग का अंत: Opendoor के भारत से पूरी तरह बाहर निकलने की इनसाइड स्टोरी
एक युग का अंत: Opendoor के भारत से पूरी तरह बाहर निकलने की इनसाइड स्टोरी

अमेरिका की रियल एस्टेट टेक फर्म Opendoor द्वारा भारत में अपना कामकाज समेटने के साथ ही 250 कर्मचारियों की छंटनी हो गई है, जो सेंट्रलाइज्ड और ऑटोमेटेड बिजनेस मॉडल की ओर बढ़ते बदलाव का संकेत है।

भारत के एक व्यस्त ऑफिस में लैपटॉप की गूंज अब 250 पेशेवरों के लिए खामोश हो रही है, क्योंकि अमेरिकी रियल एस्टेट टेक कंपनी Opendoor ने आधिकारिक तौर पर अपने स्थानीय ऑपरेशंस बंद कर दिए हैं। यह खराब प्रदर्शन या कम आउटपुट की कहानी नहीं है; कंपनी के नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि भारतीय टीम का योगदान शानदार रहा है। इसके बजाय, यह एक सोची-समझी रणनीति है। कंपनी अपने परिचालन को समेट रही है और अपने सभी बैक-ऑफिस और सपोर्ट फंक्शंस को वापस अमेरिका ले जा रही है ताकि वे अपने मुख्य ग्राहक आधार के साथ बेहतर तालमेल बिठा सकें।

इस बदलाव के पीछे की रणनीति

CEO काज़ नेजतिआन ने कर्मचारियों को भेजे एक नोट में इस बदलाव की रूपरेखा स्पष्ट की है। जब भारत में ऑफिस की शुरुआत हुई थी, तब कंपनी की कई आंतरिक प्रक्रियाएं मैनुअल निगरानी पर निर्भर थीं—एक ऐसा काम जिसके लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत थी। हालांकि, आज परिदृश्य बदल चुका है। अपनी 'OpenDoor 2.0' रणनीति के कार्यान्वयन के माध्यम से, कंपनी अब उन कार्यों को संभालने के लिए ऑटोमेशन और अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर पर भरोसा कर रही है, जो कभी मानव विश्लेषकों का काम हुआ करते थे। इन वर्कफ़्लो को अमेरिका ले जाकर, नेतृत्व का मानना है कि वे अधिक दक्षता हासिल कर सकते हैं और प्रक्रियाओं को उस बाजार के करीब रख सकते हैं जिसे वे सेवाएं देते हैं।

टेक सेक्टर में बढ़ता ट्रेंड

हालांकि इस विशेष बंदी ने स्थानीय वर्कफोर्स को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन यह पूरी टेक इंडस्ट्री में दिख रहे एक बड़े ट्रेंड को दर्शाता है। Oracle जैसी बड़ी कंपनियों से लेकर—जिन्हें भारी छंटनी की खबरों का सामना करना पड़ा है—छोटी कंपनियों तक, सभी अपने खर्चों को कम करने के लिए आक्रामक कदम उठा रही हैं। चाहे वह Aajtak पर कोई फीचर हो या fathom journal की कोई रिपोर्ट, चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि कैसे कंपनियां अब ऑफशोर निर्भरता को खत्म कर अत्यधिक ऑटोमेटेड और घरेलू मॉडल को अपना रही हैं।

यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर

यह कदम ग्लोबल सर्विस सेक्टर के लिए एक चेतावनी है। हम उस दौर से आगे निकल चुके हैं जहां ऑफशोरिंग का मतलब केवल लागत में कटौती था; अब यह डेटा ग्रेविटी और प्रोसेस इंटीग्रेशन के बारे में है। Opendoor जैसी कंपनी के लिए, 'दिमाग' (रणनीति) और 'निष्पादन' (एग्जीक्यूशन) की निकटता नया गोल्ड स्टैंडर्ड बन रही है। जबकि प्रधानमंत्री Modi भारत मंडपम जैसे मंचों पर घरेलू नवाचार और 'इंडिया एआई' की गति पर जोर देते हैं, कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट वास्तविकता अभी भी अस्थिर है। ऑपरेशंस को सरल बनाने का दबाव यह दर्शाता है कि जब कोई कंपनी अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से बदलने का फैसला करती है, तो बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली टीमें भी सुरक्षित नहीं रहतीं।

Opendoor का जाना डिजिटल अर्थव्यवस्था की क्रूरता की एक स्पष्ट याद दिलाता है। जिन कर्मचारियों को लगता था कि उनकी नौकरियां सुरक्षित हैं, वे अब देख रहे हैं कि ऑटोमेशन की दौड़ किसी सीमा को नहीं मानती। जैसे-जैसे इंडस्ट्री विकसित हो रही है, नीति निर्माताओं और श्रमिकों के लिए सवाल सिर्फ नौकरियों के नुकसान का नहीं है, बल्कि यह है कि स्थानीय टैलेंट पूल कितनी जल्दी उन उच्च-मूल्य वाली भूमिकाओं की ओर बढ़ सकता है जिन्हें मशीनें अभी तक नहीं दोहरा सकतीं।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।