Politicalpedia
बिज़नेस

टेक्सटाइल संकट: करूर के निर्माता सूती धागे की असामान्य कीमतों से परेशान

करूर के कपड़ा उद्योग पर सूती धागे की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि की मार

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्कप्रकाशित 6 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
टेक्सटाइल संकट: करूर के निर्माता सूती धागे की असामान्य कीमतों से परेशान
टेक्सटाइल संकट: करूर के निर्माता सूती धागे की असामान्य कीमतों से परेशान

कच्चे माल की बढ़ती लागत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान ने कपड़ा निर्माताओं के लिए एक संकट पैदा कर दिया है, जिससे पूरे उद्योग में विरोध प्रदर्शन और उत्पादन ठप करने की नौबत आ गई है।

करूर का कपड़ा हब वर्तमान में भारी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि सूती धागे की कीमतों में असामान्य वृद्धि स्थानीय इकाइयों के अस्तित्व के लिए खतरा बन गई है। पिछले छह हफ्तों में, निर्माताओं ने बताया है कि मोटे धागे की किस्मों की लागत में 30% से 40% तक की भारी वृद्धि हुई है, और कीमतें ₹300 से बढ़कर ₹400 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। यह अस्थिरता, और आवश्यक कच्चे माल को सुरक्षित करने के लिए पूरे उद्योग के संघर्ष ने कपड़ा निर्माताओं को राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों के सामने अपनी चिंताएं रखने के लिए मजबूर किया है।

बाजार राहत में असंतुलन

हालांकि केंद्र सरकार ने हाल ही में क्षेत्र को राहत देने के लिए कपास पर आयात शुल्क हटा दिया है, लेकिन इसका प्रभाव असमान रहा है। उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि जहां तिरुपुर में गारमेंट निर्माताओं को धागे की लागत में 3% से 4% की मामूली गिरावट देखने को मिली है, वहीं ये लाभ करूर की कपड़ा इकाइयों तक नहीं पहुंच पाए हैं। करूर टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पी. गोपालकृष्णन के अनुसार, मोटे धागे के लिए कीमतों में स्थिरता का अभाव अभूतपूर्व है, जो कोयंबटूर, डिंडीगुल, विरुधुनगर और वेल्लाकोइल की मिलों से आपूर्ति लेने वाले व्यवसायों पर भारी वित्तीय बोझ डाल रहा है।

वैश्विक तनाव और परिचालन संबंधी समस्याएं

यह संकट केवल धागे तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और वैश्विक व्यापार में भारी व्यवधान पैदा किया है, जिससे पेट्रोलियम-आधारित इनपुट की लागत में तेजी आई है। उद्योग अब रंगाई में इस्तेमाल होने वाले रसायनों, पॉलिएस्टर और पॉलीथीन जैसी आवश्यक पैकिंग सामग्री की बढ़ी हुई कीमतों से जूझ रहा है। इन लागतों का संयुक्त प्रभाव इतना गंभीर हो गया है कि ओपन-एंड (OE) मिलों सहित कुछ क्षेत्रों को वेस्ट कॉटन की उच्च लागत के कारण उत्पादन पूरी तरह से बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला और अधिक अस्थिर हो गई है।

उद्योग-व्यापी विरोध

स्थिति की गंभीरता का परिणाम व्यापक औद्योगिक कार्रवाई के रूप में सामने आया है, जिसमें क्षेत्र भर के कपड़ा हितधारकों ने कपास और धागे की कीमतों में निरंतर वृद्धि के विरोध में दो दिवसीय हड़ताल की है। साउदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन और तमिलनाडु स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन सहित उद्योग निकाय अब बाजार में संतुलन बहाल करने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की सक्रिय रूप से पैरवी कर रहे हैं। निर्यातकों ने चेतावनी दी है कि यदि वर्तमान मुद्रास्फीति का रुझान बिना किसी रोक-टोक के जारी रहता है, तो यह अनिवार्य रूप से निर्यात विकास में गिरावट और स्थानीय कार्यबल के लिए रोजगार के अवसरों में भारी कमी का कारण बनेगा।

यह संकट क्यों महत्वपूर्ण है

तमिलनाडु के लिए आर्थिक इंजन के रूप में काम करने वाले इस क्षेत्र के लिए, प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण बनाए रखना आवश्यक है। वर्तमान बाधा केवल इनपुट लागत का मामला नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक प्रणालीगत चुनौती है। एक स्थायी मूल्य निर्धारण तंत्र के बिना, करूर का कपड़ा उद्योग एक अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहा है, जो अस्थिर वैश्विक बाजार की मांगों के मुकाबले उत्पादन की बढ़ती लागत को संतुलित करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क
न्यूज़रूम

पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क पूरे भारत से सत्यापित, स्रोत-आधारित राजनीतिक समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है।