होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर, अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर किए नए हमले
'सतर्क, घातक और तैयार': अमेरिका ने 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर बरसाए गोले — देखें वीडियो
एक कमर्शियल ऑयल टैंकर पर हमले के बाद की गई जवाबी कार्रवाई में ईरान के सर्विलांस और ड्रोन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, जिससे नाजुक संघर्ष विराम टूट गया है।
दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा धमनी माने जाने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर बारूद के ढेर पर है। यूएस सेंट्रल कमांड (Centcom) ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर सटीक और तीव्र हमले की पुष्टि की है, जिनमें तटीय रडार साइटों से लेकर ड्रोन स्टोरेज सुविधाएं शामिल हैं। यह ऑपरेशन पनामा-ध्वज वाले तेल टैंकर M/T Kiku पर हुए ड्रोन हमले के बाद शुरू किया गया, जो सुबह 4:30 बजे (ET) हमले के वक्त 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल ले जा रहा था।
वाशिंगटन का संदेश स्पष्ट है: उसकी सेनाएं "सतर्क, घातक और तैयार" हैं। अमेरिका की यह सैन्य कार्रवाई तब हुई है जब तेहरान पर अंतरिम संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप है—यह समझौता समुद्री तनाव को कम करने के लिए किया गया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इन हमलों की पुष्टि करते हुए चेतावनी दी कि यदि ईरान अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ अपना आक्रामक रुख जारी रखता है, तो अमेरिका "सैन्य रूप से इस काम को पूरा करने" के लिए तैयार है।
जवाबी कार्रवाई का चक्र
यह तनाव अचानक नहीं बढ़ा है। क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति तेजी से बिगड़ी है, और ऐसी खबरें हैं कि जवाबी हमले कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी ठिकानों तक पहुंच गए हैं। नतांज़ परमाणु सुविधा पर हमले की खबरों ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, जिससे इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने संभावित रेडिएशन जोखिमों को लेकर चिंता जताई है। इस संकरे रास्ते से गुजरने वाले तेल पर निर्भर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए, समुद्री यातायात में यह व्यवधान केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि ऊर्जा स्थिरता के लिए सीधा खतरा है।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
संघर्ष विराम का टूटना उस खतरनाक कूटनीतिक खेल को उजागर करता है जो अब बातचीत के दायरे से बाहर निकल रहा है। ईरान की माइन-लेयर क्षमताओं और सर्विलांस इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर, अमेरिका स्पष्ट रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को "बंद" करने की तेहरान की क्षमता को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इन हमलों की प्रकृति दर्शाती है कि दोनों पक्ष तनाव के ऐसे चक्र में फंस गए हैं जहां हर जवाबी कार्रवाई एक और गंभीर प्रतिक्रिया को जन्म दे रही है। भारत के लिए, जो अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए इन व्यापार मार्गों पर निर्भर है, यह स्थिति एक कठिन संतुलन की चुनौती है; जलडमरूमध्य में कोई भी लंबा संघर्ष वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा सकता है और घरेलू आर्थिक सुधार को पटरी से उतार सकता है।
आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। जैसे-जैसे ईरानी सरकारी टेलीविजन इस रणनीतिक जलमार्ग के उत्तर में विस्फोटों की सूचना दे रहा है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह देख रहा है कि क्या यह एक सीमित सैन्य अभियान बना रहेगा या यह एक व्यापक और अनियंत्रित संघर्ष में बदल जाएगा। संघर्ष विराम प्रभावी रूप से खत्म हो चुका है, और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का खतरा पहले से कहीं अधिक गहरा गया है।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।