हिंदू कुश में भूकंप के झटके: 5.2 तीव्रता ने दहलाया बदख्शां
उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान के बदख्शां में 5.2 तीव्रता का भूकंप
अफगानिस्तान के पहाड़ी उत्तर-पूर्व में आए इस शक्तिशाली भूकंप ने एक बार फिर याद दिला दिया है कि यह क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं के प्रति कितना संवेदनशील है।
22 जून, 2026 को हिंदू कुश की धरती उस समय कांप उठी जब उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान के बदख्शां में 5.2 तीव्रता का भूकंप आया। स्थानीय समयानुसार दोपहर 14:52 बजे आए इस भूकंप का केंद्र जुर्म जिले से 42 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था। हालांकि यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने इसकी तीव्रता 5.2 मापी है, लेकिन विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर दी गई जानकारी में विरोधाभास है; कुछ मीडिया आउटलेट्स ने तीव्रता अधिक बताई है, तो कुछ ने तालोकान के पास भूकंपीय गतिविधियों का जिक्र किया है।
207 किलोमीटर की गहराई पर होने के कारण, यह एक अपेक्षाकृत गहरा भूकंप था। इतनी गहराई पर आने वाले भूकंप अक्सर सतह पर कम तबाही मचाते हैं, फिर भी बदख्शां का ऊबड़-खाबड़ और अस्थिर इलाका इसे उच्च जोखिम वाला क्षेत्र बनाता है। फिलहाल, स्थानीय अधिकारियों ने जान-माल के नुकसान की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। हालांकि, क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक स्थिति और कच्चे मकानों की जर्जर हालत को देखते हुए, तत्काल जानकारी न मिलने का मतलब यह नहीं है कि सब कुछ सुरक्षित है।
जोखिम भरा भूगोल
बदख्शां टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव वाले क्षेत्र में स्थित है, जो इसे अफगानिस्तान के सबसे अधिक भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में से एक बनाता है। इन पहाड़ी प्रांतों के निवासी हर साल भूकंप के खतरे के साये में जीते हैं। हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला एक सक्रिय फॉल्ट लाइन की तरह है, और हालांकि काबुल जैसे बड़े शहरी केंद्रों में भी कभी-कभी झटके महसूस किए जाते हैं, लेकिन इन आपदाओं की सबसे बड़ी मार दूरदराज के पहाड़ी इलाकों को झेलनी पड़ती है।
यह भूकंप ऐसे समय में आया है जब तालिबान की प्रशासनिक क्षमता पर कड़ी नजर रखी जा रही है। जहां अंतरराष्ट्रीय समुदाय महिलाओं के अधिकारों पर तालिबान की नीतियों को लेकर चिंतित है—जिसका हाल ही में 41 देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र में विरोध भी किया गया था—वहीं अफगानिस्तान में आपदा तैयारी और बुनियादी ढांचे के लचीलेपन की बुनियादी चुनौती अब भी अनसुलझी है।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
नई दिल्ली और व्यापक क्षेत्र के पर्यवेक्षकों के लिए, यह भूकंप अफगान राज्य की नाजुकता का एक गंभीर संकेत है। जब प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, तो खोज और बचाव अभियान चलाने या तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करने की क्षमता प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्भर करती है। तालिबान अब खनन लाइसेंस जारी कर रहा है और शिबरघन जैसी नगर पालिकाओं में राजस्व जुटाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि सरकार का ध्यान राष्ट्र-निर्माण पर है या केवल संसाधनों के दोहन पर?
बड़ी त्रासदी यह है कि खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे देश में—जो व्यापार मार्गों में बदलाव और आर्थिक अलगाव के कारण और भी बदतर हो गई है—एक मध्यम तीव्रता का भूकंप भी तेजी से मानवीय संकट में बदल सकता है। जब भूकंप आता है, तो वह न केवल जमीन को हिलाता है, बल्कि अपने सबसे कमजोर नागरिकों की रक्षा करने की सरकार की क्षमता की भी परीक्षा लेता है। फिलहाल, बदख्शां के लोग एक ऐसी धरती पर अपनी जीवटता के भरोसे रहने को मजबूर हैं, जो कभी भी स्थिर नहीं रहती।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।