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नेतन्याहू की 'रेड लाइन': अमेरिका की शांति कोशिशों के बावजूद ईरान का परमाणु कार्यक्रम निशाने पर

समझौता हो या न हो, ईरान को परमाणु बम नहीं बनाने देंगे, लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है: नेतन्याहू

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 16 जून 2026· 3 मिनट पढ़ें
नेतन्याहू की 'रेड लाइन': अमेरिका की शांति कोशिशों के बावजूद ईरान का परमाणु कार्यक्रम निशाने पर
नेतन्याहू की 'रेड लाइन': अमेरिका की शांति कोशिशों के बावजूद ईरान का परमाणु कार्यक्रम निशाने पर

जहाँ एक ओर वाशिंगटन और तेहरान शुरुआती संघर्ष विराम के संकेत दे रहे हैं, वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री ने कसम खाई है कि किसी भी राजनयिक समझौते के बावजूद क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रहेगा।

मध्य पूर्व पर युद्ध के बादल तब भी मंडरा रहे हैं जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में एक संभावित समझौते की चर्चा तेज है। यरूशलेम से एक टेलीविजन संबोधन में, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की कि इजरायल का सैन्य अभियान—जिसे उन्होंने देश के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अभियानों में से एक बताया—ने ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे के एक बड़े हिस्से को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है। नेतन्याहू के लिए, मुख्य उद्देश्य वही है: यह सुनिश्चित करना कि ईरान कभी परमाणु हथियार विकसित न कर सके, एक ऐसा मिशन जिसे वे अपने जीवन का लक्ष्य मानते हैं।

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी एक नाजुक समय पर आई है। जहाँ अमेरिकी अधिकारी तनाव कम करने पर जोर दे रहे हैं, वहीं नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल के पास कार्रवाई की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि लड़ाई "अभी खत्म नहीं हुई है" और उनकी सेना लेबनान, सीरिया, यमन और वेस्ट बैंक में ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमले जारी रखेगी। यह रुख उन्हें ट्रम्प प्रशासन की प्राथमिकताओं के साथ संभावित टकराव की स्थिति में खड़ा करता है, जो क्षेत्रीय संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करना चाहते हैं।

रणनीति: नेतृत्व को खत्म करना

नेतन्याहू ने सैन्य अभियान के विवरण पर कोई संकोच नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि संयुक्त अमेरिकी-इजरायली अभियान ने व्यवस्थित रूप से ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों को बेअसर किया है, विभिन्न आतंकी शासन के नेतृत्व ढांचे को ध्वस्त किया है और मिसाइल उत्पादन कारखानों के एक बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया है। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि इन हमलों के बावजूद ईरानी सरकार सत्ता में क्यों बनी हुई है, तो उन्होंने जवाब दिया कि कैबिनेट का लक्ष्य हमेशा परमाणु क्षमता के "अस्तित्वगत खतरे" को खत्म करना था, न कि पूरी तरह से सत्ता परिवर्तन करना।

यरूशलेम और वाशिंगटन के बीच मतभेद स्पष्ट होते जा रहे हैं। जहाँ अल जज़ीरा और अन्य वैश्विक मीडिया संस्थान रिपोर्ट कर रहे हैं कि ट्रम्प युद्ध समाप्त करने का संकेत दे रहे हैं, वहीं नेतन्याहू किसी समय सीमा से बंधने को तैयार नहीं हैं। उनका यह जोर कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे—"न आज और न कल"—एक सख्त चेतावनी है कि इजरायल किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते की शर्तों की परवाह किए बिना एकतरफा कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: बड़ी तस्वीर

व्हाइट हाउस और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच का यह मतभेद आने वाले समय में अस्थिरता का संकेत देता है। ऐतिहासिक रूप से, परमाणु अप्रसार समझौते नाजुक होते हैं, और अमेरिका-ईरान समझौते की सीमाओं को मानने से इजरायल का इनकार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में एक "ग्रे ज़ोन" पैदा करता है। यदि इजरायल बेरूत और अन्य जगहों पर हमले जारी रखता है जबकि अमेरिका स्थिरता के लिए दबाव बना रहा है, तो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन अत्यधिक अस्थिर बना रहेगा। निवेशक और वैश्विक बाजार बारीकी से नजर रख रहे हैं; हालांकि भारतीय बाजारों में कल्याण ज्वैलर्स का शेयर भाव फिलहाल ट्रेंड कर रहा है, लेकिन यह इन भू-राजनीतिक हलचलों से पूरी तरह अलग है। यदि संघर्ष विराम की घोषणा के बावजूद युद्ध खिंचता है, तो इसका वास्तविक आर्थिक प्रभाव तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं और रक्षा खर्च पर पड़ेगा।

अंततः, यह प्रभाव का परीक्षण है। नेतन्याहू अपने घरेलू आधार और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को संकेत दे रहे हैं कि इजरायल की सुरक्षा वास्तुकला अब पूरी तरह से अमेरिकी राजनयिक सफलता पर निर्भर नहीं है। संघर्ष को महज एक रणनीतिक जुड़ाव के बजाय अस्तित्व की लड़ाई के रूप में पेश करके, उन्होंने यह सुनिश्चित कर लिया है कि भले ही संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर हो जाएं, लेकिन उनके द्वारा परिभाषित "युद्ध" का निकट भविष्य में समाप्त होना मुश्किल है।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।