आधी रात को बुलडोजर और सड़कों पर बवाल: जाधवपुर में हॉकर बेदखली के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन
कोलकाता हॉकर बेदखली: जाधवपुर में आधी रात को चले अभियान से तनाव; पुलिस और वामपंथी समर्थकों के बीच झड़प

जाधवपुर स्टेशन पर देर रात चलाए गए तोड़फोड़ अभियान ने पुलिस और हॉकरों, छात्रों व राजनीतिक कार्यकर्ताओं के गठबंधन के बीच हिंसक टकराव को जन्म दे दिया है।
सोमवार की तड़के जाधवपुर की शांति तब भंग हो गई जब रेलवे स्टेशन परिसर से हॉकरों को हटाने के लिए बुलडोजर पहुंच गए। आधी रात को शुरू हुई यह कार्रवाई जल्द ही अराजकता में बदल गई, जब स्थानीय हॉकर यूनियनों, वामपंथी व्यापार संगठनों और जाधवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने मशीनों के सामने मानव श्रृंखला बना ली। रात के 3 बजे तक, यह जगह विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गई, क्योंकि छात्र अपने साथियों की रिहाई की मांग को लेकर यूनिवर्सिटी के गेट नंबर 4 पर जमा हो गए।
पुलिस ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए लाठीचार्ज का सहारा लिया। इस झड़प का असर काफी गंभीर रहा: कम से कम 15 लोग घायल हुए, जिनमें कई छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ी। गिरफ्तार किए गए लोगों में पूर्व विधायक सुजान चक्रवर्ती और सृजन भट्टाचार्य जैसे वरिष्ठ CPI(M) नेता भी शामिल थे। केपीसी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकारियों को कई हिरासत में लिए गए लोगों का सीटी स्कैन कराना पड़ा ताकि अंदरूनी चोटों की पुष्टि की जा सके।
विवादों का सिलसिला
यह कोई अकेली घटना नहीं है। जाधवपुर में हुई यह बेदखली पिछले एक महीने में कोलकाता के विभिन्न रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थलों पर चलाए गए इसी तरह के अभियानों की एक कड़ी है। हालांकि प्रशासन इन जगहों को खाली कराने का दावा कर रहा है, लेकिन जिस तरह से अक्सर अंधेरे की आड़ में ये कार्रवाई की जाती है, उसकी विपक्षी समूहों ने कड़ी आलोचना की है। रविवार रात के अभियान में जो दुकानें नहीं तोड़ी गईं, उन्हें लेकर भारतीय रेलवे ने 15 दिन का नोटिस जारी किया है, जो संकेत देता है कि यह बेदखली अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है।
जमीनी स्तर पर तनाव साफ देखा जा सकता है। SUCI (कम्युनिस्ट) के राज्य सचिव चंडीदास भट्टाचार्य ने इस कदम को 'बुलडोजर राजनीति' का आक्रामक रूप करार दिया है। उन हॉकरों के लिए, जिनकी आजीविका इन प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट्स पर निर्भर है, यह बेदखली अस्तित्व का संकट है। जाधवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए, जो ऐतिहासिक रूप से स्थानीय आंदोलनों में सबसे आगे रहे हैं, यह मुद्दा राज्य द्वारा की जा रही मनमानी के खिलाफ एक नया मोर्चा बन गया है।
यह महत्वपूर्ण क्यों है
जाधवपुर का यह घटनाक्रम शहरी विकास के लक्ष्यों और कोलकाता में हजारों लोगों को सहारा देने वाली अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के बीच बढ़ते घर्षण को उजागर करता है। रेलवे और नगर निकाय अक्सर इन अभियानों को सार्वजनिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए आवश्यक बताते हैं, लेकिन इसे लागू करने का तरीका अक्सर विस्थापितों की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकता को नजरअंदाज कर देता है। यूनिवर्सिटी के छात्रों की भागीदारी यह बताती है कि ये बेदखली अब केवल प्रशासनिक कार्य नहीं रह गए हैं, बल्कि ये व्यापक राजनीतिक टकराव का केंद्र बन रहे हैं। जैसे-जैसे राज्य सार्वजनिक स्थानों को खाली कराने का अभियान तेज कर रहा है, विरोध और पुलिस कार्रवाई का यह चक्र यह दर्शाता है कि किसी भी दीर्घकालिक समाधान के लिए केवल नोटिस और बुलडोजर काफी नहीं हैं—इसके लिए एक व्यावहारिक पुनर्वास ढांचे की आवश्यकता है, जिसका वर्तमान प्रक्रिया में स्पष्ट अभाव है।
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