ग्रेटर नोएडा की हाई-राइज बिल्डिंग में हादसा: लापरवाही ने ली एक व्यक्ति की जान
ग्रेटर नोएडा: हाई-राइज सोसाइटी की 19वीं मंजिल से गिरा कंक्रीट का प्लास्टर, एक व्यक्ति की मौत

बाजार जाने का एक सामान्य सा सफर 46 वर्षीय निवासी के लिए उस समय दुखद अंत में बदल गया, जब जर्जर बुनियादी ढांचे ने उनकी जान ले ली।
शनिवार दोपहर अरिहंत अंबर सोसाइटी के गेट के पास मोटरसाइकिल की आवाज एक सामान्य दिन की शुरुआत जैसी थी। 46 वर्षीय विकास चावला के लिए यह उनका आखिरी पल साबित हुआ। जैसे ही उन्होंने गेट की ओर अपनी बाइक बढ़ाई, 19वीं मंजिल की बालकनी से कंक्रीट का एक बड़ा हिस्सा टूटकर उन पर आ गिरा, जिससे उनका संतुलन बिगड़ गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वे पास की दीवार से जा टकराए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य चावला अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं।
अनसुनी चेतावनियों का सिलसिला
इस घटना ने निवासियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, जिनका कहना है कि यह त्रासदी पूरी तरह से टाली जा सकती थी। अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के सचिव अमरीश कुमार के अनुसार, सोसाइटी कम से कम 2022 से जर्जर ढांचे की समस्या से जूझ रही है। कुमार ने बताया, "अक्टूबर 2022 तक ही बालकनियों और इमारतों के अन्य हिस्सों से प्लास्टर गिरने लगा था।"
बिल्डर से बार-बार मरम्मत का आग्रह करने के बावजूद, निवासियों का दावा है कि उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया गया। अप्रैल 2023 में लिखित आश्वासन मिलने के बाद भी मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ। AOA ने इस मामले को उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के पास भी उठाया, लेकिन नौकरशाही की प्रक्रिया कई सुनवाईयों में उलझी रही, जबकि 625 परिवारों के सिर पर इमारत का खतरा मंडराता रहा।
जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई
मौत की इस घटना के बाद, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोसाइटी के मेंटेनेंस मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि ध्यान अभी कानूनी कार्रवाई पर है, लेकिन इस घटना ने डेवलपर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2019 से बसी इस सोसाइटी में 3BHK फ्लैट की कीमत 1.4 करोड़ रुपये तक पहुंचती है, लेकिन यह घटना दिखाती है कि महंगी प्रॉपर्टी भी अब सुरक्षा और गुणवत्ता की गारंटी नहीं है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है: बुनियादी ढांचे का संकट
यह कोई अकेली घटना नहीं है; यह ग्रेटर नोएडा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में तेजी से हो रहे, लेकिन अक्सर खराब तरीके से विनियमित शहरी विस्तार पर एक गंभीर टिप्पणी है। जब डेवलपर्स संरचनात्मक ऑडिट और रखरखाव के बजाय निर्माण की गति को प्राथमिकता देते हैं, तो सुरक्षा का बोझ अनुचित रूप से निवासियों पर आ जाता है। बार-बार शिकायतें, मरम्मत के झूठे वादे और अंत में एक ऐसी जान का जाना जिसे बचाया जा सकता था—यह सब जवाबदेही की प्रणालीगत विफलता को दर्शाता है। यदि संरचनात्मक सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू नहीं किया गया और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत नहीं किया गया, तो ऐसी ही हाई-राइज इमारतों में रहने वाले हजारों परिवार खतरे में रहेंगे।
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