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महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर मराठी उच्चारण की गलतियों को लेकर घिरे

महाराष्ट्र विस अध्यक्ष नार्वेकर ने शोक प्रस्ताव में उच्चारण की गलतियों के लिए माफ़ी मांगी

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 26 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर मराठी उच्चारण की गलतियों को लेकर विवादों में
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर मराठी उच्चारण की गलतियों को लेकर विवादों में
  • विधानसभा अध्यक्ष ने शोक प्रस्ताव के दौरान हुई गलतियों के लिए मांगी माफी, विपक्ष ने उठाए थे सवाल।

महाराष्ट्र विधानसभा में बुधवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली, जब अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने शोक प्रस्ताव के दौरान अपने आचरण को लेकर हुई आलोचनाओं पर सदन को संबोधित किया। मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही, अध्यक्ष को मराठी भाषा पर अपनी पकड़ को लेकर बचाव करना पड़ा। दरअसल, महान गायिका आशा भोंसले को श्रद्धांजलि देते समय उनके द्वारा किए गए गलत उच्चारण पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई थी।

यह प्राथमिक विवरण, जो आज सुबह प्रकाशित मूल लेख पर आधारित है, उस खींचतान को दर्शाता है जो अक्सर विधायी सत्रों की शुरुआत में देखने को मिलती है। अध्यक्ष के लिए, यह विवाद केवल जुबान फिसलने का नहीं था; यह राज्य की भाषाई पहचान के प्रति उनके सम्मान पर सवाल उठाने जैसा था।

एक तकनीकी स्पष्टीकरण

सदन में अपनी बात रखते हुए, नार्वेकर ने स्पष्ट किया कि ये गलतियां खराब दस्तावेजों के कारण हुईं, न कि किसी दुर्भावना के चलते। उन्होंने उन्हें दिए गए शोक संदेश की प्रति की ओर इशारा करते हुए बताया कि उसका फॉन्ट "बहुत छोटा" था और प्रिंट "काफी धुंधला" था।

नार्वेकर ने कहा, "मैंने इसे बिल्कुल वैसे ही पढ़ा जैसा वह मुझे दिखाई दिया, जिसके कारण गलतियां हुईं। यह पूरी तरह से एक तकनीकी चूक थी," उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वे इस घटना को राजनीतिक रंग न दें। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे साढ़े चार साल से अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं और लगातार मराठी में कामकाज का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आशा भोंसले जैसी महान हस्ती का अनादर करने का विचार उनके लिए असंभव है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

इस घटना के इर्द-गिर्द संवेदनशीलता महाराष्ट्र में पहचान की राजनीति की गंभीरता को दर्शाती है। एक ऐसे विधायी सदन में जहां हर शब्द और हाव-भाव की बारीकी से जांच की जाती है, भाषाई दक्षता और सांस्कृतिक शिष्टाचार का उपयोग अक्सर राजनीतिक वैधता के लिए किया जाता है। जब पीठासीन अधिकारी से चूक होती है, तो विपक्ष स्वाभाविक रूप से इसे जनता या राज्य की सांस्कृतिक विरासत से अलगाव के संकेत के रूप में पेश करने का अवसर नहीं छोड़ता।

हालांकि अध्यक्ष की माफी का उद्देश्य मामले को शांत करना है, लेकिन यह घटना संसदीय मर्यादा की नाजुकता की याद दिलाती है। यह विधायी कार्यालयों पर त्रुटिहीन रिकॉर्ड बनाए रखने के बढ़ते दबाव को भी उजागर करती है, क्योंकि मामूली प्रिंटिंग गलतियां भी बड़े विधायी गतिरोध का कारण बन सकती हैं। फिलहाल, अध्यक्ष ने स्थिति को संभालने में सफलता पाई है, लेकिन सत्र आगे बढ़ने के साथ ही उनके आचरण पर कड़ी नजर बनी रहेगी।

(नोट: हालांकि राज्य में सार्वजनिक चर्चाओं में राज ठाकरे जैसे नेताओं की टिप्पणियां छाई हुई हैं, लेकिन यह विशिष्ट घटना विधानसभा के भीतर संसदीय प्रक्रिया और भाषाई संवेदनशीलता का एक अलग मामला है।)

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।