महाराजगंज समाचार: मनरेगा सड़क निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए पहुंची टीम
महाराजगंज समाचार: मनरेगा कार्य में अनियमितता की शिकायत पर टीम ने की जांच
सार्वजनिक शिकायतों के बाद अधिकारियों ने मानकों के पालन और लेबर रिकॉर्ड की जांच के लिए मिट्टी भराई परियोजनाओं का जमीनी सत्यापन किया।
महाराजगंज के परतावल ब्लॉक में लखीमा-पिपराइच और मुरली चौराहा के बीच की सड़क सोमवार को प्रशासनिक जांच का केंद्र बन गई। स्थानीय लोगों की लगातार शिकायतों के बाद कि मनरेगा परियोजना—विशेष रूप से सड़क के किनारों पर मिट्टी भरने का काम—मानक प्रोटोकॉल का पालन किए बिना किया गया है, एक विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर भौतिक ऑडिट किया।
APO उत्कर्ष कुमार और ब्लॉक तकनीकी सहायक अजय कुमार के नेतृत्व में हुई इस जांच का मुख्य उद्देश्य आधिकारिक रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को समझना था। टीम ने केवल कागजी कार्रवाई पर भरोसा नहीं किया; उन्होंने सड़क की लंबाई का निरीक्षण कर मिट्टी भराई की गुणवत्ता का आकलन किया और परियोजना के लिए जारी मस्टर रोल के साथ भौतिक प्रगति का मिलान किया।
साइट विजिट के दौरान, अधिकारियों ने योजना के मानवीय पहलू को प्राथमिकता दी। उन्होंने वहां मौजूद श्रमिकों से बातचीत की और उनके बयानों का दस्तावेजी रिकॉर्ड से मिलान किया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जिन लोगों को भुगतान किया गया है, वास्तव में उन्हीं ने काम किया है। स्थानीय रोजगार सेवक को भी महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया गया, जिसमें लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) शामिल था, जिसे परियोजना की वैधता के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
महाराजगंज में हुई यह जांच ग्रामीण बुनियादी ढांचे में एक निरंतर बनी रहने वाली समस्या को उजागर करती है: विकेंद्रीकृत सार्वजनिक कार्यों में जवाबदेही बनाए रखने की चुनौती। हालांकि शुरुआती निष्कर्षों से पता चलता है कि काम जमीन पर मौजूद है और आवश्यक NOC प्राप्त कर ली गई थी, लेकिन एक औपचारिक जांच का होना मनरेगा के कार्यान्वयन में पारदर्शिता की बढ़ती मांग को दर्शाता है। उन जिलों में जहां बड़े पैमाने पर श्रम योजनाएं स्थानीय रोजगार का मुख्य जरिया हैं, वहां छोटी-सी प्रक्रियात्मक चूक भी जनता के अविश्वास का कारण बन सकती है। उच्च अधिकारियों को सौंपी जाने वाली इस रिपोर्ट का परिणाम संभवतः इस क्षेत्र में "मानक लापरवाही" की शिकायतों से निपटने के लिए एक नजीर पेश करेगा।
टीम ने अपनी जांच का प्रारंभिक चरण पूरा कर लिया है, जिसमें पुष्टि हुई है कि भौतिक कार्य मौजूद है और रिकॉर्ड काफी हद तक जमीनी अवलोकन के अनुरूप हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय उस औपचारिक रिपोर्ट पर निर्भर करेगा जिसे अभी उच्च अधिकारियों के लिए तैयार किया जा रहा है। परतावल के निवासियों के लिए, यह जांच एक संकेत है कि प्रशासन कम से कम सरकारी योजनाओं की स्थानीय निगरानी को उतनी गंभीरता से लेना शुरू कर रहा है जितनी इसकी आवश्यकता है।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।