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इंस्टाग्राम पर विवादास्पद विज्ञापनों को लेकर IT मंत्रालय ने मेटा को किया तलब

IT मंत्रालय ने इंस्टाग्राम विज्ञापन को लेकर मेटा को किया समन - सूत्र

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 3 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
इंस्टाग्राम पर विवादास्पद विज्ञापनों को लेकर IT मंत्रालय ने मेटा को किया तलब
इंस्टाग्राम पर विवादास्पद विज्ञापनों को लेकर IT मंत्रालय ने मेटा को किया तलब

सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है और इंस्टाग्राम पर सामने आए संदिग्ध विज्ञापनों को लेकर मेटा को औपचारिक समन जारी किया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा के शीर्ष अधिकारियों को आधिकारिक तौर पर तलब किया है। यह कदम प्लेटफॉर्म पर दिखाए जा रहे विज्ञापनों की प्रकृति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बाद उठाया गया है। मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सरकार इन विज्ञापनों की जांच-परख की प्रक्रिया और भारतीय उपयोगकर्ताओं को विज्ञापन दिखाने के लिए जिम्मेदार एल्गोरिदम पर स्पष्टीकरण मांग रही है।

यह कदम सोशल मीडिया दिग्गजों पर नियामक शिकंजा कसने की कोशिश है। हालांकि विवादित विज्ञापनों की सटीक प्रकृति पर अभी चर्चा चल रही है, लेकिन मंत्रालय ने प्लेटफॉर्म के मौजूदा कंटेंट मॉडरेशन मानकों पर असंतोष जताया है। इस समन को उन 'सेफ हार्बर' सुरक्षा उपायों के लिए एक सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जिनका दावा अक्सर डिजिटल मध्यस्थ थर्ड-पार्टी कंटेंट होस्ट करते समय करते हैं।

बढ़ती निगरानी का एक पैटर्न

यह घटना कोई अलग मामला नहीं है, बल्कि IT नियमों के तहत सख्त अनुपालन लागू करने के सरकार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। पिछले कुछ महीनों में, मंत्रालय ने विभिन्न डिजिटल स्पेस पर कड़ी नजर रखी है—जिसमें ndtv और उसके home-khabar सेगमेंट से लेकर सोशल मीडिया फीड तक शामिल हैं—ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि डिजिटल इकोसिस्टम गलत सूचना या हानिकारक व्यावसायिक कंटेंट को बढ़ावा न दे।

चाहे संबंधित कंटेंट वित्तीय घोटालों, भ्रामक उत्पाद दावों या संवेदनशील सामग्री से जुड़ा हो, सरकार का रुख स्पष्ट है: प्लेटफॉर्म्स को उन विज्ञापनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए जिनसे वे मुनाफा कमाते हैं। उम्मीद है कि अधिकारी मेटा से यह सवाल करेंगे कि क्या उनकी आंतरिक समीक्षा प्रणालियों को दरकिनार किया गया या उनके विज्ञापन-लक्ष्यीकरण प्रोटोकॉल में कोई प्रणालीगत विफलता है।

बड़ी तस्वीर

यह टकराव वैश्विक टेक कंपनियों और भारतीय राज्य के बीच बढ़ते घर्षण को दर्शाता है। जैसे-जैसे डिजिटल उपभोग webstories और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो कंटेंट की ओर बढ़ रहा है, वायरल लेकिन हानिकारक विज्ञापनों की संभावना तेजी से बढ़ी है। यदि मेटा इन खामियों के लिए संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहता है, तो उसे कई तरह के दंड या अतिरिक्त नियामक आदेशों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे भारत में उसके विज्ञापन अनुपालन ढांचे में पूरी तरह से बदलाव करना पड़ सकता है।

दांव बहुत ऊंचे हैं। सरकार के लिए, यह डिजिटल संप्रभुता और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने का मामला है, ऐसे दौर में जहां एक image या छोटी क्लिप जनधारणा को प्रभावित कर सकती है या वित्तीय शोषण का कारण बन सकती है। मेटा के लिए चुनौती अपने स्वचालित विज्ञापन-राजस्व मॉडल को भारतीय IT मंत्रालय की बढ़ती सख्त अपेक्षाओं के साथ संतुलित करने की है। जैसे-जैसे यह बातचीत आगे बढ़ेगी, उद्योग जगत बारीकी से देख रहा है कि क्या इससे और सख्त विधायी संशोधन होंगे।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।