DU प्रोफेसर की संदिग्ध मौत: जिस दिन था प्रमोशन का इंटरव्यू, उसी दिन मिली लाश
दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर की संदिग्ध मौत, उसी दिन था प्रमोशन का इंटरव्यू; मां के लिए भेजी थीं दवाइयां

पूर्वी दिल्ली में एक होनहार शिक्षिका की असामयिक मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और शुरुआती संकेतों के आधार पर इसे एक सोची-समझी साजिश माना जा रहा है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिवाजी कॉलेज की 43 वर्षीय असिस्टेंट प्रोफेसर देवस्मिता पॉल की मौत की खबर से शैक्षणिक जगत में शोक की लहर है। गुरुवार को वह अपने वसुंधरा एन्क्लेव स्थित अपार्टमेंट में मृत पाई गईं। जिस दिन उनके करियर का एक अहम दिन होना था—यानी उनके प्रमोशन का इंटरव्यू—उसी दिन वह एक भयावह पुलिस जांच का केंद्र बन गईं। इस त्रासदी की जानकारी तब हुई जब उनकी बहन देवरती पॉल ने उन्हें कई बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर उन्हें अनहोनी की आशंका हुई।
दिनचर्या में अचानक आया मोड़
घटना से कुछ घंटे पहले तक सब कुछ सामान्य था। जांचकर्ताओं ने बताया कि प्रोफेसर, जो पिछले चार-पांच वर्षों से सत्यम अपार्टमेंट में अकेले रह रही थीं, अपने परिवार के संपर्क में थीं। उन्होंने अपनी मां के लिए जरूरी दवाइयां भी भिजवाई थीं। यह सामान्य दिनचर्या उनकी अचानक हुई मौत को और भी रहस्यमयी बनाती है; सहकर्मियों ने पुष्टि की कि वह उस दिन अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण इंटरव्यू में शामिल होने के लिए नहीं पहुंचीं।
बंद दरवाजे का रहस्य
शव मिलने की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस इसे हत्या का मामला मानकर जांच कर रही है। जब देवरती पॉल अपार्टमेंट पहुंचीं, तो उन्होंने पाया कि मुख्य दरवाजा बाहर से बंद था। स्थानीय निवासियों और रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के सदस्यों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर प्रोफेसर का शव फर्श पर पड़ा मिला। न्यू अशोक नगर पुलिस स्टेशन में दोपहर करीब 2:35 बजे पीसीआर कॉल दर्ज की गई, जिसके बाद फॉरेंसिक टीम को तुरंत मौके पर बुलाया गया।
करीबी लोगों पर पुलिस की नजर
हालांकि जांच अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन घर में जबरन घुसने के कोई निशान न मिलना पूर्वी दिल्ली पुलिस के लिए जांच का मुख्य बिंदु है। डीसीपी (ईस्ट) राजीव कुमार ने संकेत दिया कि बाहर से जबरन प्रवेश न होने का मतलब है कि आरोपी पीड़िता का परिचित हो सकता है। फॉरेंसिक टीमें सबूत जुटा रही हैं, वहीं स्पष्ट मकसद न मिलने के कारण जांचकर्ता उनके पेशेवर और निजी संपर्कों को खंगाल रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि उनके घर तक किसकी पहुंच थी।
एक फैकल्टी मेंबर की अचानक मौत राजधानी में अकेले रहने वाले पेशेवरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, शैक्षणिक जगत शोक में डूबा है और उस मामले में जवाब का इंतजार कर रहा है, जहां करियर की उम्मीदों वाला दिन एक गहरी व्यक्तिगत त्रासदी में बदल गया।
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