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वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास गाथा जारी, ITC ने जताया भरोसा

पश्चिम एशिया में युद्ध और अल नीनो के जोखिमों के बावजूद भारत तेज विकास के लिए तैयार: ITC

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 26 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास गाथा और ITC का सकारात्मक दृष्टिकोण
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास गाथा और ITC का सकारात्मक दृष्टिकोण

जहां पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और अल नीनो जैसे जलवायु जोखिम वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बने हुए हैं, वहीं भारत की आर्थिक गति आश्चर्यजनक रूप से लचीली बनी हुई है।

नवीनतम वित्तीय चक्र के आंकड़े एक ऐसे देश की तस्वीर पेश करते हैं जो विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ रहा है। जहां दुनिया पश्चिम एशिया युद्ध के नतीजों और कृषि उपज पर अल नीनो के लगातार खतरे से जूझ रही है, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत विस्तार दर्ज किया है। ITC ने अपने नवीनतम आउटलुक में वित्त वर्ष 2027 तक 6.9 प्रतिशत की निरंतर वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो उस आधार पर टिका है जिसने कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के शुरुआती अनुमानों को गलत साबित कर दिया है।

आंकड़े इसके प्रमाण हैं: भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो पिछले वर्ष के 7.1 प्रतिशत से अधिक है। यहां तक कि जनवरी-मार्च तिमाही में भी देश ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की, जो ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्रियों के सर्वेक्षण के अनुमानों से कहीं बेहतर है। यह गति केवल सांख्यिकीय संयोग नहीं है; यह विनिर्माण प्रतिस्पर्धा और डिजिटल व भौतिक बुनियादी ढांचे के आक्रामक विस्तार की दिशा में किए गए सुनियोजित प्रयासों का परिणाम है।

स्थिरता के स्तंभ

भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर यह आशावाद कई संरचनात्मक बदलावों से जुड़ा है। जीडीपी के आंकड़ों से परे, सरकार का कर प्रणाली को सरल बनाने और व्यापार को आसान बनाने पर ध्यान अब परिणाम दिखा रहा है। कॉरपोरेट और बैंकों की बैलेंस शीट वर्षों में सबसे बेहतर स्थिति में है और क्षमता उपयोग (कैपेसिटी यूटिलाइजेशन) 75 प्रतिशत के आसपास बना हुआ है, जिससे निजी क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में तेजी के संकेत मिल रहे हैं।

ITC का कहना है कि ग्रामीण खपत में सुधार हो रहा है, जिसे स्थिर वेतन और बेरोजगारी के स्तर में लगातार कमी का समर्थन मिल रहा है। साथ ही, शहरी मांग को उपभोक्ता ऋण में सुधार और डिस्पोजेबल आय बढ़ाने वाली नीतियों से बल मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी स्थिति आशाजनक है, जहां अमेरिका, यूके, यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ हालिया द्विपक्षीय व्यापार समझौते वैश्विक अस्थिरता के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का काम कर रहे हैं।

यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर

भारत के घरेलू विकास और पश्चिमी देशों में मची उथल-पुथल के बीच का अंतर इस चक्र की सबसे बड़ी कहानी है। जहां पश्चिम में 'अनिश्चितता का युद्ध' और कमजोर होती संस्थाएं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए खतरा बनी हुई हैं, वहीं भारत अपने विशाल आकार और आंतरिक सुधारों के जरिए खुद को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहा है।

हालांकि, आगे की राह चुनौतियों से मुक्त नहीं है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या सरकार अनौपचारिक क्षेत्र के 'अदृश्य' तनाव को प्रबंधित करते हुए विकास की इस गति को बनाए रख सकती है। यदि खपत और रोजगार का यह सकारात्मक चक्र बना रहता है, तो भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक अपवाद बना रह सकता है। लेकिन अगर पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ता है, या अनियमित मौसम फसल को बुरी तरह प्रभावित करता है, तो 6.9 प्रतिशत का यह अनुमान एक गंभीर परीक्षा का सामना करेगा। फिलहाल, आंकड़े बताते हैं कि अर्थव्यवस्था लचीली है, लेकिन अजेय नहीं।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।