भारत का लक्ष्य: साहसिक टैक्स और ऋण सुधारों के जरिए $70 बिलियन का विदेशी निवेश आकर्षित करना
PM-EAC की बैठक में चर्चा: विदेशी फंड आकर्षित करने के कदमों से मिल सकते हैं $70 बिलियन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद की हालिया बैठक में सॉवरेन डेट मार्केट (सरकारी ऋण बाजार) को मजबूत करने और दीर्घकालिक वित्तीय गति को बनाए रखने के लिए एक रणनीतिक बदलाव की रूपरेखा तैयार की गई है।
आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC) की हालिया बैठक में हुई चर्चा के अनुसार, सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा किए गए कई बड़े नीतिगत बदलाव लगभग 70 बिलियन डॉलर का विदेशी फंड आकर्षित करने के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का उद्देश्य भारत के पूंजी बाजारों को सुव्यवस्थित करना था, जिसमें विशेष रूप से देश के ऋण साधनों (debt instruments) को वैश्विक संस्थागत निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने पर जोर दिया गया।
पूंजी के रास्ते से टैक्स की बाधाएं हटाना
शुक्रवार को अंतिम रूप दिए गए इस नीतिगत बदलाव का मुख्य केंद्र उन टैक्स बाधाओं को हटाना है, जिन्होंने पहले विदेशी निवेशकों की रुचि को कम कर दिया था। वित्त मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर सरकारी बॉन्ड में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के निवेश पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को खत्म कर दिया है। इसके अलावा, इन ऋण साधनों से होने वाली ब्याज आय पर लगने वाले विदहोल्डिंग टैक्स को भी समाप्त कर दिया गया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव केवल मामूली नहीं हैं; इन्हें भारतीय सरकारी ऋण को प्रतिष्ठित 'ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉन्ड इंडेक्स' में शामिल करने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस इंडेक्स में शामिल होने का प्रभाव बहुत बड़ा होगा। वैश्विक फंड अक्सर इन सूचकांकों में किसी देश के वेटेज के आधार पर पूंजी आवंटित करते हैं। इसका मतलब यह है कि एक बार जब भारतीय सरकारी ऋण को इसमें जगह मिल जाएगी, तो पैसिव इन्वेस्टमेंट का प्रवाह अपने आप शुरू हो जाएगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि अकेले इस कदम से अगले 10 महीनों में 20-25 बिलियन डॉलर का निवेश आ सकता है, जिससे सरकार को अपने राजकोषीय घाटे के प्रबंधन के दौरान कर्ज लेने की लागत को काफी कम करने में मदद मिलेगी।
बैंकिंग और PSU के लिए लचीलापन बढ़ाना
टैक्स सुधारों के अलावा, RBI लिक्विडिटी पाइपलाइन को व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों के लिए विदेशी जमा राशि जुटाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के उपाय पेश किए हैं, साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) जुटाने के लिए अधिक छूट दी है। अर्थव्यवस्था में पूंजी के प्रवेश के रास्तों में विविधता लाकर, सरकार का लक्ष्य अपनी विकास दर को घरेलू अस्थिरता से अलग करना और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के लिए एक अधिक मजबूत माहौल तैयार करना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर उल्लेख किया कि चर्चाएं तत्काल आर्थिक परिवर्तन और दीर्घकालिक विकास दोनों पर केंद्रित थीं। हालांकि, बैठक में प्रणालीगत जोखिमों पर भी बात हुई। जहां पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक गौण चिंता का विषय बना रहा, वहीं परिषद ने जलवायु संबंधी खतरों पर गंभीर चर्चा की। विशेष रूप से, सदस्यों ने अल नीनो के प्रभाव और भारतीय मौसम विभाग के कम बारिश के पूर्वानुमान का विश्लेषण किया और इस पर विचार किया कि देश मानसून की अनिश्चितता से उत्पन्न आर्थिक जोखिमों को बेहतर ढंग से कैसे कम कर सकता है।
आगे की राह
यह दोहरी रणनीति—वित्तीय क्षेत्र के उदारीकरण को जलवायु-अनुकूल आर्थिक योजना के साथ जोड़ना—वर्तमान प्रशासन का दीर्घकालिक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करने का प्रमाण है। सरकारी ऋण पर ब्याज कम करके और बॉन्ड बाजार को गहरा बनाकर, सरकार एक ऐसा वित्तीय बफर तैयार करना चाहती है जो वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना कर सके। जैसे-जैसे इन कदमों का विवरण बाजार में पहुंचेगा, आने वाले महीने यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि भारत इन नीतिगत प्रोत्साहनों को प्रभावी ढंग से वास्तविक और दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह में कितनी कुशलता से बदल पाता है।
पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क पूरे भारत से सत्यापित, स्रोत-आधारित राजनीतिक समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है।