भारत और फ्रांस ने आर्थिक संबंधों को नई दिशा दी, क्रिटिकल मिनरल्स और निवेश पर जोर
भारत और फ्रांस ने आर्थिक और वित्तीय वार्ता की सह-अध्यक्षता की, क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग गहरा करने पर सहमति बनी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके फ्रांसीसी समकक्ष रोलैंड लेस्क्योर ने द्विपक्षीय व्यापार और सप्लाई चेन की मजबूती के लिए एक नए रोडमैप को औपचारिक रूप देने हेतु ऐक्स-एन-प्रोवेंस में मुलाकात की।
इस शुक्रवार, ऐक्स-एन-प्रोवेंस का खूबसूरत शहर भारत-फ्रांस आर्थिक साझेदारी के एक महत्वपूर्ण पुनर्गठन का गवाह बना। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त, औद्योगिक, ऊर्जा और डिजिटल संप्रभुता मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने एक उच्च-स्तरीय आर्थिक और वित्तीय वार्ता की, जो नई दिल्ली और पेरिस के बीच गहरे तालमेल का संकेत है।
यह बैठक केवल एक राजनयिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह 2026 की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा किए गए उच्च-स्तरीय वादों का एक आवश्यक अनुवर्ती कदम था। वैश्विक सप्लाई चेन पर लगातार दबाव और ऊर्जा सुरक्षा की बढ़ती दौड़ के बीच, दोनों देश अपने वित्तीय उद्योगों को सीधे जोड़कर पारंपरिक बाधाओं को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।
क्रिटिकल मिनरल्स और रणनीतिक स्वायत्तता
चर्चाओं के केंद्र में क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग की तत्काल आवश्यकता थी। जैसे-जैसे दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की ओर बढ़ रहे हैं, रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिजों) के लिए स्थिर और सुरक्षित सप्लाई चेन पर निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन गई है। इस वार्ता ने प्रभावी रूप से एक ऐसा ढांचा तैयार किया है जहां भारत और फ्रांस बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण और डिजिटल संप्रभुता पर समन्वय कर सकते हैं, जिससे बिखरे हुए प्रयासों के बजाय एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
वित्त मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यह वार्ता अब व्यापार और निवेश एजेंडे के प्रबंधन के लिए प्राथमिक मंच के रूप में कार्य करेगी। G20 और पेरिस क्लब जैसे बहुपक्षीय मंचों पर अपने रुख को संरेखित करके, दोनों देश वैश्विक आर्थिक मंचों पर अपनी प्रभावशीलता बढ़ाने का लक्ष्य रख रहे हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: व्यापक परिप्रेक्ष्य
यह बदलाव पिछली व्यापार वार्ताओं की विशुद्ध लेन-देन वाली प्रकृति से हटकर है। अपने वित्तीय इकोसिस्टम को एकीकृत करके, भारत और फ्रांस भू-राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ सुरक्षा कवच तैयार कर रहे हैं। भारतीय व्यवसायों के लिए परिणाम स्पष्ट है: तकनीक हस्तांतरण के लिए सुगम रास्ते और यूरोपीय पूंजी तक आसान पहुंच की उम्मीद है, विशेष रूप से शहरी बुनियादी ढांचे और हरित ऊर्जा परियोजनाओं में।
इन भविष्य की परियोजनाओं में फ्रेंच डेवलपमेंट एजेंसी (AFD) की भागीदारी यह दर्शाती है कि यह साझेदारी अल्पकालिक व्यापारिक मात्रा से परे, दीर्घकालिक औद्योगिक एकीकरण पर केंद्रित है। यदि इस वार्ता का 2027 संस्करण इसी गति को बनाए रखता है, तो भारत-फ्रांस कॉरिडोर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में यूरोपीय निवेश के लिए सबसे स्थिर माध्यम बन सकता है।
सीमाओं से परे समन्वय
बैठक का दायरा व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण तक फैला था, जिसमें दोनों मंत्रियों ने वैश्विक विकास के सामने आने वाली चुनौतियों को स्वीकार किया। हालांकि उन्होंने अपने वित्तीय क्षेत्रों की तत्काल जरूरतों को संबोधित किया, लेकिन अंतर्निहित उद्देश्य स्पष्ट है: एक ऐसी "रणनीतिक स्वायत्तता" का निर्माण करना जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव को झेलने में सक्षम बनाए। 2027 के लिए बातचीत के अगले दौर की योजना पहले से ही बन रही है, जिससे निवेशकों को यह संदेश जाता है कि यह साझेदारी लंबी अवधि के लिए है।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।