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घरेलू बजट पर मार: प्रमुख शहरों में LPG सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी

अपने शहर में घरेलू LPG सिलेंडर की नई कीमतें देखें

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्कप्रकाशित 7 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
घरेलू बजट पर मार: प्रमुख शहरों में LPG सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी
घरेलू बजट पर मार: प्रमुख शहरों में LPG सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी

सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू रसोई गैस की दरों में तत्काल प्रभाव से बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिससे देशभर के परिवारों पर ईंधन की बढ़ती लागत का बोझ और बढ़ गया है।

इस जून में घरेलू खर्चों का गणित एक बार फिर बिगड़ गया है, क्योंकि तेल कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में देशभर में ₹29 की बढ़ोतरी लागू कर दी है। हालांकि यह संशोधन तुरंत प्रभावी हो गया है, लेकिन राज्य-विशिष्ट करों और परिवहन शुल्क के कारण अंतिम खुदरा मूल्य अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकता है। एक औसत भारतीय परिवार के लिए, इस बदलाव का मतलब है सालाना लगभग ₹348 का अतिरिक्त खर्च, जिसे लेकर विश्लेषकों का मानना है कि यह मध्यम और निम्न-आय वाले परिवारों के बजट पर और दबाव डालेगा।

क्षेत्रीय कीमतों में अंतर

जैसे-जैसे उपभोक्ता नवीनतम दरों की जांच कर रहे हैं, उन्हें अपने भौगोलिक स्थान के आधार पर कीमतों में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। राजधानी दिल्ली में अब कीमत ₹942.00 है, जबकि मुंबई के निवासियों को ₹941.50 की थोड़ी कम दर का भुगतान करना पड़ रहा है। अन्य प्रमुख महानगरों में भी इसी तरह की बढ़ोतरी देखी गई है: कोलकाता में अब सिलेंडर ₹968.00 में मिल रहा है, और चेन्नई के उपभोक्ता ₹957.50 चुका रहे हैं। अन्य शहरों में कीमतें अलग-अलग हैं, जहाँ पटना में यह ₹1,031.50 के उच्च स्तर पर है, जबकि बेंगलुरु में यह अपेक्षाकृत कम ₹915.50 है। इन उतार-चढ़ाव के कारण, तेल कंपनियां ग्राहकों को सलाह देती हैं कि वे रिफिल बुक करने से पहले अपने स्थानीय वितरक या आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से सटीक कीमत की पुष्टि कर लें।

ऊर्जा संकट का व्यापक असर

घरेलू ऊर्जा लागत में यह बदलाव कोई अकेली घटना नहीं है। उद्योग के जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए सरकारी कंपनियों ने यह बढ़ोतरी जरूरी समझी। ₹29 की इस वृद्धि के बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि खुदरा विक्रेता अभी भी वैश्विक मूल्य वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रहे हैं, जिसका अर्थ है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों का पूरा असर अभी उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। रसोई गैस की बढ़ती लागत एक व्यापक मुद्रास्फीति के दौर के साथ आई है, क्योंकि मई के मध्य से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल ₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में भी लगभग ₹6 प्रति किलोग्राम का इजाफा हुआ है।

व्यावसायिक बनाम घरेलू बोझ

इन संशोधनों का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं है। बाजार घरेलू और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के बीच स्पष्ट अंतर करता है, जिसमें 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर के लिए अलग मूल्य संरचना है। उदाहरण के लिए, जहाँ दिल्ली में एक घरेलू उपयोगकर्ता ₹942.00 चुकाता है, वहीं उसी शहर में एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान को 19 किलोग्राम के सिलेंडर के लिए ₹3,113.50 का भुगतान करना पड़ रहा है। विशेष रूप से आतिथ्य और खाद्य सेवा क्षेत्रों में काम करने वाले व्यवसायों पर इन बढ़ते खर्चों को प्रबंधित करने का दबाव बढ़ रहा है। जैसे-जैसे जून महीने में कीमतों में बदलाव का दौर जारी है, उपभोक्ताओं को अपडेट पर बारीकी से नजर रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती लागत घरेलू महंगाई पर चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है।

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क
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पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क पूरे भारत से सत्यापित, स्रोत-आधारित राजनीतिक समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है।