सुप्रीम कोर्ट पर दिग्विजय सिंह का 'सीट चोरी' का आरोप, मचा सियासी बवाल
दिग्विजय बोले- सीट की मिली-जुली चोरी में SC भी शामिल: मीनाक्षी मामले की सुनवाई टलने पर आरोप; भाजपा बोली- यह न्यायपालिका का अपमान है।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया उस समय गरमा गई जब कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद पार्टी ने इसे संस्थागत मिलीभगत करार दिया।
भोपाल की सत्ता के गलियारों में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। इसका असर तुरंत देखने को मिला, जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने तीखा हमला बोलते हुए चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट पर भी 'मिली-जुली साजिश' का आरोप लगाया।
दिग्विजय सिंह ने प्रेस से बात करते हुए कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें कानूनी अड़चनों का पहले से अंदाजा था। उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई को शुक्रवार तक टालने के फैसले ने उनकी याचिका को बेअसर कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अदालत ने सुनवाई को नामांकन प्रक्रिया के अंतिम समय से आगे क्यों खिसकाया और कहा, "जब चोरी हुई है, तो इसमें सभी शामिल हैं।"
भाजपा का पलटवार
सत्तारूढ़ पार्टी की ओर से प्रतिक्रिया तुरंत आई। मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने दिग्विजय पर निशाना साधते हुए उनकी टिप्पणियों को न्यायपालिका का सीधा अपमान बताया। सारंग ने वरिष्ठ नेता के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पर 'चोरी' में शामिल होने का आरोप लगाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं को लांघना है।
भाजपा के लिए यह मामला अब बंद हो चुका है। जहां अदालत में कानूनी ड्रामा चल रहा था, वहीं चुनाव आयोग ने प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर ली। गुरुवार तक भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुघ और महेश केवट को निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंप दिए गए, जिससे तीनों सीटों पर पार्टी की निर्विरोध जीत सुनिश्चित हो गई।
असमानता का सवाल
अब नटराजन के समर्थन में एकजुट हुई कांग्रेस ने इस मुद्दे को दिल्ली में अपने केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा दिया है। मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी दोनों ने इस अस्वीकृति को भाजपा और चुनाव आयोग के बीच 'मिलीभगत' का परिणाम बताया है। उनकी मुख्य शिकायत असमानता को लेकर है: उनका तर्क है कि जहां नटराजन का नामांकन "मामूली आपत्तियों" के आधार पर रद्द कर दिया गया, वहीं भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को अपने कागजात में तकनीकी त्रुटियों को सुधारने की छूट दी गई।
यह क्यों मायने रखता है
यह घटनाक्रम बड़े दांव वाले चुनावों के दौरान राजनीतिक वर्ग और संवैधानिक संस्थाओं के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। जब वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं, तो यह चुनावी ढांचे में भरोसे के गहरे संकट का संकेत देता है। यह पैटर्न—जहां प्रक्रियात्मक तकनीकी खामियां एकतरफा राजनीतिक परिणामों में बदल जाती हैं—भविष्य के टकरावों में एक केंद्रीय मुद्दा बन सकता है। इसे 'सीट चोरी' का नाम देकर कांग्रेस इस विमर्श को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रही है, ताकि भोपाल से आगे बढ़कर व्यापक चुनावी प्रणाली की अखंडता को चुनौती दी जा सके।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।