दिल्ली का 'टीजिंग मॉनसून': आखिर क्यों बारिश के बीच आया ये लंबा 'ड्राई स्पेल'?
बादल आ रहे, बारिश नहीं... दिल्ली के मॉनसून के एक्टिव ब्रेक साइकल की ये है असली कहानी
हालांकि शहर पर बादलों की घनी चादर छाई हुई है, लेकिन बारिश अभी भी नदारद है क्योंकि वैश्विक जलवायु पैटर्न दिल्ली के मौसम चक्र को बाधित कर रहे हैं।
राजधानी फिलहाल एक मौसम संबंधी विरोधाभास में फंसी हुई है: नमी से भरे भारी बादल आसमान में मंडरा रहे हैं, लेकिन सड़कें पूरी तरह सूखी हैं। जैसे-जैसे नागरिक कल का मौसम के बारे में अपडेट खोज रहे हैं, जमीनी हकीकत एक निराशाजनक 'ब्रेक मॉनसून' चक्र को उजागर कर रही है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों के लिए यह कोई असामान्य घटना नहीं है, लेकिन इस सीजन में इन सूखे बादलों का बने रहना हमारे मॉनसून के काम करने के तरीके में गहरे प्रणालीगत बदलावों का संकेत देता है।
अल नीनो का प्रभाव
इस व्यवधान के मूल में प्रशांत महासागर में पनप रहा एक शक्तिशाली अल नीनो है। जैसा कि वैश्विक शोध और कई outlets reporting पुष्टि करते हैं, जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक गर्म हो जाता है, तो प्राकृतिक 'वॉकर सर्कुलेशन' का संतुलन बिगड़ जाता है। यह बदलाव भारत-इंडोनेशिया क्षेत्र में उच्च वायुमंडलीय दबाव बनाता है, जो प्रभावी रूप से उन नमी ले जाने वाली व्यापारिक हवाओं को रोक देता है जो एक स्वस्थ मॉनसून के लिए आवश्यक हैं। बारिश लाने वाले बादलों को अंदरूनी इलाकों तक खींचने वाली इस प्रक्रिया को कमजोर करके, समुद्र की यह गर्म होती घटना मॉनसून को दूर रख रही है।
बारिश क्यों नहीं हो रही?
मॉनसून की जटिलता केवल नमी के बारे में नहीं है। हालांकि हमें बादल दिखाई देते हैं, लेकिन उनमें बरसने के लिए जरूरी 'इंजन' की कमी है। वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी—जो हमारी बारिश के प्राथमिक स्रोत हैं—का सतही तापमान अनियमित है। बड़े पैमाने पर वाष्पीकरण को प्रेरित करने के लिए आवश्यक गर्मी के बिना, उत्तर भारत तक पहुंचने वाली नमी की मात्रा काफी कम है। इसके अलावा, ऊपरी वायुमंडल में उच्च दबाव वाली प्रणालियां वर्तमान में एक ढक्कन की तरह काम कर रही हैं, जो इन निचले स्तर के बादलों को सक्रिय बारिश वाले तूफानों में बदलने से रोक रही हैं।
जेट स्ट्रीम में बदलाव
इसके साथ ही, जेट स्ट्रीम का व्यवहार भी अनिश्चित हो गया है। आमतौर पर, ये ऊंचाई वाली हवाएं मौसम प्रणालियों के लिए एक कन्वेयर बेल्ट के रूप में कार्य करती हैं। हालांकि, अल नीनो के प्रभाव के कारण, जेट स्ट्रीम उत्तर की ओर खिसक गई है। यह विस्थापन पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) की गति को बाधित करता है—मध्य एशिया से आने वाली वे ठंडी, नमी से भरपूर हवाएं जो आमतौर पर दिल्ली को राहत देती हैं। जब ये प्रणालियां अपने रास्ते से भटक जाती हैं, तो शहर के पास बारिश का केवल आभास रह जाता है, जबकि बारिश नहीं हो पाती।
बड़ी तस्वीर
यह सिर्फ वीकेंड की योजना खराब होने का मामला नहीं है; यह जलवायु की बदलती लय का संकेत है। उत्तर भारत में कृषि स्थिरता और शहरी जल प्रबंधन के लिए मॉनसून पर निर्भरता अभी भी प्राथमिक है। जब 'ड्राई स्पेल' जैसे चक्र अधिक बार होने लगते हैं, तो यह संकेत मिलता है कि पारंपरिक मौसमी पैटर्न पर हमारी निर्भरता तेजी से अनिश्चित होती जा रही है। मॉनसून की वर्तमान स्थिति यह उजागर करती है कि कैसे वैश्विक महासागरीय बदलाव और ऊंचाई वाली हवाओं के पैटर्न अब राजधानी के स्थानीय जीवन को पहले से कहीं अधिक नियंत्रित कर रहे हैं। जैसे-जैसे हम इन घटनाक्रमों पर नजर रख रहे हैं, यह स्पष्ट है कि प्रशांत महासागर और हमारे स्थानीय आसमान के बीच की यह परस्पर क्रिया अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।