दिल्ली की सत्ता के गलियारों में हलचल: क्या TMC में बदलाव की तैयारी है या पार्टी टूटने की कगार पर?
TMC संकट लाइव अपडेट: इस्तीफे और विलय की चर्चाओं से पार्टी में बढ़ी उथल-पुथल; क्या कांग्रेस के साथ हाथ मिलाएगी TMC?

INDIA ब्लॉक के नेतृत्व और TMC के शीर्ष नेताओं के बीच बढ़ती उच्च-स्तरीय बैठकों के बीच, पार्टी से इस्तीफों और आंतरिक कलह ने भविष्य को लेकर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
10 जनपथ के सत्ता के गलियारे एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण राजनीतिक हलचल के केंद्र बन गए हैं। हालांकि TMC संकट के लाइव अपडेट आंतरिक उथल-पुथल की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन पिछले 48 घंटों की घटनाएं किसी बड़ी राजनीतिक बिसात का संकेत दे रही हैं। बुधवार को अभिषेक बनर्जी ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ बैठक की, जिसने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। यह बैठक सोनिया गांधी द्वारा ममता बनर्जी से की गई उस सीधी अपील के बाद हुई है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री से दूरियां मिटाने और BJP के खिलाफ INDIA ब्लॉक के सामूहिक मोर्चे को मजबूत करने का आग्रह किया था।
विलय की चर्चाओं से पार्टी की अस्थिरता और बढ़ गई है, जिसे कई हाई-प्रोफाइल इस्तीफों ने हवा दी है। सबसे हालिया झटका सुष्मिता देव के इस्तीफे की औपचारिक स्वीकृति के रूप में लगा, जो 10 जून से प्रभावी है। इसके बाद सुष्मिता देव की असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ बैठक ने उनके BJP में शामिल होने की अटकलों को और तेज कर दिया है। हालांकि इन इस्तीफों ने पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को हिला कर रख दिया है, लेकिन नेतृत्व इस नैरेटिव को रोकने की कोशिश कर रहा है कि पार्टी अंदर से टूट रही है।
विलय पर बहस: हकीकत बनाम अफवाह
सुर्खियों के बावजूद, यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या TMC औपचारिक रूप से कांग्रेस के साथ हाथ मिलाएगी। बागी TMC नेता ऋतब्रत बनर्जी ने विलय की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी का कोई भी बड़ा धड़ा, सांसदों से लेकर पंचायत प्रतिनिधियों तक, पाला बदलने के मूड में नहीं है।
यही राय विपक्ष के दूसरे खेमे में भी है। बंगाल की राजनीति पर मुखर रहने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने स्पष्ट किया है कि उन्हें ऐसी किसी भी विलय चर्चा की जानकारी नहीं है। हालांकि विपक्षी गठबंधन के भीतर वैचारिक तालमेल पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल की जमीनी हकीकत यह बताती है कि औपचारिक विलय अभी दूर की कौड़ी है, भले ही गठबंधन एक खुला विकल्प बना हुआ है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
TMC के भीतर मौजूदा अस्थिरता केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं है; यह INDIA ब्लॉक के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा है। बंगाल में सत्ता विरोधी वोटों के किसी भी बिखराव का सीधा फायदा BJP को मिलता है। TMC के लिए चुनौती दोहरी है: उन्हें अपने आंतरिक असंतोष को संभालना है और साथ ही यह तय करना है कि वे राष्ट्रीय गठबंधन के लिए अपनी राजनीतिक स्वायत्तता का कितना हिस्सा छोड़ने को तैयार हैं। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि यह केवल राजनीतिक सुधार का दौर है या राज्य की राजनीति में किसी बड़े संरचनात्मक बदलाव की शुरुआत। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ममता बनर्जी राष्ट्रीय विपक्ष के दबाव के बीच अपनी पार्टी को एकजुट रख पाएंगी।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।