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आदिवासी बहुल इलाकों पर फोकस: पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू ने ओडिशा के लिए 47,000 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज ओडिशा में 47,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे - इंडिया टुडे

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 20 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
आदिवासी बहुल इलाकों पर फोकस: पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू ने ओडिशा के लिए 47,000 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया ऐलान
आदिवासी बहुल इलाकों पर फोकस: पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू ने ओडिशा के लिए 47,000 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया ऐलान

सांस्कृतिक जुड़ाव और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन के तहत, देश का शीर्ष नेतृत्व मयूरभंज में एक साथ नजर आया, जहां संस्कृति और विकास का अनूठा संगम देखने को मिला।

मयूरभंज की लाल मिट्टी आज सत्ता के एक दुर्लभ मिलन की साक्षी बनी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के गृह जिले में उनके साथ शामिल हुए। राष्ट्रपति के 68वें जन्मदिन के अवसर पर आयोजित यह दौरा सामान्य सरकारी दौरों से काफी अलग रहा। राष्ट्रपति के गृहनगर पहाड़पुर में, दोनों नेताओं ने पवित्र संताली और हो जाहेरा स्थलों पर पारंपरिक प्रकृति पूजा में भाग लिया। ओडिशा के आदिवासी बेल्ट में इस कदम को काफी अहम माना जा रहा है।

बुनियादी ढांचे में भारी निवेश

इस दौरे का मुख्य केंद्र आर्थिक पैकेज रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 47,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की शुरुआत करने वाले हैं। इन पहलों का दायरा काफी व्यापक है, जो ऊर्जा, सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर करती हैं। बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के अलावा, इस दौरे में स्थानीय सशक्तिकरण पर भी जोर दिया गया। नेताओं ने कौशल विकास केंद्रों और स्कूलों का दौरा किया, ताकि आदिवासी शिक्षा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दोहराया जा सके।

पहाड़पुर की नई पहचान

जिन विशिष्ट घोषणाओं ने सबका ध्यान खींचा, उनमें पहाड़पुर को 'सोलर विलेज' घोषित करना शामिल है। राष्ट्रपति के गृहनगर को हरित ऊर्जा के मॉडल के रूप में पेश करके, सरकार ग्रामीण विकास में स्थिरता की ओर एक बड़ा संकेत दे रही है। यह कदम नवीकरणीय ऊर्जा को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने के व्यापक राष्ट्रीय एजेंडे के अनुरूप है, जो इस प्रतीकात्मक दौरे को भविष्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए एक खाका बनाता है।

यह दौरा क्यों महत्वपूर्ण है

यह दौरा केवल जन्मदिन का जश्न या सरकारी परियोजनाओं का निरीक्षण भर नहीं है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को आदिवासी ओडिशा के केंद्र में एक साथ लाकर, सत्ताधारी दल 'जनजाति' समुदाय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत कर रहा है—जो वर्तमान राजनीतिक रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा है। वित्तीय आवंटन का पैमाना और जाहेरा जैसे सांस्कृतिक स्थलों पर ध्यान केंद्रित करना, एक दोहरी रणनीति को दर्शाता है: ठोस आर्थिक विकास और गहरी सांस्कृतिक सम्मान के जरिए आदिवासी समुदायों का विश्वास जीतना। राज्य में शासन के दो साल पूरे होने के मौके पर, यह दौरा पूर्वी भारत में सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

इसके बाद, प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के लिए रवाना होंगे, जहां वे अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों के सिलसिले को जारी रखेंगे, जिसके बाद उनका ध्यान आगामी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह पर केंद्रित होगा। इस दौरे में राष्ट्रपति कार्यालय और प्रधानमंत्री प्रशासन के बीच का समन्वय क्षेत्रीय विकास के प्रति एक सुव्यवस्थित दृष्टिकोण को उजागर करता है, जहां प्रमुख आर्थिक घोषणाओं को आधार देने के लिए हाई-प्रोफाइल दौरों का लाभ उठाया जाता है।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।