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दायरा तय करना: POSH कानून के तहत कब 'वर्कप्लेस' बन जाता है सफर?

POSH एक्ट के तहत 'वर्कप्लेस' (कार्यस्थल) की परिभाषा क्या है?

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 24 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
दायरा तय करना: POSH कानून के तहत कब 'वर्कप्लेस' बन जाता है सफर?
दायरा तय करना: POSH कानून के तहत कब 'वर्कप्लेस' बन जाता है सफर?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने POSH एक्ट के दायरे पर एक स्पष्ट लकीर खींचते हुए फैसला सुनाया है कि साझा सार्वजनिक परिवहन कानूनन 'वर्कप्लेस' की परिभाषा में नहीं आता है।

भारत के भीड़भाड़ वाले शहरों में सुबह का सफर अक्सर अराजक और तनावपूर्ण होता है, लेकिन क्या कानून की नजर में यह एक 'वर्कप्लेस' है? बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में इस सवाल पर विचार करते हुए इंटरनल कंप्लेंट कमेटी (ICC) के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक कर्मचारी को यौन उत्पीड़न का दोषी माना गया था। यह घटना एक साझा ऑटो-रिक्शा के अंदर हुई थी—जो लाखों लोगों के लिए यात्रा का एक सामान्य साधन है—न कि ऑफिस परिसर में या नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए परिवहन में।

अदालत का रुख स्पष्ट है: किसी वाहन को 'यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013' के दायरे में आने के लिए, नियोक्ता द्वारा उसका प्रबंधित या प्रदान किया जाना आवश्यक है। चूंकि ऑटो-रिक्शा एक निजी व्यवस्था थी, इसलिए अदालत ने फैसला सुनाया कि ICC के पास POSH एक्ट के तहत इस घटना की जांच करने का अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह फैसला आरोपी को आरोपों से मुक्त नहीं करता है; यह मामले को अन्य कानूनी रास्तों, जैसे कि आपराधिक कार्यवाही के जरिए आगे बढ़ाने का विकल्प खुला रखता है।

POSH एक्ट के दायरे को समझना

POSH एक्ट की धारा 2(o) के तहत 'वर्कप्लेस' की परिभाषा जानबूझकर व्यापक रखी गई है। इसमें सरकारी विभागों और निजी उद्यमों से लेकर अस्पताल, खेल स्टेडियम और यहां तक कि गैर-सरकारी संगठन भी शामिल हैं। यह कानून कर्मचारियों को उन सभी जगहों पर सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है जहां 'व्यावसायिक, पेशेवर, शैक्षणिक, मनोरंजन, औद्योगिक, स्वास्थ्य सेवाएं या वित्तीय गतिविधियां' होती हैं।

हालांकि, यह कानून हर जगह लागू नहीं होता। हालिया फैसला इस बात पर जोर देता है कि कानून के लागू होने की एक भौतिक और संविदात्मक (contractual) सीमा है। जहां कानून नियोक्ता द्वारा प्रदान किए गए वाहनों में महिलाओं की सुरक्षा करता है, वहीं यह सार्वजनिक या साझा परिवहन की अनिश्चित प्रकृति तक नहीं फैलता, भले ही वाहन में मौजूद व्यक्ति सहकर्मी ही क्यों न हो।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: व्यापक परिप्रेक्ष्य

यह फैसला कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के नियमों में 'कानूनी खामियों' को लेकर चल रही न्यायिक बहस के बीच आया है। बार एसोसिएशनों पर केरल हाई कोर्ट के फैसले से लेकर POSH के दायरे को व्यापक बनाने के सुप्रीम कोर्ट के प्रयासों तक, हालिया मामले दिखाते हैं कि हमारी अदालतें पेशेवर कदाचार और आपराधिक व्यवहार के बीच की सीमा को लगातार पुनर्गठित कर रही हैं।

यहां निहितार्थ स्पष्ट है: POSH एक्ट एक विशेष उपकरण है, न कि सहकर्मियों के बीच हर शिकायत का समाधान। कार्यस्थल की परिभाषा को सीमित करके, अदालत यह संकेत दे रही है कि जब कोई घटना नियोक्ता के संरचनात्मक नियंत्रण से बाहर होती है, तो कंपनी की आंतरिक निवारण प्रणाली पुलिस या न्यायपालिका का विकल्प नहीं बन सकती। संगठनों को अब अपनी आंतरिक समितियों के अधिकार क्षेत्र के प्रति अधिक सतर्क रहना होगा, ताकि वे अपनी सीमाओं का उल्लंघन न करें, जिससे ऐसी प्रक्रियात्मक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं जो अंततः उन पीड़ितों को ही नुकसान पहुंचाती हैं जिनकी सुरक्षा के लिए ये समितियां बनाई गई हैं।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।