मानसून का दोहरा रूप: पूर्वी भारत में झमाझम बारिश, तो मध्य भारत में भीषण गर्मी
पश्चिमी तट पर मानसून की सक्रियता, मंगलवार को भी मध्य भारत में लू का प्रकोप जारी
जहाँ एक ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून पश्चिमी तट और पूर्वोत्तर भारत में जोर पकड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर देश का एक बड़ा हिस्सा भीषण लू की चपेट में है।
भारत का मौसम इस समय दो विपरीत स्थितियों से गुजर रहा है। एक तरफ, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों को बड़ी राहत मिली है। दूसरी तरफ, मध्य और उत्तर भारत के कई इलाके भट्टी की तरह तप रहे हैं, जहाँ उत्तर प्रदेश के बांदा जैसे शहरों में तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। लोग कल के मौसम पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन बारिश से भीगे तटीय इलाकों और लू की मार झेल रहे मैदानी इलाकों के बीच का अंतर साफ देखा जा सकता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून महाराष्ट्र (मुंबई सहित) में आगे बढ़ रहा है और अगले 48 घंटों में तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के शेष हिस्सों को कवर कर लेगा। इस प्रगति से देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। पूर्वोत्तर राज्य, विशेषकर असम और मेघालय, साथ ही उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में मानसून के मजबूत होने के साथ ही मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
मंगलवार के लिए क्षेत्रीय पूर्वानुमान
जो लोग मंगलवार के मौसम का हाल जानना चाहते हैं, उनके लिए अच्छी खबर है कि कोंकण, गोवा से लेकर कर्नाटक और केरल के तटीय हिस्सों तक मानसून सक्रिय रहेगा। तेलंगाना में भी आने वाले सप्ताह में व्यापक बारिश की संभावना है।
हालांकि, यह बदलाव चुनौतियों के साथ आ रहा है। IMD ने बिहार, झारखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्यों में गरज-चमक के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: आर्थिक प्रभाव
मौसम का यह अनिश्चित मिजाज केवल दैनिक जीवन को ही प्रभावित नहीं कर रहा। भारत में बिजली की मांग हाल ही में रिकॉर्ड 260 GW तक पहुंच गई है, जिससे उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में बिजली ग्रिड पर भारी दबाव है।
स्थिति स्पष्ट है: जहाँ पूर्वी और दक्षिणी भारत में कृषि और जलाशयों को बारिश से राहत की उम्मीद है, वहीं मध्य भारत की भीषण गर्मी शहरी बुनियादी ढांचे और बिजली की खपत पर दबाव बना रही है। इस सप्ताह की 'बाढ़ और भट्टी' जैसी स्थिति जलवायु चक्र की अस्थिरता को दर्शाती है। जैसे-जैसे मानसून मध्य भारत में आगे बढ़ेगा, उम्मीद है कि तापमान में गिरावट आएगी, जिससे बिजली ग्रिड पर दबाव कम होगा और भीषण गर्मी की चेतावनी झेल रहे लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।