कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बाजार में साप्ताहिक तेजी; निवेशकों की नजर Q2 रिकवरी पर
कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने बाजार को सहारा दिया; स्ट्रीट को दूसरी तिमाही में बेहतर नतीजों की उम्मीद
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और बाजार की अस्थिरता कम होने से लंबे सप्ताहांत (long weekend) से पहले निवेशकों को स्थिरता का अहसास हुआ है।
भारतीय बाजारों ने सप्ताह का समापन सतर्क आशावाद के साथ किया, जिसमें निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने लगभग 0.4% की बढ़त दर्ज की। हालांकि सूचकांकों ने अपनी इंट्राडे तेजी का कुछ हिस्सा गंवा दिया—जो एक समय 1% तक ऊपर थे—लेकिन निफ्टी का 24,056 और सेंसेक्स का 77,100.47 पर बंद होना निवेशकों के संयम को दर्शाता है। शुक्रवार को मुहर्रम के कारण बाजार बंद रहने से, यह छोटा सा अंतराल उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है जो शेयर बाजार आज पर नजर रखते हैं।
बाजार के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक खबर वैश्विक तेल बाजार से आई है। ब्रेंट क्रूड लगातार चौथे सत्र में गिरकर 72.4 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर आ गया है। विश्लेषक इस गिरावट का श्रेय होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने को दे रहे हैं, जो भारत जैसी ऊर्जा-आयात करने वाली अर्थव्यवस्था के लिए मौलिक रूप से अनुकूल है। स्ट्रीट (बाजार) के लिए, यह राहत केवल एक खबर नहीं है, बल्कि कॉर्पोरेट बैलेंस शीट के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट है।
सेक्टोरल बदलाव और निवेशकों का सेंटिमेंट
नरम तेल कीमतों का असर ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा दिखा, जहां निफ्टी ऑटो इंडेक्स 2.3% उछल गया। इसके विपरीत, व्यापक बाजार का रुख मिला-जुला रहा; जहां बीएसई पर 1,602 शेयरों में तेजी रही, वहीं गिरावट वाले शेयरों की संख्या 2,627 रही। टेक और मेटल इंडेक्स रफ्तार बनाए रखने में संघर्ष करते दिखे, जिससे निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित किया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट के बावजूद, इंडिया VIX 2.5% गिरकर 13.1 पर आ गया, जो यह संकेत देता है कि इंडेक्स को परेशान करने वाली घबराहट फिलहाल कम है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) बाजार में सक्रिय होते दिख रहे हैं, जिन्होंने गुरुवार को ₹383.8 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी का अपने 20-दिवसीय मूविंग एवरेज 23,800 के आसपास सपोर्ट लेना बाजार की मजबूती का तकनीकी संकेत है। आम सहमति यह है कि हालांकि इंडेक्स 24,200–24,250 के दायरे को टेस्ट कर सकता है, लेकिन एक बड़े ट्रेंड की पुष्टि के लिए निरंतर ब्रेकआउट जरूरी है।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। चोलामंडलम सिक्योरिटीज के धर्मेश कांत का कहना है कि भले ही पहली तिमाही की कमाई सुस्त दिख सकती है, लेकिन दूसरी तिमाही से मार्जिन और मुनाफे में सुधार की नींव रखी जा रही है। 15% संभावित बारिश की कमी की चिंताओं के बावजूद, बाजार ने इन चुनौतियों को पहले ही पचा लिया है।
आम निवेशक के लिए, यह संकेत है कि बाजार अभी दायरे में है लेकिन ऊर्जा की कम लागत इसे सहारा दे रही है। व्यापक आर्थिक तस्वीर इस बात पर निर्भर करती है कि क्या ये कम इनपुट लागत मानसून से जुड़ी महंगाई की चिंताओं से पहले मुनाफे में बदल सकती है। फिलहाल, FPI का निवेश और स्थिर तेल कीमतें मौजूदा अनिश्चितता से निपटने के लिए जरूरी सुरक्षा कवच प्रदान कर रही हैं।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।