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ऑफिस के दायरे से बाहर: क्यों ट्रांसपोर्ट की सीमाएं POSH एक्ट के दायरे को तय कर रही हैं

POSH एक्ट | नियोक्ता द्वारा उपलब्ध न कराए गए ट्रांसपोर्ट में हुई छेड़छाड़ की शिकायत पर ICC सुनवाई नहीं कर सकती

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 24 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
ऑफिस के दायरे से बाहर: क्यों ट्रांसपोर्ट की सीमाएं POSH एक्ट के दायरे को तय कर रही हैं
ऑफिस के दायरे से बाहर: क्यों ट्रांसपोर्ट की सीमाएं POSH एक्ट के दायरे को तय कर रही हैं

हालिया न्यायिक व्याख्या ने स्पष्ट किया है कि कार्यस्थल की घटनाएं यदि यात्रा के दौरान होती हैं, तो आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का अधिकार क्षेत्र कहां तक सीमित है।

भारत के कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाली लाखों महिलाओं के लिए, ऑफिस आने-जाने का सफर अक्सर उनके काम के दिन का ही एक हिस्सा होता है। चाहे वह साझा कैब हो या कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई गई शटल, 'कार्यस्थल' (workplace) की सीमाएं लंबे समय से बहस का विषय रही हैं। POSH एक्ट—कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम—की व्याख्या में एक हालिया घटनाक्रम ने अब एक स्पष्ट रेखा खींच दी है: यदि घटना ऐसे ट्रांसपोर्ट में हुई है जो नियोक्ता द्वारा प्रदान नहीं किया गया है, तो आंतरिक शिकायत समिति (ICC) यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर सुनवाई नहीं कर सकती है।

यह घटनाक्रम इस बात पर प्रकाश डालता है कि हमारे हाई कोर्ट कानून के क्षेत्रीय दायरे की व्याख्या कैसे करते हैं। हालांकि POSH एक्ट को महिलाओं के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में बनाया गया था, लेकिन इसका अनुप्रयोग 'कार्यस्थल' की विशिष्ट परिभाषाओं से जुड़ा हुआ है। जब कोई घटना ऐसे वाहन में होती है जिसे कंपनी न तो प्रबंधित करती है, न ही उसकी मालिक है और न ही उसे आउटसोर्स किया है, तो ICC का अधिकार क्षेत्र प्रभावी रूप से समाप्त हो जाता है। इससे एक नियामक शून्य पैदा होता है, जो ऐसी शिकायतों को आंतरिक कॉर्पोरेट निवारण के बजाय सामान्य आपराधिक कानून के दायरे में धकेल देता है।

न्यायिक सीमा

मूल मुद्दा इस बात पर टिका है कि 'विस्तारित कार्यस्थल' (extended workplace) क्या है। कानूनी डाइजेस्ट और उद्योग विशेषज्ञों के लेख लंबे समय से इस कानून के कार्यान्वयन की चुनौतियों की ओर इशारा करते रहे हैं। यह स्पष्ट करके कि ICC का अधिकार असीमित नहीं है, न्यायपालिका कानून के अधिक सख्त और शाब्दिक अर्थ की ओर संकेत कर रही है। यदि नियोक्ता का परिवहन माध्यम पर कोई नियंत्रण नहीं है, तो घटना और 'कार्यस्थल' के बीच का संबंध इतना कमजोर माना जाता है कि आंतरिक समिति उसे नहीं संभाल सकती।

कर्मचारियों के लिए, इसका मतलब यह है कि नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए ट्रांसपोर्ट और निजी परिवहन के बीच का अंतर अब केवल लॉजिस्टिक्स का मामला नहीं है; यह एक कानूनी सीमा बन गया है। इस व्याख्या से कंपनियों को अपनी परिवहन नीतियों की समीक्षा करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, क्योंकि ICC की जवाबदेही नियोक्ता के परिचालन नियंत्रण तक ही सीमित है।

यह क्यों मायने रखता है: व्यापक परिप्रेक्ष्य

यह फैसला आंतरिक कॉर्पोरेट न्याय की पहुंच के लिए एक वास्तविकता की जांच (reality check) है। हालांकि POSH एक्ट सुरक्षित पेशेवर माहौल बनाने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है, लेकिन यह हर उस शिकायत के लिए समाधान नहीं है जो कर्मचारी के जीवन को प्रभावित करती है। इसका व्यापक निहितार्थ यह है कि यात्रा के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा—विशेष रूप से निजी या सार्वजनिक परिवहन में—एक ऐसी जिम्मेदारी है जो ऑफिस के आंतरिक अनुशासनात्मक ढांचे से बाहर आती है।

जैसे-जैसे हम भारतीय श्रम कानूनों के बदलते परिदृश्य को देखते हैं, यह हमें याद दिलाता है कि कार्यबल में महिलाओं की सुरक्षा के लिए दोहरे दृष्टिकोण की आवश्यकता है: ऑफिस या कंपनी द्वारा संचालित परिदृश्यों के लिए एक मजबूत ICC, और बाकी सभी मामलों के लिए एक मजबूत पुलिस और नागरिक तंत्र। इस स्पष्टता के बिना, कंपनियां अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर निकलने का जोखिम उठाती हैं, जबकि पीड़ित गलत मंच पर न्याय की तलाश में भटक सकते हैं और अंततः तकनीकी आधार पर उनकी शिकायतें खारिज हो सकती हैं।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।