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मतदान से परे: मल्लिकार्जुन खरगे की 38.76 करोड़ रुपये की संपत्ति का पूरा ब्योरा

राज्यसभा चुनाव: खरगे के पास 38.76 करोड़ रुपये की संपत्ति

द्वारा कबीर शर्माप्रकाशित 11 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
मतदान से परे: मल्लिकार्जुन खरगे की 38.76 करोड़ रुपये की संपत्ति का विश्लेषण
मतदान से परे: मल्लिकार्जुन खरगे की 38.76 करोड़ रुपये की संपत्ति का विश्लेषण

राज्यसभा नामांकन प्रक्रिया के बीच, कांग्रेस अध्यक्ष का नवीनतम हलफनामा उनके परिवार की वित्तीय स्थिति और कानूनी मामलों पर एक विस्तृत नज़र डालता है।

राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल करने के लिए विधान सौधा पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने न केवल अपनी उम्मीदवारी पेश की, बल्कि अपने वित्तीय जीवन का एक आईना भी पेश किया। आगामी चुनावों के लिए दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, इस दिग्गज नेता ने कुल 38.76 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है। भारत के शीर्ष राजनीतिक दिग्गजों की आर्थिक प्रोफाइल पर नज़र रखने वालों के लिए, यह खुलासा स्पष्ट करता है कि उनकी संपत्ति उनके परिवार और विभिन्न निवेशों में किस तरह बंटी हुई है।

यह हलफनामा, जो सार्वजनिक जांच के लिए प्राथमिक स्रोत के रूप में कार्य करता है, इन संपत्तियों को दो अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करता है: 11.37 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 27.39 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति। यदि आंकड़ों को गहराई से देखें, तो वितरण काफी विशिष्ट है। खरगे के नाम पर 6.60 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी राधा बाई के पास 4.41 करोड़ रुपये की संपत्ति है। इसके अलावा 36.09 लाख रुपये 'हिंदू अविभाजित परिवार' (HUF) श्रेणी के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं।

पोर्टफोलियो का स्वरूप

इस घोषणा का मुख्य हिस्सा अचल संपत्ति है। दंपति और HUF के पास कुल मिलाकर 27 करोड़ रुपये से अधिक की भूमि और संपत्ति है। इसमें कलबुर्गी में कृषि भूमि और बेंगलुरु में फैली विभिन्न संपत्तियां शामिल हैं। भूमि के अलावा, उनकी संपत्ति में लगभग 2.04 करोड़ रुपये के सोने के आभूषण और चांदी के बर्तन भी शामिल हैं।

हालांकि वित्तीय आंकड़े सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करते हैं, लेकिन यह फाइलिंग एक लंबे राजनीतिक करियर के साथ आने वाली कानूनी वास्तविकताओं पर भी प्रकाश डालती है। खरगे ने अपने खिलाफ पांच लंबित आपराधिक मामलों की घोषणा की है। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से चार FIR असम से संबंधित हैं, जो उनके द्वारा दिए गए उन भाषणों से जुड़ी हैं जिनमें उन पर वैमनस्य फैलाने का आरोप लगाया गया था। इन कानूनी चुनौतियों के साथ, हलफनामे में 10 लाख रुपये की व्यक्तिगत देनदारी का भी उल्लेख है।

यह क्यों मायने रखता है

भारतीय चुनावों के संदर्भ में, ये फाइलिंग केवल प्रशासनिक औपचारिकताएं नहीं हैं—ये लोकतांत्रिक पारदर्शिता की नींव हैं। पैतृक भूमि से लेकर गहनों तक सब कुछ दर्ज करके, उम्मीदवार जनता को समय के साथ अपनी संपत्ति के विकास को ट्रैक करने का मौका देते हैं। मल्लिकार्जुन खरगे जैसे नेता के लिए, जो दशकों से राष्ट्रीय राजनीति का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं, ये खुलासे उनके वित्तीय सफर का एक पैमाना प्रदान करते हैं।

यह मूल लेख और डेटा, जैसा कि हिंदुस्तान जैसे आउटलेट्स द्वारा रिपोर्ट किया गया है, वरिष्ठ राजनेताओं पर दोहरे दबाव को उजागर करता है: जटिल व्यक्तिगत पोर्टफोलियो को बनाए रखना और साथ ही ऐसे माहौल में आगे बढ़ना जहां राजनीतिक भाषणों की कानूनी प्रणाली द्वारा लगातार जांच की जा रही है। जैसे-जैसे चुनावी चक्र तेज होगा, ये हलफनामे भारत में व्यक्तिगत संपत्ति और राजनीतिक शक्ति के अंतर्संबंधों को समझने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति के लिए न्यूजव्रैप संदर्भ बने रहेंगे।

द्वारा कबीर शर्मा
फ़ीचर्स लेखक

कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।