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बेंजामिन नेतन्याहू का जेडी वेंस को करारा जवाब: 'अमेरिका ही नहीं, भारत भी है हमारा बड़ा दोस्त'

अमेरिका ही इकलौता दोस्त, जेडी वेंस की कमेंट पर भड़का इजरायल, नेतन्याहू ने भारत

By Ananya IyerPublished 6 July 2026· 2 min read
बेंजामिन नेतन्याहू का जेडी वेंस को करारा जवाब: 'अमेरिका ही नहीं, भारत भी है हमारा बड़ा दोस्त'
बेंजामिन नेतन्याहू का जेडी वेंस को करारा जवाब: 'अमेरिका ही नहीं, भारत भी है हमारा बड़ा दोस्त'

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की इस टिप्पणी को खारिज किया है कि तेल अवीव का वाशिंगटन के अलावा कोई और शक्तिशाली सहयोगी नहीं बचा है।

वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच ईरान के साथ हालिया समझौते को लेकर बढ़ती तनातनी अब सार्वजनिक हो गई है। हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायली कैबिनेट पर निशाना साधते हुए कहा था कि उन्हें दुनिया में अपने "इकलौते शक्तिशाली सहयोगी" (अमेरिका) से पंगा नहीं लेना चाहिए। वेंस ने यहां तक दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप ही इजरायल के एकमात्र ऐसे वैश्विक नेता हैं जो उनके साथ खड़े हैं।

नेतन्याहू का पलटवार: भारत का नाम लिया

फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में बेंजामिन नेतन्याहू ने वेंस की इस बात पर असहमति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ट्रंप का सम्मान करते हैं और उन्हें इजरायल का बड़ा मित्र मानते हैं, लेकिन वे वेंस के इस दावे को स्वीकार नहीं करते कि इजरायल पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुका है। नेतन्याहू ने भारत का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा, "हमारे पास भारत जैसा एक विशाल मित्र देश है। 140 करोड़ की आबादी वाला यह देश हमें जबरदस्त समर्थन देता है।"

कूटनीति बनाम सोशल मीडिया का शोर

नेतन्याहू ने इस बात पर भी जोर दिया कि कूटनीतिक रिश्ते अक्सर सतह पर दिखने वाले बयानों से कहीं गहरे होते हैं। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि कई ऐसे देश हैं जहां सोशल मीडिया पर इजरायल-विरोधी बातें करना एक 'फैशन' बन गया है, लेकिन बंद कमरों में वही नेता उनसे फोन पर समझौते करते हैं या अपनी सेना को इजरायली मॉडल पर प्रशिक्षित करने की मांग करते हैं। उनका इशारा इस ओर था कि वास्तविक रणनीतिक जरूरतें सार्वजनिक मंचों के शोर से काफी अलग होती हैं।

यह कूटनीतिक दरार क्यों मायने रखती है?

यह वाकया अमेरिका और इजरायल के बीच बदलते समीकरणों को दर्शाता है। जहां वेंस का लहजा एक 'संरक्षक' की तरह है, वहीं नेतन्याहू का जवाब यह संकेत देता है कि इजरायल अब खुद को केवल एक महाशक्ति पर निर्भर नहीं दिखाना चाहता। भारत का नाम लेना महज एक कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं है; यह इजरायल की उस विदेश नीति की झलक है जो पारंपरिक पश्चिमी धुरी से बाहर निकलकर नई वैश्विक साझेदारी तलाश रही है।

आने वाले समय में, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और लेबनान में संघर्ष को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच यह तकरार और बढ़ सकती है। वेंस और नेतन्याहू के बीच का यह संवाद यह बताता है कि भले ही इजरायल को पश्चिमी मंचों पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन वह अपनी 'दोस्त बनाने की क्षमता' को साबित करने के लिए भारत जैसे देशों के समर्थन को एक बड़ी ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहा है।

By Ananya Iyer
World Affairs Correspondent

Ananya Iyer covers global affairs with an Indian lens for PoliticalPedia.