
RBI का मार्केट पिवट: क्या महंगाई के दौर में बड़े निवेश उपाय रुपये को मजबूती दे पाएंगे?
महंगाई और धीमी विकास दर के बीच, RBI रुपये को बचाने के लिए नए बॉन्ड और निवेश उपायों के जरिए $75 अरब तक का निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।

महंगाई और धीमी विकास दर के बीच, RBI रुपये को बचाने के लिए नए बॉन्ड और निवेश उपायों के जरिए $75 अरब तक का निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रुपये को मजबूती देने के लिए NRI डिपॉजिट से जुड़े नए उपायों की घोषणा की है। साथ ही, केंद्रीय बैंक ने 4% के मुद्रास्फीति लक्ष्य को बरकरार रखा है और क्रिप्टो नीति पर भी नजरें टिकाई हैं।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने NRI डिपॉजिट को आकर्षित करने और रुपये को मजबूत करने के लिए नए उपायों की रूपरेखा तैयार की है, साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 4% के मुद्रास्फीति लक्ष्य को बरकरार रखा है।

कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक जोखिमों का हवाला देते हुए RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए विकास दर का अनुमान घटाकर 6.6% कर दिया है। MPC ने अपनी नीतिगत रुख को तटस्थ बनाए रखा है।

महंगाई के लक्ष्य के दायरे में रहने के कारण RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। जानिए केंद्रीय बैंक ने वैश्विक दबावों के बावजूद स्थिरता को क्यों चुना।

वैश्विक जोखिमों के बीच RBI MPC ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। वित्त वर्ष 2027 के लिए नवीनतम मौद्रिक नीति परिदृश्य, विकास अनुमान और महंगाई के रुझानों को समझें।
जानिए कि RBI रुपये के मूल्य में गिरावट को रोकने के बजाय उसे बाजार के भरोसे क्यों छोड़ रहा है और कैसे 'इम्पॉसिबल ट्राइलेमा' भारत की मौद्रिक नीति को प्रभावित कर रहा है।