बिज़नेस
प्रोडक्टिविटी का विरोधाभास: भारत का विकास इंजन सिर्फ एक सिलेंडर पर क्यों चल रहा है?
एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि प्रति कर्मचारी चीन और भारत की प्रोडक्टिविटी का अंतर 30,000 अमेरिकी डॉलर तक बढ़ गया है, जो मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।
द्वारा रोहन गुप्ता · परसों