पश्चिमी एशिया में युद्ध का खतरा: अमेरिका-ईरान सैन्य टकराव क्षेत्रीय संघर्ष में बदला
अमेरिका-ईरान के बीच जवाबी हमले तेज; कुवैत हवाई अड्डा अस्थायी रूप से बंद
ईरान के प्रमुख बुनियादी ढांचे और खाड़ी में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमलों के बाद, बढ़ता सैन्य टकराव क्षेत्र की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
फारस की खाड़ी में बनी नाजुक शांति अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ की सख्त चेतावनी के बाद, अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी ईरान में कई भारी मिसाइल हमले किए हैं। इन हमलों का मुख्य निशाना कशम द्वीप, बंदर अब्बास बंदरगाह और कंगन शहर के रणनीतिक ठिकाने थे। यह सीधा सैन्य टकराव पिछले संघर्षों से बिल्कुल अलग है, जिसने इस पूरे क्षेत्र को बड़े पैमाने पर सक्रिय युद्ध के मैदान में बदल दिया है।
तेहरान ने इसका तुरंत और बहुआयामी जवाब दिया है। जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरानी बलों ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोनों से निशाना बनाया। बहरीन के मनामा और हमद टाउन में हुए हमलों में एक 11 साल के बच्चे के घायल होने की पुष्टि हुई है। इन हमलों की गंभीरता के कारण कुवैत हवाई अड्डे को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, जिससे कोच्चि से आ रही दो उड़ानों सहित कई व्यावसायिक विमानों को सऊदी अरब की ओर मोड़ना पड़ा।
इस टकराव का समुद्री व्यापार पर भी गहरा असर पड़ा है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए बंद करने की घोषणा कर दी है और नाकेबंदी तोड़ने वाले किसी भी जहाज पर हमला करने की धमकी दी है। यह केवल एक क्षेत्रीय कूटनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक सीधी चुनौती है। ओमान के तट पर एक तेल टैंकर पर अमेरिकी हमले के बाद भारत सरकार ने तीन भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि की है। भारतीय चालक दल वाले एक अन्य जहाज, एमटी जलवीर पर भी हमले की खबर है।
यह महत्वपूर्ण क्यों है?
इस स्थिति की गंभीरता महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को सीधे निशाना बनाने में निहित है। राष्ट्रपति ट्रंप ने शांति समझौता न होने पर ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाने की धमकी दी है, वहीं ईरानी सेना ने भी किसी भी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया है। इससे संघर्ष के अनियंत्रित होने का खतरा चरम पर है। यह स्पष्ट है कि दोनों पक्ष अब छद्म युद्ध से आगे बढ़कर सीधे टकराव की स्थिति में आ गए हैं, जिससे नागरिक जीवन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग सीधे खतरे में पड़ गए हैं।
भारत के लिए यह स्थिति आर्थिक और मानवीय दोनों दृष्टिकोण से बेहद चिंताजनक है। समुद्र में हुई मौतों के अलावा, यह अस्थिरता तेल की कीमतों में उछाल ला सकती है और महत्वपूर्ण व्यापार गलियारे को बाधित कर सकती है। जैसे-जैसे कई सीमाओं पर सैन्य हमले जारी हैं, नई दिल्ली के लिए प्राथमिक चिंता अपने प्रवासियों की सुरक्षा और ऊर्जा आयात की सुरक्षा बनी हुई है। हालांकि क्षेत्र से मूल रिपोर्ट लगातार अपडेट की जा रही हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि पश्चिमी एशिया का भू-राजनीतिक ढांचा दशकों में पहली बार इतनी बड़ी परीक्षा से गुजर रहा है।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।