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वॉशिंग मशीन पॉलिटिक्स: AIADMK से आए नेताओं को लेकर DMK और TVK में छिड़ी जंग

किसके पास हैं ज्यादा पूर्व AIADMK नेता? 'वॉशिंग मशीन' वाली टिप्पणी पर DMK और TVK आमने-सामने

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 3 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
वॉशिंग मशीन पॉलिटिक्स: DMK और TVK में AIADMK नेताओं के दल-बदल पर घमासान
वॉशिंग मशीन पॉलिटिक्स: DMK और TVK में AIADMK नेताओं के दल-बदल पर घमासान

तमिलनाडु में बदलती राजनीतिक निष्ठाओं के बीच, पूर्व मंत्रियों को पार्टी में शामिल करने को लेकर एक नई जुबानी जंग छिड़ गई है, जिसने राज्य के पारंपरिक सत्ता ढांचे को हिलाकर रख दिया है।

तमिलनाडु सचिवालय के गलियारों में होने वाली धीमी चर्चाओं की जगह अब तीखी बयानबाजी ने ले ली है। जैसे-जैसे सत्ताधारी DMK और विपक्षी TVK (तमिलनाडु वेत्री कझगम) के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बढ़ रही है, राज्य का चुनावी नक्शा एक पुराने लेकिन विवादास्पद तरीके से फिर से तैयार हो रहा है: अनुभवी नेताओं का दल-बदल। ताजा विवाद का कारण? AIADMK के पूर्व दिग्गजों का पार्टी में शामिल होना, जिसने वैचारिक शुद्धता बनाम राजनीतिक सुविधा पर एक तीखी बहस छेड़ दी है।

तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब AIADMK के पूर्व मंत्री सी. विजयभास्कर और एम.आर. विजयभास्कर ने पाला बदलकर TVK का दामन थाम लिया। भ्रष्टाचार विरोधी और व्यवस्था में बदलाव के वादे के साथ चुनाव लड़ने वाली पार्टी के लिए, यह कदम DMK को हमला करने का मौका दे गया। DMK सांसद कनिमोझी ने मोर्चा संभालते हुए तंज कसते हुए 'वॉशिंग मशीन' शब्द का इस्तेमाल किया—यह एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल उत्तर भारतीय राजनीति में अक्सर यह बताने के लिए किया जाता है कि कैसे पार्टियां भ्रष्टाचार के मामलों का सामना कर रहे नेताओं को अपने पाले में लाकर उनके दाग धो देती हैं।

किसके पास हैं ज्यादा पूर्व AIADMK नेता?

DMK और TVK इस सवाल पर भिड़े हुए हैं, और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पाखंड का आरोप लगा रहे हैं। जहां DMK, TVK के इस कदम को गुटखा घोटाले और भूमि धोखाधड़ी जैसे मामलों में फंसे नेताओं के राजनीतिक पुनर्वास का क्लासिक उदाहरण बताती है, वहीं TVK ने भी पलटवार किया है। उनका बचाव सरल है: DMK का इतिहास भी अपनी संख्या बल बढ़ाने के लिए 'दागी' नेताओं को शामिल करने का रहा है।

TVK के लिए, ये भर्तियां सत्ता को मजबूत करने और संगठन को विस्तार देने के लिए जरूरी हैं। उनका तर्क है कि ध्यान व्यक्तिगत नेताओं के इतिहास के बजाय पार्टी के व्यापक शासन एजेंडे पर होना चाहिए। फिर भी, इसकी छवि खराब बनी हुई है। जनता यह सोच रही है कि क्या 'नया तमिलनाडु मॉडल' का वादा उस पुरानी राजनीतिक मशीनरी के बोझ तले दब रहा है, जिसे विजय ने कभी खत्म करने की कसम खाई थी।

बड़ी तस्वीर: यह क्यों मायने रखता है?

यह सिर्फ दो-तीन नेताओं को शामिल करने का मामला नहीं है; यह राज्य में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। पारंपरिक DMK बनाम AIADMK का मुकाबला अब धुंधला पड़ रहा है और उसकी जगह DMK और उभरती हुई TVK के बीच सीधा और कड़वा टकराव ले रहा है। AIADMK की रैंक से नेताओं को तोड़कर, TVK यह संकेत दे रही है कि वह विपक्ष के आधार को हथियाना चाहती है, जिससे मूल पार्टी हाशिए पर जा रही है।

मतदाताओं के लिए इसके गहरे निहितार्थ हैं। यदि 'वॉशिंग मशीन' की घटना तमिलनाडु की राजनीति का स्थायी हिस्सा बन जाती है, तो यह संकेत है कि राज्य की वैचारिक दीवारें कमजोर हो रही हैं। जैसे-जैसे दोनों पार्टियां अनुभवी, हालांकि विवादास्पद, AIADMK नेताओं के एक ही पूल को लुभा रही हैं, 'बदलाव लाने वाले' और 'यथास्थिति बनाए रखने वाले' के बीच का अंतर धुंधला होता जा रहा है। हम तमिलनाडु की राजनीतिक यात्रा के एक नए, अधिक आक्रामक चरण को देख रहे हैं, जहां संख्या के खेल में बने रहना अक्सर चुनावी वादों और सुधारवादी दावों पर भारी पड़ जाता है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।