तेज आंधी और धूल भरी हवाएं: उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदला
दिल्ली में थंडरस्टॉर्म का अलर्ट: उत्तर भारत में मौसम में आए बड़े बदलाव के बीच तेज हवाओं और बिजली गिरने की संभावना

एक शक्तिशाली वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) ने राष्ट्रीय राजधानी में तेज हवाओं और बारिश का दौर शुरू कर दिया है, जिससे सप्ताह के मध्य में पड़ रही भीषण गर्मी का अचानक अंत हो गया है।
कल कुछ ही मिनटों में दिल्ली का नजारा पूरी तरह बदल गया, जब धूल भरी आंधी ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा तक दर्ज की गई। बुधवार को लोग 50 डिग्री सेल्सियस जैसी महसूस होने वाली गर्मी से बेहाल थे, जिसके बाद भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का दिल्ली थंडरस्टॉर्म अलर्ट बिल्कुल सटीक साबित हुआ। शाम होते-होते तेज हवाओं और बिजली कड़कने की घटनाओं ने भीषण गर्मी से राहत तो दी, लेकिन मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने उत्तर भारत में परिवहन और विमानन सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है।
भूमध्य सागर से उठा सिस्टम
मौसम में यह उथल-पुथल एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस का परिणाम है—यह एक ऐसी मौसमी प्रणाली है जो भूमध्य सागर के ऊपर बनती है। जैसे-जैसे ये ऊंचाई वाली हवाएं दुनिया भर में यात्रा करती हैं, ये नमी सोख लेती हैं और हिमालय की ऊंची चोटियों से टकराने पर बारिश या बर्फबारी के रूप में बरसती हैं। हालांकि मैदानी इलाकों को भीषण गर्मी के महीनों में अक्सर इस नमी से फायदा मिलता है, लेकिन इस बार यह सिस्टम असामान्य रूप से तीव्र है, जिसने पूरे क्षेत्र में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करने पर मजबूर कर दिया है।
IMD का आज का पूर्वानुमान बेहद महत्वपूर्ण है। दिल्ली और आसपास के उपनगरों को गर्मी से राहत मिली है, लेकिन तूफान का दायरा काफी बड़ा है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की सूचना है, जबकि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में ओलावृष्टि का असर देखा जा रहा है। वहीं, आज के मौसम की स्थिति काफी अलग है; जहां उत्तर भारत धूल भरी आंधी से जूझ रहा है, वहीं पूर्वोत्तर में मानसून पूरे जोर पर है और असम, मेघालय तथा सिक्किम में भारी बारिश हो रही है।
बड़ी तस्वीर: यह क्यों मायने रखता है?
भीषण गर्मी और हिंसक तूफानों के बीच यह तेजी से होता बदलाव भारतीय गर्मियों की एक नई पहचान बनता जा रहा है। इन तूफानों की तीव्रता—जिसके कारण NCR में 400 से अधिक उड़ानें देरी से चलीं या डायवर्ट की गईं—यह बताती है कि अचानक आने वाली तीव्र जलवायु घटनाओं के प्रति हमारा शहरी बुनियादी ढांचा कितना संवेदनशील है। जब 42°C तक तापमान वाली गर्मी की जगह चक्रवाती गति जैसी हवाएं ले लेती हैं, तो शहर के पावर ग्रिड, परिवहन नेटवर्क और सार्वजनिक सुरक्षा प्रणालियों पर भारी दबाव पड़ता है।
ये घटनाएं अब अलग-थलग मामले नहीं बल्कि एक बदलते पैटर्न का हिस्सा हैं। इन तूफानों में मौजूद ऊर्जा, जो पेड़ों को उखाड़ने और हवाई यातायात को रोकने में सक्षम है, बेहतर शहरी लचीलेपन की आवश्यकता की याद दिलाती है। जैसे-जैसे मानसून आगे बढ़ेगा, नीति निर्माताओं और मौसम वैज्ञानिकों के लिए चुनौती स्थानीय स्तर पर पूर्वानुमान को बेहतर बनाने की होगी, ताकि नागरिक इन 'नाउ-कास्ट' घटनाओं के लिए तैयार रह सकें, जहां एक घंटे से भी कम समय में स्थिति भीषण गर्मी से खतरनाक आंधी में बदल जाती है। फिलहाल, IMD की सलाह स्पष्ट है: घर के अंदर रहें, बड़े पेड़ों के नीचे जाने से बचें और आसमान पर नजर रखें क्योंकि यह सिस्टम अभी मैदानी इलाकों से गुजर रहा है।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।