एवियन में मिले ट्रंप और मैक्रों, G7 का फोकस ईरान से हटकर यूक्रेन संकट की ओर
G7 शिखर सम्मेलन से पहले ट्रंप और मैक्रों ने दिए बयान
फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन में डोनाल्ड ट्रंप एक नाजुक ईरान शांति समझौते के बीच पहुंचे हैं, जिससे यूक्रेन में बढ़ते युद्ध को लेकर एक तनावपूर्ण कूटनीतिक मुकाबले की स्थिति बन गई है।
एवियन-लेस-बैन्स का खूबसूरत कस्बा अब एक उच्च-सुरक्षा वाले किले में तब्दील हो चुका है, लेकिन असली हलचल 'बेल एपोक होटल रॉयल' के अंदर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार को यहां पहुंचे। वे अपने 80वें जन्मदिन के विवादित जश्न के बाद और ईरान के साथ शत्रुता खत्म करने के एक प्रारंभिक समझौते के साथ आए हैं। हालांकि यह समझौता होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का वादा करता है, लेकिन माहौल अभी भी तनावपूर्ण है; मेजबान इमैनुएल मैक्रों के नेतृत्व में यूरोपीय सहयोगी इस समझौते के विवरण और ट्रंप के व्यवहार को लेकर आशंकित हैं।
बुधवार तक चलने वाले G7 शिखर सम्मेलन को अटलांटिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए, यह राजनीतिक लाभ का क्षण है। मध्य पूर्व में 15 सप्ताह से चल रहे संघर्ष को कम करने का रास्ता साफ करके, ट्रंप कूटनीतिक ध्यान को अपने अगले लक्ष्य यानी यूक्रेन युद्ध की ओर मोड़ना चाहते हैं। मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक से पहले मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में, ट्रंप ने संकेत दिया कि उन्होंने व्लादिमीर पुतिन और वोलोडिमिर जेलेंस्की दोनों से बात की है, और दावा किया कि दोनों नेता बातचीत के जरिए समाधान के लिए 'तैयार' हैं।
युद्ध की छाया और शांति का घर्षण
जहां ट्रंप आत्मविश्वास दिखा रहे हैं, वहीं यूक्रेन की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। जिस दिन G7 नेता इकट्ठा हुए, उसी दिन रूसी हवाई हमलों में कम से कम ग्यारह लोगों की जान चली गई और कीव में ऐतिहासिक 'डॉर्मीशन कैथेड्रल' को नुकसान पहुंचा। मैक्रों, जो एक एकीकृत रुख पर जोर दे रहे हैं, ने स्पष्ट कर दिया है कि यूरोपीय नेता चाहते हैं कि वाशिंगटन अपना सैन्य समर्थन जारी रखे और मॉस्को पर दबाव बढ़ाए। फ्रांसीसी राष्ट्रपति एक कूटनीतिक रस्सी पर चल रहे हैं—वे एक तरफ एकजुट मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ऐसी अमेरिकी सरकार के साथ तालमेल बिठा रहे हैं जिसने अक्सर पारंपरिक गठबंधनों की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं।
ईरान समझौता भी विवाद का विषय बना हुआ है। हालांकि मैक्रों ने घोषणा की है कि फ्रांस, यूके, इटली और नीदरलैंड होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए संसाधन तैनात करने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि समुद्री मार्ग के लिए टोल वसूलना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा। इस बीच, ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जब तक समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक जलडमरूमध्य की नाकेबंदी जारी रहेगी, जिससे ट्रंप द्वारा हासिल की गई 'स्थिरता' अस्थायी नजर आती है।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
यह शिखर सम्मेलन उस कूटनीतिक अलगाववाद से एक बड़ा बदलाव है जिसने पिछले कुछ महीनों को परिभाषित किया था। 'अमीरों का क्लब' अब केवल व्यापार पर चर्चा नहीं कर रहा है; यह एक ऐसी दुनिया को संभालने की कोशिश कर रहा है जहां सुरक्षा के पुराने नियम वास्तविक समय में फिर से लिखे जा रहे हैं। भारत और अन्य पर्यवेक्षकों के लिए, यहां का परिणाम काफी मायने रखता है—न केवल इसलिए कि वैश्विक तेल की कीमतें होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी हैं, बल्कि इसलिए भी कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को प्रभावित करने की G7 की क्षमता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि क्या ट्रंप और उनके यूरोपीय समकक्ष अपनी व्यक्तिगत नाराजगी को एक एकीकृत नीति के पीछे छिपा सकते हैं।
पैटर्न स्पष्ट है: ट्रंप पारंपरिक बहुपक्षीय सहमति को दरकिनार करने के लिए द्विपक्षीय सफलताओं का उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि वह मध्य पूर्व में शांति की शर्तें तय कर सकते हैं, तो वह यूक्रेन में भी ऐसा ही करने की कोशिश करेंगे। हालांकि, मंगलवार को जेलेंस्की के आने और यूरोपीय गुट द्वारा क्रेमलिन के खिलाफ अधिक आक्रामक कार्रवाई की मांग करने के कारण, ट्रंप जिस 'शांति' का दावा कर रहे हैं, उसे हासिल करना व्हाइट हाउस की किसी घोषणा से कहीं अधिक कठिन हो सकता है।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।