TMC में बड़ी टूट: ऋतब्रत बनर्जी ने 64 विधायकों के समर्थन का किया दावा, तेज हुआ विद्रोह
TMC में बगावत और गहरी! ऋतब्रत बनर्जी का 64 MLA का दावा, बोले- न BJP में जाएंगे, न कांग्रेस में विलय होगा
तृणमूल कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह और गहरी हो गई है। बागी गुट ने बहुमत का दावा किया है और अन्य राजनीतिक दलों के साथ विलय की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है।
पश्चिम बंगाल का राजनीतिक परिदृश्य एक बड़े उथल-पुथल से गुजर रहा है, क्योंकि TMC के भीतर विद्रोह अपने चरम पर है। बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी, जिन्हें अब विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त है, ने 64 विधायकों के समर्थन का दावा करके हलचल बढ़ा दी है। 3 जून को पार्टी से निष्कासन के बाद, विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने उन्हें आधिकारिक तौर पर विपक्ष का नेता स्वीकार किया था, उस समय उनके साथ 58 विधायक थे।
एक नई राजनीतिक पहचान की ओर
बनर्जी अपने गुट की दिशा को लेकर स्पष्ट हैं। कोलकाता में मीडिया को संबोधित करते हुए, उन्होंने कांग्रेस के साथ संभावित विलय या भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के साथ गठबंधन की अटकलों पर विराम लगा दिया। उन्होंने जोर देकर कहा, "हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं," और स्पष्ट किया कि उनका समूह राज्य के हितों के लिए एक अलग राजनीतिक पहचान बनाएगा। यह दावा करते हुए कि विधायी दल के दो-तिहाई से अधिक सदस्य अब उनके साथ हैं—और यह भी कि इस संख्या में सांसद, जिला परिषद सदस्य और पंचायत प्रतिनिधि शामिल नहीं हैं—वे इसे केवल एक अस्थायी विरोध नहीं, बल्कि एक बड़े संगठनात्मक विभाजन के रूप में देख रहे हैं।
इस असंतोष की जड़ पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व, विशेष रूप से राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली के प्रति गहरी नाराजगी है। जिस पार्टी ने लंबे समय से केंद्रीकृत नियंत्रण पर गर्व किया है, उसके लिए 64 विधायकों के अलग गुट का उभरना पार्टी के अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: राष्ट्रीय राजनीति पर असर
बंगाल में यह आंतरिक हलचल राष्ट्रीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आई है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक और नए परिसीमन प्रयासों को आगे बढ़ा सकती है, ऐसे में क्षेत्रीय दलों की स्थिरता संसद में एक महत्वपूर्ण कारक बन जाती है। अपनी ही विधायी टूट से जूझ रही कमजोर TMC की लोकसभा में सौदेबाजी की ताकत निश्चित रूप से कम होगी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक किसी भी संभावित क्रॉस-पार्टी गठबंधन पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन तनाव का मुख्य केंद्र 'असली' TMC के लेबल की लड़ाई है।
क्या यह कदम पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर कानूनी लड़ाई में बदलेगा या विपक्षी ताकतों के पुनर्गठन को मजबूर करेगा, यह देखना बाकी है। फिलहाल, सारा ध्यान विधानसभा पर है, जहां बागी गुट औपचारिक रूप से अध्यक्ष को अपनी संख्या सौंपने की योजना बना रहा है। जैसे-जैसे स्थिति विकसित होगी, इस असंतोष का असर पश्चिम बंगाल विधानसभा से बाहर भी महसूस किया जाएगा, जो आगामी विधायी सत्रों के समीकरणों को बदल सकता है।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।