भीतरघात का संकट: शिवसेना (UBT) ने छह अनुपस्थित सांसदों को अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया शुरू की
संजय राउत की चेतावनी: 'हम उनकी सदस्यता रद्द करने के लिए कदम उठाएंगे'
नई दिल्ली में सत्ता का एक बड़ा संघर्ष देखने को मिल रहा है, जहाँ ठाकरे गुट ने छह बागी सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनकी सदस्यता खत्म करने की चेतावनी दी है।
नई दिल्ली के सत्ता के गलियारों में संभावित टूट की चर्चाएं तेज हैं। गुरुवार को शिवसेना (UBT) नेतृत्व ने आखिरकार कड़ा रुख अपनाते हुए अपने छह लोकसभा सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी, जिन्होंने पार्टी की एक महत्वपूर्ण संसदीय बैठक से दूरी बनाए रखी। पार्टी खेमे में माहौल तनावपूर्ण है; पार्टी ने आधिकारिक तौर पर बागी सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह संकेत दे दिया है कि अब आंतरिक सहनशीलता का दौर खत्म हो चुका है।
पार्टी के फायरब्रांड रणनीतिकार संजय राउत ने कोई अस्पष्टता नहीं छोड़ी है। मीडिया से बात करते हुए, राउत ने चेतावनी दी कि पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने के लिए उनकी सदस्यता को अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आगामी विधायी सत्रों पर पार्टी का रुख तय करने के लिए बुलाई गई बैठक से अनुपस्थित रहकर, इन सदस्यों ने अपनी निष्ठा बदलने का संकेत दे दिया है, जिससे UBT गुट अब स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है।
सोची-समझी बगावत
शिवसेना (UBT) के लिए, यह केवल उपस्थिति का मामला नहीं है; यह सीधे तौर पर पार्टी की कमान को चुनौती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि दिल्ली की बैठक से नदारद रहना औपचारिक विभाजन की दिशा में एक कदम है। संसदीय व्यवस्था में 'पार्टी व्हिप' सबसे शक्तिशाली हथियार होता है, और इसे नजरअंदाज करके इन छह सांसदों ने नेतृत्व को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू करने का कानूनी आधार दे दिया है।
क्या यह कदम बागियों को वापस पार्टी में ला पाएगा या उनके जाने की प्रक्रिया को और तेज कर देगा, यह बड़ा सवाल है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह शक्ति परीक्षण का एक सोची-समझा प्रयास है। यदि ये छह सांसद वास्तव में पार्टी छोड़ने की योजना बना रहे हैं, तो वे संभवतः यह मानकर चल रहे हैं कि UBT गुट के पास इस नए पलायन को झेलने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
यह टकराव महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे बिखराव का एक महत्वपूर्ण मोड़ है। शिवसेना में शुरुआती विभाजन के बाद से ही, ठाकरे गुट अपने कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। अयोग्यता की कार्यवाही अक्सर जटिल होती है; ये कानूनी गलियारों और संसदीय समितियों में महीनों तक खिंच सकती हैं, जिससे अनिश्चितता का माहौल बना रहता है।
यदि UBT नेतृत्व इन छह सदस्यों को अयोग्य ठहराने में सफल रहता है, तो यह बाकी बचे सदस्यों को स्थिर कर सकता है, लेकिन इससे उन अन्य नेताओं के दूर होने का भी खतरा है जो अभी तटस्थ हैं और सत्ता के समीकरणों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। यह धैर्य की एक क्लासिक लड़ाई है। पार्टी अपने विधायी प्रभाव को पूरी तरह खत्म होने से बचाने के लिए सख्त अनुशासन का संदेश देने की कोशिश कर रही है, लेकिन ऐसा करने में वह एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई को न्योता दे रही है, जो आगामी विधानसभा चुनावों में उसकी मोलभाव करने की क्षमता को कमजोर कर सकती है।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।