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सुरक्षा में बदलाव: लालू यादव और राबड़ी देवी को फिर मिली 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा

लालू और राबड़ी को जेड श्रेणी की सुरक्षा, 22 जवानों के साथ बुलेटप्रूफ कार; गृह मंत्रालय के लेटर का इंतजार

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 4 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
सुरक्षा में बदलाव: लालू यादव और राबड़ी देवी को मिली 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा
सुरक्षा में बदलाव: लालू यादव और राबड़ी देवी को मिली 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा

20 साल पुराने आवास को खाली करने की चर्चाओं के बीच, बिहार सरकार ने राजद सुप्रीमो और उनकी पत्नी की सुरक्षा बहाल कर दी है।

पटना के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों नई हलचल है। कई हफ्तों के तनाव और हाई-प्रोफाइल बेदखली के बाद, बिहार सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों लालू यादव और राबड़ी देवी के लिए 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा बहाल करने का फैसला किया है। यह कदम एक भावनात्मक सप्ताह के ठीक बाद आया है, जिसमें इस दंपति ने आखिरकार 10, सर्कुलर रोड स्थित उस बंगले की चाबियां राज्य के भवन निर्माण विभाग को सौंप दीं, जहां वे दो दशकों से रह रहे थे।

सूत्रों के अनुसार, नई सुरक्षा व्यवस्था में 22 सुरक्षाकर्मी शामिल होंगे, जिसमें चार से पांच नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) कमांडो और एक समर्पित बुलेटप्रूफ वाहन होगा। हालांकि इस फैसले को प्रशासनिक पुनर्गठन के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन यह एक महीने से चल रहे राजनीतिक तनाव के बाद आया है। जून की शुरुआत में, प्रशासन ने उनकी सुरक्षा को 'जेड+' से घटाकर एसएसजी (स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप) कर दिया था, जिसके विरोध में दंपति ने अपनी सुरक्षा टीम लौटा दी थी। इसके बाद राजद कार्यकर्ताओं ने भारी विरोध प्रदर्शन किया और सर्कुलर रोड स्थित आवास के बाहर चौबीसों घंटे पहरा दिया।

सुरक्षा की राजनीति

इस फैसले के निहितार्थ सुरक्षा से कहीं अधिक गहरे हैं। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का यह कदम भारी दबाव और सार्वजनिक बयानबाजी के बाद उठाया गया है। जब सुरक्षा में कटौती की गई थी, तो राजद ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया था। वहीं, भाजपा और जदयू का तर्क था कि यह केवल एक मानक सुरक्षा ऑडिट का परिणाम था।

स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब लालू यादव को बिना सुरक्षा के सार्वजनिक रूप से देखा गया, जिसे भाजपा ने यह तर्क देने के लिए इस्तेमाल किया कि उनका खतरा कम हो गया है। राजद के लिए, यह मुद्दा कभी सिर्फ सुरक्षाकर्मियों का नहीं था; यह उनके नेताओं के कद और लंबे समय से रहे आधिकारिक आवास से हटाए जाने के अपमान से जुड़ा था।

यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर

यह खींचतान सिर्फ पुलिस सुरक्षा के बारे में नहीं है; यह बिहार में राजनीतिक शिष्टाचार का पैमाना है। 'जेड' श्रेणी की बहाली एक रणनीतिक कदम है, जो ऐसे माहौल में तनाव कम करने का काम करेगी जहां हर प्रशासनिक फैसले को सत्ता के समीकरणों से देखा जाता है। इस स्तर की सुरक्षा बहाल करके, सरकार बेदखली विवाद के एक कठिन अध्याय को बंद कर रही है, जबकि राजद नेतृत्व 39 हार्डिंग रोड स्थित अपने नए और छोटे आवास में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहा है।

हालांकि, शुक्रवार देर रात तक राजनीतिक फैसले और आधिकारिक कागजी कार्रवाई के बीच एक स्पष्ट अंतर बना हुआ था। जहां 'जेड' श्रेणी की बहाली की खबर स्थानीय चर्चाओं में छाई रही, वहीं गृह मंत्रालय से आधिकारिक अधिसूचना का अभी भी इंतजार है। लालू-राबड़ी परिवार ने स्पष्ट किया है कि उन्हें बदलाव के संबंध में अभी तक कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है, जो सरकार के सुलह वाले रुख के बावजूद बनी हुई असहज स्थिति को दर्शाता है।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।