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FIFA वर्ल्ड कप: फुटबॉलर्स अपनी मोजों (socks) को क्यों काटते हैं? जानिए इसके पीछे का विज्ञान

FIFA वर्ल्ड कप 2026: फुटबॉलर्स के मोजे काटने के पीछे का वैज्ञानिक कारण

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 7 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
FIFA वर्ल्ड कप में फुटबॉलर्स के मोजे काटने के पीछे का विज्ञान
FIFA वर्ल्ड कप में फुटबॉलर्स के मोजे काटने के पीछे का विज्ञान

जुड बेलिंगम से लेकर लेरॉय साने तक, कई फुटबॉल सितारे अपनी किट पर कैंची चला रहे हैं। लेकिन यह कोई फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि बेहतर प्रदर्शन के लिए उठाया गया एक सोची-समझी कदम है।

अगर आप FIFA वर्ल्ड कप देख रहे हैं, तो आपने एक अजीब सी चीज़ जरूर गौर की होगी: दुनिया के कई बेहतरीन खिलाड़ी मैदान पर ऐसे मोजे पहनकर उतर रहे हैं, जिनके पिछले हिस्से में छेद बने हुए हैं। यह भले ही मोजों के फटने जैसा लगे, लेकिन यह प्रोफेशनल फुटबॉल में तेजी से बढ़ता एक ट्रेंड है। यह फैशन नहीं, बल्कि उच्च तीव्रता वाले मैचों में खेलने वाले एथलीटों के लिए एक खास शारीरिक जरूरत है।

कंप्रेशन और आराम का विज्ञान

इस ट्रेंड के पीछे का मुख्य कारण 'प्रेशर मैनेजमेंट' है। प्रोफेशनल फुटबॉल मोजे काफी टाइट होते हैं ताकि मांसपेशियों को सपोर्ट मिल सके। हालांकि, जिन खिलाड़ियों की पिंडली (calves) काफी मस्कुलर होती है, उनके लिए यह कसावट परेशानी का सबब बन सकती है। इससे 90 मिनट के मैच के दौरान ब्लड सर्कुलेशन में बाधा आ सकती है। मोजों के पिछले हिस्से में छेद करने से खिलाड़ी इस दबाव को कम कर पाते हैं, जिससे मांसपेशियों की थकान और ऐंठन (cramping) का खतरा कम हो जाता है।

सर्कुलेशन के अलावा, इसका दूसरा फायदा 'ट्रैक्शन' यानी पकड़ से जुड़ा है। आजकल कई प्रोफेशनल खिलाड़ी अपनी टीम की आधिकारिक मोजों के नीचे 'ग्रिप सॉक्स' पहनते हैं। इन ग्रिप सॉक्स में रबर पैड्स या नॉन-स्लिप तकनीक होती है, जो पैर को जूते के अंदर स्थिर रखती है, जिससे छाले पड़ने और पैर फिसलने का डर नहीं रहता। मोजों में बने छेद त्वचा, ग्रिप लेयर और जूते के बीच बेहतर तालमेल बिठाते हैं, जिससे खिलाड़ी हर दिशा में सटीक मूवमेंट कर पाते हैं।

आधुनिक खेल का बढ़ता ट्रेंड

यह चलन अब ड्रेसिंग रूम के गुप्त नुस्खे से निकलकर एक वैश्विक मानक बन चुका है। हम इसे कई लीग और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्पोर्ट्स में 'मार्जिनल गेन्स' (छोटी-छोटी सुधारों) की अगली कड़ी है। यह इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि खिलाड़ी दिखावे से ज्यादा काम को महत्व देते हैं। जब आप टूर्नामेंट के बीच में मैदान पर दौड़ रहे होते हैं, तो शारीरिक परेशानी में थोड़ी सी कमी भी गेंद तक पहुँचने या उसे चूकने के बीच का अंतर पैदा कर सकती है।

बड़ी तस्वीर

खेल जगत के लिए यह क्यों मायने रखता है? यह दर्शाता है कि परफॉरमेंस टेक्नोलॉजी अब केवल जूतों या किट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत कस्टमाइजेशन की ओर एक बदलाव है। खिलाड़ी अपनी शारीरिक बनावट के अनुसार अपने उपकरणों को ढाल रहे हैं। जैसे-जैसे ट्रैकिंग डेटा और आधुनिक हो रहा है, हम ऐसे और भी 'हैक' देखेंगे—जैसे साइकिलिंग में आइस वेस्ट या महिला फुटबॉल में विशेष कॉलर—क्योंकि टीमें हर संभव वैज्ञानिक लाभ उठाकर अपने सितारों को चोट से बचाना और मैदान पर बनाए रखना चाहती हैं।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।