Politicalpedia
राष्ट्रीय

केतन अग्रवाल और सिया गोयल को लोहागढ़ किला ले जाने वाली लाल इलेक्ट्रिक कार अब बनी अहम सुराग

केतन अग्रवाल और सिया गोयल को लोहागढ़ किला ले जाने वाली लाल इलेक्ट्रिक कार अब बनी अहम सुराग | वीडियो

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 27 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
केतन अग्रवाल और सिया गोयल को लोहागढ़ किला ले जाने वाली लाल इलेक्ट्रिक कार अब बनी अहम सुराग
केतन अग्रवाल और सिया गोयल को लोहागढ़ किला ले जाने वाली लाल इलेक्ट्रिक कार अब बनी अहम सुराग

जैसे-जैसे पुणे पुलिस रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल के आखिरी घंटों की कड़ियों को जोड़ रही है, इस घातक यात्रा में इस्तेमाल की गई गाड़ी सोची-समझी साजिश के मामले में सबूत का केंद्र बन गई है।

वह शानदार लाल इलेक्ट्रिक कार, जिसमें केतन अग्रवाल और सिया गोयल लोहागढ़ किला गए थे, अब पुणे को दहला देने वाली हत्या की जांच में एक अहम सुराग बन गई है। जांचकर्ताओं के लिए, यह वाहन केवल परिवहन का साधन नहीं है; यह 25 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी के जीवन के अंतिम और खौफनाक पलों का गवाह है। 18 जून की घटना से कुछ दिन पहले, सोशल मीडिया पर इस जोड़े की तस्वीरें छाई हुई थीं, जिसमें एक वीडियो में वे कार की सनरूफ खोलकर घूमते दिख रहे थे—जो एक खुशहाल और जल्द शादी करने वाले जोड़े की तस्वीर लग रही थी। अब, पुलिस उन्हीं डिजिटल फुटप्रिंट्स की बारीकी से जांच कर रही है ताकि आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

एक पूर्व नियोजित साजिश

जांच तेजी से आगे बढ़ी है, जिसमें धोखे का एक ऐसा जाल सामने आया है जो कथित तौर पर सिया गोयल और उसके 22 वर्षीय साथी चेतन चौधरी को जोड़ता है। पुलिस रिपोर्ट बताती है कि यह हत्या अचानक हुई कोई घटना नहीं थी। डिजिटल फॉरेंसिक ने सबूतों का एक चौंकाने वाला सिलसिला उजागर किया है: 238 घंटों के दौरान 2,004 फोन कॉल और स्थानीय कैफे में हुई मुलाकातें, जहां कथित तौर पर दोनों ने अग्रवाल को ऐतिहासिक किले की ऊंचाई से धक्का देने की योजना को अंतिम रूप दिया था।

जांचकर्ताओं के अनुसार, जो एक सामान्य ट्रेक के रूप में शुरू हुआ था, वह तब घातक हो गया जब आरोपियों ने मौके पर अग्रवाल की जान लेने के कई प्रयास किए। मामला तब और गंभीर हो गया जब पुलिस को पता चला कि गोयल ने कथित तौर पर अग्रवाल का पासपोर्ट चुरा लिया था ताकि उनकी बाली की नियोजित यात्रा को बाधित किया जा सके, जो इस अपराध की पूर्व तैयारी में एक ठंडे दिमाग की साजिश को दर्शाता है।

कानूनी गति और राजनीतिक निगरानी

इस मामले की क्रूरता ने त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई को प्रेरित किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र सरकार ने समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन को मंजूरी दी है। राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाने के लिए, वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) नियुक्त किया गया है।

पूछताछ जारी है और अब ध्यान आरोपियों के परिवारों पर केंद्रित है। गोयल के माता-पिता को हाल ही में लोनावाला ग्रामीण पुलिस स्टेशन बुलाया गया था और उसके भाई साहिल से भी पूछताछ की गई है। जैसे-जैसे पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या परिवार को गोयल और चौधरी के गुप्त संबंधों के बारे में जानकारी थी, उनके डिजिटल इतिहास की जांच नए और ठोस विवरण प्रदान कर रही है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है

यह मामला हाई-प्रोफाइल आपराधिक जांच में एक चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करता है, जहां डिजिटल सबूत—कार जीपीएस लॉग, कॉल मेटाडेटा और सोशल मीडिया आर्काइव—अभियोजन का मुख्य आधार बन गए हैं। पारंपरिक जांच के विपरीत, 'लाल इलेक्ट्रिक कार' और '2,004 कॉल' पर निर्भरता यह रेखांकित करती है कि आधुनिक रिश्ते और उसके बाद होने वाले अपराध हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपकरणों से किस तरह गहराई से जुड़े हैं। कानूनी प्रणाली के लिए चुनौती यह है कि डेटा के इस विशाल भंडार को एक ऐसी कहानी में कैसे पिरोया जाए जो फास्ट-ट्रैक कोर्ट की जांच में टिक सके, जो भारत की न्यायपालिका में तकनीक-आधारित सबूतों को पेश करने के लिए एक मिसाल कायम करेगा।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।