पहाड़ी मंदिर में हादसा: बंदरों से बचने के चक्कर में नवविवाहिता की गिरकर मौत
तमिलनाडु के पहाड़ी मंदिर में बंदरों से डरकर नीचे गिरी नवविवाहिता, मौत से इलाके में मातम

थूथुकुडी के एक पवित्र मंदिर में दर्शन के लिए गए एक युवा जोड़े के लिए यह आध्यात्मिक यात्रा एक बुरे सपने में बदल गई, जब जंगली जानवरों के साथ हुई एक घटना जानलेवा साबित हुई।
तमिलनाडु के कझुगुमलाई स्थित कलगुसलामुर्थी मंदिर अपनी प्राचीन पवित्रता और पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के कारण शांति का प्रतीक माना जाता है। 24 वर्षीय अनीता के लिए यह अपने पति सुरेश के साथ प्रार्थना का एक शांत पल था। एक महीने पहले ही शादी के बंधन में बंधा यह जोड़ा, सुरेश के विदेश से लौटने के बाद आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर पहुंचा था। लेकिन, उनकी यह शांति पल भर में बिखर गई।
जानलेवा घटना
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह जोड़ा प्रार्थना करने के लिए पहाड़ी की चोटी पर स्थित उचिपिल्लैयार मंदिर गया था। पुलिस के मुताबिक, हादसा तब हुआ जब दोनों मंदिर के पास बंदरों के एक झुंड को फल खिला रहे थे। तभी स्थिति अचानक बिगड़ गई और बंदरों ने उन्हें घेर लिया।
बंदरों के अचानक आक्रामक होने से अनीता घबरा गई। उनसे बचने की कोशिश में उसका पैर फिसल गया और वह पहाड़ी के किनारे से नीचे गिर गई। गिरने से उसे गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
सदमे में स्थानीय समुदाय
इस हादसे ने स्थानीय समुदाय और पीड़िता के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। घटना स्थल के वीडियो में सुरेश अपनी पत्नी के शव के पास बेहाल नजर आया। कझुगुमलाई के अग्निशमन और बचाव दल ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर पहाड़ी से शव को निकालने के लिए एक कठिन अभियान चलाया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हालांकि जांच अभी जारी है, लेकिन अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बंदरों के अचानक आक्रामक व्यवहार के कारण मची अफरा-तफरी ही इस दुखद हादसे का मुख्य कारण बनी।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
यह घटना भारत के लोकप्रिय धार्मिक स्थलों पर इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को उजागर करती है। हालांकि कई मंदिरों में बंदरों को खाना खिलाना एक आम परंपरा है, लेकिन इससे जानवरों का व्यवहार बदल जाता है और वे अधिक निडर व आक्रामक हो जाते हैं।
जब संकरे, बिना रेलिंग वाले या खड़े पहाड़ी रास्तों पर ऐसी अनिश्चित वन्यजीव गतिविधियां होती हैं, तो दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अब इन धार्मिक स्थलों के प्रशासन के सामने पारंपरिक मान्यताओं और भीड़ प्रबंधन के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती है, ताकि ऐसी जगहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा सकें जहां इंसान और जानवर एक ही स्थान पर मौजूद रहते हैं।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।