नंबर 3 की उलझन: भारत बनाम अफगानिस्तान ओपनर में यशस्वी जायसवाल की जगह ईशान किशन को लेकर आकाश चोपड़ा का बड़ा बयान
पहले वनडे में विराट कोहली की जगह कौन? आकाश चोपड़ा ने इस खिलाड़ी को बताया 'भगवान का पसंदीदा बच्चा'
विराट कोहली के पहले वनडे से बाहर होने के बाद उनकी जगह लेने वाले खिलाड़ी को लेकर बहस तेज हो गई है। पूर्व ओपनर आकाश चोपड़ा ने यशस्वी जायसवाल के बजाय ईशान किशन के हालिया फॉर्म पर भरोसा जताया है।
अफगानिस्तान के खिलाफ पहले वनडे में विराट कोहली की अनुपस्थिति ने भारत के टॉप ऑर्डर में एक खाली जगह छोड़ दी है, जिससे टीम के संयोजन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। जहां शुरुआती उम्मीद यह थी कि प्रतिभाशाली यशस्वी जायसवाल नंबर तीन पर बल्लेबाजी करेंगे, वहीं पूर्व भारतीय ओपनर आकाश चोपड़ा ने इस चर्चा को एक नया मोड़ दे दिया है। अपने हालिया विश्लेषण में, चोपड़ा ने ईशान किशन का समर्थन करते हुए इस विकेटकीपर-बल्लेबाज को 'भगवान का पसंदीदा बच्चा' करार दिया है।
एक शानदार वापसी
चोपड़ा का समर्थन सिर्फ मौजूदा फॉर्म के बारे में नहीं है; यह उस नाटकीय करियर ग्राफ को दर्शाता है जिसमें किशन ने भारी अनिश्चितताओं का सामना किया है। केवल छह महीने पहले, इस बाएं हाथ के बल्लेबाज को बीसीसीआई के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर कर दिया गया था और राष्ट्रीय टीम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए जा रहे थे। हालांकि, घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन—जिसमें झारखंड को ऐतिहासिक सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जिताना शामिल है—ने चयनकर्ताओं को उनकी स्थिति पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया।
उनकी वापसी का रास्ता घरेलू निरंतरता और उनके साथियों के बदलते भाग्य से तैयार हुआ। टी20 वर्ल्ड कप के लिए उनका चयन और आईपीएल 2026 के दौरान उनके प्रदर्शन ने उनकी जगह पक्की कर दी, जिससे ऋषभ पंत की खराब फॉर्म से पैदा हुए खालीपन को भरने में मदद मिली। 42.40 के वनडे करियर औसत और 102.19 के शानदार स्ट्राइक रेट के साथ, उनके चयन के पीछे मजबूत सांख्यिकीय आधार है, जिसमें बांग्लादेश के खिलाफ उनकी ऐतिहासिक दोहरी शतकीय पारी भी शामिल है।
यह क्यों मायने रखता है: गहराई की परीक्षा
व्यक्तिगत चयन से परे, यह बहस भारतीय प्रबंधन के सामने मौजूद 'प्रचुरता की समस्या' को उजागर करती है। ऐसे फॉर्मेट में जहां टॉप ऑर्डर में स्थिरता सर्वोपरि है, किशन जैसा खिलाड़ी—जो पारी को संभाल भी सकता है और तेजी से रन भी बना सकता है—मिडल ऑर्डर के ढहने से बचने के लिए एक रणनीतिक कदम है। हालांकि जायसवाल एक विस्फोटक विकल्प बने हुए हैं, लेकिन टीम प्रबंधन स्पष्ट रूप से किशन के हालिया अनुभव और मौके का फायदा उठाने की उनकी क्षमता को तवज्जो दे रहा है।
बड़ी तस्वीर
यह चयन की दुविधा राष्ट्रीय टीम के लिए एक बड़ी और बार-बार आने वाली चुनौती का हिस्सा है। जैसा कि हालिया ऑस्ट्रेलिया सीरीज में देखा गया, जहां कोहली मिचेल स्टार्क की सटीक गेंदों के खिलाफ संघर्ष करते दिखे, टॉप ऑर्डर पर तकनीकी अनुकूलन दिखाने का दबाव है। किशन जैसे फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी को चुनकर, टीम केवल स्थापित नामों पर निर्भर रहने के बजाय मौजूदा मैच-रेडीनेस को प्राथमिकता दे रही है। क्या यह साहसी प्लेइंग इलेवन—जिसमें नितीश कुमार रेड्डी और वाशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ी शामिल हैं—मैदान पर उतरेगी, यह भारत बनाम अफगानिस्तान सीरीज पर नजर रखने वाले प्रशंसकों के लिए सबसे बड़ा सवाल है।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।