2027 तक का लंबा सफर: धर्मशाला से क्यों शुरू हो रहा है भारतीय वनडे क्रिकेट का नया युग
अफगानिस्तान के खिलाफ पहली वनडे सीरीज के साथ भारत ने शुरू की 2027 वर्ल्ड कप की तैयारी, रोहित और रेड्डी पर रहेंगी नजरें
जैसे ही 'मेन इन ब्लू' अफगानिस्तान के खिलाफ अपनी पहली वनडे सीरीज का आगाज कर रहे हैं, सारा ध्यान नई प्रतिभाओं को निखारने और अगले वर्ल्ड कप के लिए दिग्गजों को परखने पर केंद्रित हो गया है।
धर्मशाला की ठंडी और पहाड़ी हवाएं हमेशा से ही हाई-प्रोफाइल क्रिकेट की गवाह रही हैं, लेकिन इस शनिवार यह मैदान सिर्फ एक मैच से कहीं बढ़कर कुछ और देख रहा है। जैसे ही भारत अफगानिस्तान के खिलाफ अपनी पहली वनडे सीरीज शुरू कर रहा है, ड्रेसिंग रूम में चर्चा अब केवल तात्कालिक नतीजों से आगे बढ़ चुकी है। दक्षिण अफ्रीका में होने वाले 2027 वर्ल्ड कप तक लगभग 25 वनडे मैच खेले जाने हैं, ऐसे में टीम प्रबंधन इस सीरीज को तीन साल तक चलने वाली एक बड़ी बदलाव प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देख रहा है।
रोहित शर्मा की मैच फिटनेस लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। आईपीएल के दौरान हैमस्ट्रिंग की समस्या से जूझने के बाद 39 वर्षीय कप्तान की वापसी तो हुई है, लेकिन उम्र का असर एक बड़ी चुनौती है। हालांकि उनकी निरंतरता पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन चयनकर्ता बखूबी जानते हैं कि 2027 का महाकुंभ अभी काफी दूर है। हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण विराट कोहली के इस सीरीज से बाहर होने के बाद टॉप ऑर्डर में बदलाव तय है। संभावना है कि रोहित और शुभमन गिल पारी की शुरुआत करेंगे, जबकि ईशान किशन और यशस्वी जायसवाल के बीच नंबर तीन के स्थान के लिए मुकाबला होगा।
अगले हार्दिक की तलाश
इस afg vs ind मुकाबले का सबसे दिलचस्प पहलू नितीश कुमार रेड्डी का उभरना है। टीम लंबे समय से एक ऐसे सीम-बॉलिंग ऑलराउंडर की तलाश में है जो चोटों से जूझने वाले हार्दिक पांड्या का विकल्प बन सके, और रेड्डी फिलहाल इस दौड़ में सबसे आगे हैं। उनकी बल्लेबाजी क्षमता को तो सराहा गया है, लेकिन असली परीक्षा उनकी गेंदबाजी के स्टैमिना की है। क्या वह वनडे परिस्थितियों में लगातार 10 ओवर की गुणवत्तापूर्ण मध्यम गति की गेंदबाजी कर पाएंगे? इस सीरीज में उनका प्रदर्शन तय करेगा कि वह एक अस्थायी समाधान हैं या 2027 की पहेली का एक मुख्य हिस्सा।
वहीं, शुभमन गिल के लिए यह एक बड़ी अग्निपरीक्षा है। कप्तान के तौर पर उनका कार्यकाल दो सीरीज हार के साथ थोड़ा कठिन रहा है, और मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ अपनी पकड़ मजबूत करने का उन पर भारी दबाव है। अफगानिस्तान के खिलाफ जीत टीम को स्थिरता देगी और प्रबंधन को गेंदबाजी रोटेशन के साथ प्रयोग करने का मौका मिलेगा, विशेष रूप से वाशिंगटन सुंदर और खराब फॉर्म से जूझ रहे कुलदीप यादव के स्पिन विकल्पों के साथ।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
यह सीरीज ट्रॉफी जीतने से ज्यादा 'प्रक्रिया' के बारे में है—एक ऐसा शब्द जो यहाँ वाकई मायने रखता है। भारतीय क्रिकेट अभी एक ऐसे बदलाव के दौर में है जहाँ लंबे समय तक चलने वाले कैलेंडर की मांगों के कारण वरिष्ठ खिलाड़ियों पर निर्भरता कम करना अनिवार्य हो गया है। रेड्डी, अय्यर और युवा ओपनिंग जोड़ी जैसे खिलाड़ियों को अभी से लगातार मौके देकर, प्रबंधन एक ऐसी बेंच स्ट्रेंथ तैयार करना चाहता है जो किसी बड़े टूर्नामेंट से ठीक पहले किसी प्रमुख खिलाड़ी के चोटिल होने पर भी टीम को बिखरने न दे।
धर्मशाला की परिस्थितियां, जो अपनी गति और उछाल के लिए जानी जाती हैं, यह परखने के लिए एक आदर्श प्रयोगशाला हैं कि क्या ये नए संयोजन अफगानिस्तान जैसी जुझारू टीम के खिलाफ टिक पाएंगे। दर्शकों के लिए यह एक नई टीम को देखने का मौका है, तो चयनकर्ताओं के लिए यह उस बेंच स्ट्रेंथ का पहला वास्तविक ऑडिट है जो अंततः अगले वर्ल्ड कप चक्र में भारत के प्रदर्शन को परिभाषित करेगा।
कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।