कुलदीप की पहेली: क्यों भारत का 2027 वर्ल्ड कप ब्लूप्रिंट एक स्पिनिंग बॉल पर टिका है
भारत की 2027 वर्ल्ड कप की योजनाएं कुलदीप के लय में लौटने पर निर्भर हो सकती हैं
जैसे-जैसे टीम का सबसे अनुभवी स्पिनर अपनी घातक लय को फिर से पाने की कोशिश कर रहा है, टीम मैनेजमेंट मिडिल-ओवर्स की रणनीति को मजबूत करने के लिए इस चाइनामैन गेंदबाज पर बड़ा दांव लगा रहा है।
नेट्स में जब कुलदीप यादव गेंदबाजी करने आते हैं, तो एक खास और जानी-पहचानी हलचल देखने को मिलती है। वह उछाल, वह कदम और क्रीज पर आने का उनका सिग्नेचर जंप सब कुछ वैसा ही है, लेकिन वह सटीकता जो कभी उन्हें दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों के लिए खौफ का सबब बनाती थी, उसमें अब उतार-चढ़ाव दिख रहा है। 121 मैचों में 194 विकेट के साथ, कुलदीप यकीनन मिडिल-ओवर्स में भारत के सबसे घातक हथियार हैं, फिर भी वह उस टीम में अपनी पक्की जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसकी नजरें अब 2027 वर्ल्ड कप पर टिकी हैं।
आंकड़े बताते हैं कि वह एक बड़े मील के पत्थर के करीब हैं—200 वनडे विकेट से सिर्फ छह विकेट दूर—लेकिन हालिया टीम चयन कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। मौजूदा सीरीज में उन्हें बहुत कम मौके मिले हैं, जहां मानव सुथार और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों को तरजीह दी गई है, और धर्मशाला में हर्ष दुबे भी उनसे आगे निकल गए हैं। यह एक ऐसे गेंदबाज के लिए अजीब दौर है जो आत्मविश्वास और लय पर निर्भर रहता है, और जिसकी खेल के रुख के खिलाफ विकेट लेने की क्षमता जसप्रीत बुमराह सहित मौजूदा सेटअप के किसी भी अन्य गेंदबाज से कहीं बेहतर है।
तकनीकी बारीकियां
चेन्नई में हालिया ट्रेनिंग सेशन के दौरान, पूरा ध्यान बारीकियों पर रहा है। स्पिन बॉलिंग कोच साईराज बहुतुले लगातार उनके साथ मौजूद रहे हैं और लगभग हर गेंद के बाद कुलदीप पर नजर रखे हुए हैं। वे गेंद के लोड-अप से लेकर उस पर दी जाने वाली स्पिन तक हर चीज का विश्लेषण कर रहे हैं। टीम मैनेजमेंट जानता है कि जहां दूसरे गेंदबाज रन रोकने का काम कर सकते हैं, वहीं कुलदीप वे ब्रेकथ्रू दिलाते हैं जो मैच का रुख बदल देते हैं।
असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट ने गिरावट की किसी भी चर्चा को खारिज करते हुए सार्वजनिक रूप से 31 वर्षीय इस खिलाड़ी का समर्थन किया है। तर्क सीधा है: कुलदीप को लगातार मैच खेलने का मौका नहीं मिला है, और मैनेजमेंट को अब भी यकीन है कि वह उनका 'ट्रंप कार्ड' हैं। 2027 वर्ल्ड कप में दबदबा बनाने की कोशिश कर रही टीम के लिए, मिडिल-ओवर्स का चरण ही वह जगह है जहां टूर्नामेंट जीता या हारा जाएगा, और यहीं पर कुलदीप की अनूठी चाइनामैन शैली अपरिहार्य हो जाती है।
बड़ी तस्वीर
यह महत्वपूर्ण क्यों है? क्योंकि भारत का वर्तमान टीम ट्रांजिशन सिर्फ तेज गेंदबाजों को रोटेट करने या बल्लेबाजी क्रम बदलने से कहीं बढ़कर है। यह अगले बड़े ग्लोबल साइकिल के लिए मुख्य आधार तैयार करने के बारे में है। हालांकि युवा प्रतिभाओं को परखा जा रहा है, लेकिन कुलदीप जैसे अनुभवी खिलाड़ी पर निर्भरता यह दिखाती है कि मैनेजमेंट 'मिडिल-ओवर्स के शून्य' को लेकर सतर्क है।
यदि भारत 15वें से 40वें ओवर के बीच साझेदारी तोड़ने के लिए एक विश्वसनीय विकेट-टेकर नहीं ढूंढ पाता है, तो उनकी गेंदबाजी आक्रमण के अनुमानित होने का खतरा बढ़ जाएगा। टीम फिलहाल नए चेहरों को तैयार करने की जरूरत और इस कड़वी सच्चाई के बीच संतुलन बना रही है कि बड़े टूर्नामेंट केवल प्रयोगों से नहीं जीते जाते। कुलदीप आगामी चेन्नई वनडे में अपनी लय हासिल करते हैं या हाशिए पर बने रहते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा, क्योंकि अगले तीन वर्षों के लिए भारत की गेंदबाजी इकाई की रणनीतिक क्षमता इसी बात पर निर्भर करेगी।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।