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संघर्ष का छिपा हुआ हिसाब: ट्रंप का ईरान युद्ध बिल और पेंटागन की वित्तीय हकीकत

मिसाइलें, ड्रोन, क्षतिग्रस्त बेस और खाली होते जखीरे: ट्रंप के सामने ईरान युद्ध का भारी-भरकम बिल

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 25 जून 2026· 3 मिनट पढ़ें
संघर्ष का छिपा हुआ हिसाब: ट्रंप का ईरान युद्ध बिल और पेंटागन की वित्तीय हकीकत
संघर्ष का छिपा हुआ हिसाब: ट्रंप का ईरान युद्ध बिल और पेंटागन की वित्तीय हकीकत

हालिया सैन्य संघर्षों की धूल अभी ठीक से बैठी भी नहीं है कि अमेरिका को अरबों डॉलर के भारी-भरकम बिल का सामना करना पड़ रहा है, जो लंबी अवधि के रक्षा आधुनिकीकरण को पटरी से उतारने की धमकी दे रहा है।

तेहरान के ऊपर से धुआं अभी छंटा ही था कि वाशिंगटन में गणित डरावना दिखने लगा है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के नए आंकड़ों से पता चलता है कि ईरान के खिलाफ हालिया अमेरिकी सैन्य अभियानों का खर्च 34 बिलियन डॉलर से 42 बिलियन डॉलर के बीच पहुंच गया है। आने वाले ट्रंप प्रशासन के लिए, यह केवल विदेश नीति का मामला नहीं है; यह एक तत्काल वित्तीय संकट है। चूंकि 2026 और 2027 के रक्षा बजट में इस स्तर के संघर्ष का कोई प्रावधान नहीं था, इसलिए पेंटागन अब अपने खजाने के खाली होने से पहले अतिरिक्त फंड जुटाने की दौड़ में लगा है।

वित्तीय विवरण एक ऐसे युद्ध की कहानी कहता है जो अलग-अलग और महंगे चरणों में लड़ा गया। जहां शुरुआती तैनाती का खर्च अपेक्षाकृत कम 170 मिलियन डॉलर था, वहीं युद्ध के चरण में महंगे हथियारों की भारी खपत देखी गई। पेंटागन का सबसे बड़ा खर्च—पूरे 26.1 बिलियन डॉलर—सीधे गोला-बारूद पर हुआ। कम समय में 13,600 से अधिक स्ट्राइक हथियार, जिनमें टॉमहॉक मिसाइलें और जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइलें (JASSM) शामिल हैं, खर्च कर दी गईं। हथियारों के इस तेजी से इस्तेमाल ने सत्ता के गलियारों में उच्च-स्तरीय जखीरे के खत्म होने और लंबे समय तक तनाव झेलने की अमेरिकी सैन्य क्षमता पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

क्षय की कीमत

मिसाइल हमलों के शोर-शराबे के अलावा, परिचालन लागत भी लगातार बढ़ रही है। क्षेत्रीय बेस पर ईरानी हमलों ने आश्चर्यजनक रूप से प्रभावी परिणाम दिखाए, जिससे हैंगर, बैरक और गोदामों को बार-बार निशाना बनाए जाने के कारण 4 बिलियन से 9.4 बिलियन डॉलर के बीच नुकसान का अनुमान है। इसमें 42 विमानों—मुख्य रूप से ड्रोन—का नुकसान या क्षति (3.5 बिलियन डॉलर तक) और ईंधन की कीमतों में 1.4 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी जोड़ दी जाए, तो वित्तीय घाटे का दायरा स्पष्ट हो जाता है। हालांकि क्षेत्रीय सहयोगियों ने खतरों को रोककर कुछ दबाव कम करने में मदद की, लेकिन परिचालन गति और जोखिम भत्ते के रूप में 750 मिलियन डॉलर सहित अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।

लॉजिस्टिकल चुनौती संघीय कैलेंडर के कारण और जटिल हो गई है। वित्तीय वर्ष 2027 का फंड अक्टूबर 2026 तक लॉक है, जिससे कांग्रेस के पास या तो मौजूदा बजट लाइनों को फिर से व्यवस्थित करने या नया आपातकालीन खर्च पारित करने का विकल्प बचा है। बताया जा रहा है कि पेंटागन के अधिकारी दूसरे विकल्प पर जोर दे रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि महत्वपूर्ण आधुनिकीकरण कार्यक्रमों से फंड काटने पर अमेरिकी सेना लंबे समय में कमजोर हो जाएगी। इस बीच, संघीय सरकार के अन्य विभागों पर भी असर पड़ रहा है, जिसमें साइबर रक्षा और परमाणु निगरानी के लिए एजेंसियों ने 1 बिलियन डॉलर अतिरिक्त खर्च किए हैं, साथ ही पूर्व सैनिकों के लाभ के लिए सालाना 400 मिलियन डॉलर की स्थायी प्रतिबद्धता भी शामिल है।

यह क्यों मायने रखता है

इसके व्यापक निहितार्थ स्पष्ट हैं। इस संघर्ष ने अमेरिका की रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं और उसकी औद्योगिक क्षमता के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। जब दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना एक क्षेत्रीय संघर्ष में अपने एक-चौथाई उच्च-स्तरीय इंटरसेप्टर खत्म कर देती है, तो उन जखीरों की निवारक क्षमता पर बुनियादी सवाल उठने लगते हैं। वैश्विक स्थिरता पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, इन खर्चों की अनिश्चितता एक अस्थिर माहौल बनाती है, जिससे सेंसेक्स जैसे बाजार संकेतक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और रक्षा विनिर्माण के संरचनात्मक जोखिमों के सामने गौण लगने लगते हैं। ट्रंप को अब एक ऐसी सेना विरासत में मिली है, जिसे खत्म हो चुके शस्त्रागार की हकीकत और विदेशी अभियानों के लिए 'ब्लैंक चेक' देने को लेकर सतर्क होती कांग्रेस के बीच संतुलन बनाना होगा।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।