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जंतर-मंतर पर चम्मचों की खनक और खोई हुई उम्मीदों का शोर

‘प्रेरणा खत्म, जवाबदेही शून्य’: जंतर-मंतर पर CJP के विरोध प्रदर्शन में छात्रों ने क्या कहा

द्वारा कबीर शर्माप्रकाशित 20 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
जंतर-मंतर पर चम्मचों की खनक और खोई हुई उम्मीदों का शोर
जंतर-मंतर पर चम्मचों की खनक और खोई हुई उम्मीदों का शोर

देश की राजधानी के दिल से, छात्रों और परीक्षार्थियों का एक बढ़ता हुआ समूह बार-बार हो रही परीक्षा विफलताओं के लिए जवाबदेही की मांग कर रहा है।

इस शनिवार जंतर-मंतर पर मचा शोर केवल दिल्ली के ट्रैफिक का नहीं था; यह थाली और चम्मचों की लयबद्ध खनक थी। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आह्वान पर, मुंबई और बिहार जैसे दूर-दराज के इलाकों से आए सैकड़ों छात्र देश के परीक्षा ढांचे में आई व्यवस्थागत खामियों के खिलाफ विरोध करने के लिए एकजुट हुए। अपनी हताशा के प्रतीक के रूप में रसोई के बर्तन लेकर पहुंचे इन छात्रों का संदेश साफ था: युवा पेपर लीक और संस्थागत उदासीनता से तंग आ चुके हैं।

विश्वास का संकट

जमीन पर माहौल जश्न का बिल्कुल नहीं था। कई लोगों के लिए, यह विरोध NEET पेपर लीक के खिलाफ एक हताश प्रतिक्रिया थी, एक ऐसा घोटाला जिसने परीक्षार्थियों की एक पूरी पीढ़ी को अधर में लटका दिया है। 18 वर्षीय छात्रा हुनर जैन भीड़ में खड़ी अपने साथियों के मानसिक आघात पर बात कर रही थीं। उन्होंने एक ऐसी सहेली का जिक्र किया, जिसने महीनों की कड़ी मेहनत के बाद अब पूरी तरह से प्रेरणा खो दी है। जैन ने कहा, "एक महीने से ज्यादा हो गया है, उसके परिवार और दोस्त उसकी काउंसलिंग कर रहे हैं। अब उसमें दूसरी परीक्षाओं में बैठने की इच्छाशक्ति भी नहीं बची है।"

यह हताशा केवल एक पेपर लीक होने को लेकर नहीं है; यह सीधे तौर पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर केंद्रित है। JNU के पीएचडी स्कॉलर्स और अन्य प्रतिभागियों ने सरकार की प्रतिक्रिया के विरोधाभास की ओर इशारा किया: सरकारी तंत्र टेलीग्राम जैसे संचार ऐप्स को बैन करने या पेपर एयरलिफ्ट करने के लिए तो तत्पर है, लेकिन परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने में असमर्थ है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रिसर्च स्कॉलर रणविजय ने सवाल किया, "वे खुद परीक्षा आयोजित क्यों नहीं कर सकते? इसे ऐसी एजेंसी को आउटसोर्स क्यों किया जाता है जो किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है?"

बड़ी तस्वीर

यह मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों है? जंतर-मंतर पर यह जमावड़ा इस बात का संकेत है कि छात्र अब नौकरशाही की विफलताओं के प्रति अपना विरोध कैसे दर्ज करा रहे हैं। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और महत्वपूर्ण परीक्षाओं को आउटसोर्स करने पर सवाल उठाकर, यह आंदोलन व्यक्तिगत शिकायतों से आगे बढ़कर शासन की व्यापक संरचनात्मक आलोचना की ओर बढ़ रहा है। जब पेशेवर जीवन में प्रवेश का आधार योग्यता के बजाय किस्मत का खेल बन जाता है, तो राज्य और उसके महत्वाकांक्षी युवाओं के बीच का सामाजिक अनुबंध टूटने लगता है।

सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। जब तक NTA पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही के लिए आलोचना का केंद्र बनी रहेगी, जंतर-मंतर का यह विरोध जनविश्वास का पैमाना बना रहेगा। जब तक पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक 'थाली और चम्मच' का यह विरोध एक बार की घटना बनकर नहीं रहेगा। यह इस बात का संकेत है कि छात्रों द्वारा महसूस की जा रही 'खोई हुई प्रेरणा' अब व्यवस्थागत बदलाव की मांग में बदल रही है, जिसे मौजूदा परीक्षा प्रणाली पूरा करने में विफल साबित हो रही है।

द्वारा कबीर शर्मा
फ़ीचर्स लेखक

कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।